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HC रूम होगा लाइव:इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुकदमों की लाइव स्ट्रीमिंग की तैयारी, जनहित याचिका दायर; चीफ जस्टिस ने मांगे सुझाव; इन देशों में पहले से व्यवस्था

प्रयागराज7 दिन पहले
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जनिहत याचिका भी दायर, अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
जनिहत याचिका भी दायर, अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी। (फाइल फोटो)
  • लीगल रिपोर्टर, चार अन्य छात्रों व अधिवक्ताओं की ओर से भी इस आशय की याचिका की गई है दायर, अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी
  • दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में पत्रकारों को भी जाने की मांगी गई है इजाजत, सामान्य दिनों में कोर्ट में प्रवेश पर किसी प्रकार की रोक नहीं-हाईकोर्ट

आने वाले दिनों में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुकदमों की आप लाइव स्ट्रीमिंग देख सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के निर्देशों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने इस संबंध में सुझाव मांगे हैं। इसको लेकर एक जनिहत याचिका भी दायर हुई है, जिसपर अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी मुकदमों की सुनवाई के दौरान न्यायालयों की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए व्यवस्था की जा रही है। यह बात लाइव स्ट्रीमिंग की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आई है।

हाईकोर्ट में विचाराधीन है मामला
न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के अधिवक्ता आशीष मिश्र ने कोर्ट को बताया कि इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय की ई- कमेटी के निर्देश पर विचार करने और सुझाव देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। आशीष मिश्र ने कहा कि यह मामला हाईकोर्ट में प्रशासन स्तर पर विचाराधीन है, जिसमें चीफ जस्टिस से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। हाईकोर्ट के अधिवक्ता की इस बात पर खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई स्थगित करते हुए कृत कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी है। याचिका पर अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

इंट्री पास बनाने और कोर्ट रूम से ही लाइव अपडेट करने की मांगी अनुमति
लाइव रिपोर्टिंग की मांग समय-समय पर पत्रकार भी करते रहे हैं। एक लीगल रिपोर्टर, चार अन्य छात्रों व अधिवक्ताओं की ओर से भी इस आशय की मांग की गई है। दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में पत्रकारों को भी जाने की इजाजत दिए जाने, उनका इंट्री पास बनाने और कोर्ट रूम से ही लाइव अपडेट करने की अनुमति दिए जाने की भी मांग की गई है। कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली ई-कमेटी ने इस संदर्भ में पांच दिन पूर्व दिशा निर्देश जारी किए थे। इस पर जवाब में कहा गया है कि फिलहाल सामान्य दिनों में कोर्ट रूम में इंट्री पर कोई रोक नहीं है।

लाइव स्ट्रीमिंग पर सीजेआइ ने क्या कहा है?
'सक्रिय रूप से कुछ न्यायालयों के लिए कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इसे शुरू करने से पहले सभी न्यायाधीशों से आम सहमति लेनी होगी।' भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व में तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने साल 2018 में स्वप्निल त्रिपाठी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लाइव- स्ट्रीमिंग करने के विचार को प्रमुख रूप से स्वीकार किया था। कोर्ट ने फैसले में कहा था कि लाइव-स्ट्रीमिंग से न्यायिक कार्यवाही की पारदर्शिता बढ़ेगी।

जस्टिस चंद्रचूड़ भी कर चुके हैं सिफारिश
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ (जो कि स्वप्निल त्रिपाठी निर्णय देने वाली पीठ का हिस्सा थे) ने पिछले महीने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी लाइव-स्ट्रीमिंग के लिए नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। जस्टिस चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के प्रमुख हैं। हाल के एक फैसले में जस्टिस चंद्रचूड़ ने लाइव-स्ट्रीमिंग की आवश्यकता पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट के नियमों में आवश्यक संशोधन अभी तक लाइव-स्ट्रीमिंग के लिए तौर-तरीकों को लागू करने के लिए नहीं किए गए हैं।

गुजरात हाई कोर्ट में शुरू हो चुकी है लाइव स्ट्रीमिंग
गुजरात हाई कोर्ट ने सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू कर दी है। अक्टूबर 2020 में ही गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस विक्रम नाथ की कोर्ट की कार्यवाही का इंटरनेट पर सीधा प्रसारण किया गया था। अब यूट्यूब पर गुजरात हाईकोर्ट के चैनल पर जाकर कोई भी लाइव स्ट्रीमिंग देख सकता है। हाईकोर्ट ने ऐसा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के अनुरूप किया है, जिसमें कहा गया था कि जनता को वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की सुनवाई देखने की मंजूरी मिलनी चाहिए।

जानिए किन देशों में होती है लाइव स्ट्रीमिंग

  • कनाडा : कनाडा के सुप्रीम कोर्ट के अंदर सुनवाई कनाडाई संसदीय मामलों के चैनल (सीपीएसी) पर प्रसारित की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ऐसे वीडियो पर कॉपीराइट रखता है। हालांकि, फीड अन्य नेटवर्क के लिए भी उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा कोई अदालत के अधिकारियों से अनुरोध करके शैक्षिक, गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए सुनवाई के वीडियोज का प्रयोग कर सकता है।
  • यूनाइटेड किंगडम: यूके ने संवैधानिक सुधार अधिनियम, 2005 में संशोधन के बाद सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति दी थी। कार्यवाही अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीम की जाती है। रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाता है कि कोर्ट की कार्यवाही में किसी भी प्रकार की बाधा न पड़े।
  • ऑस्ट्रेलिया: यहां अदालत की कार्यवाही का सीधा प्रसारण तो नहीं होता पर प्रशासन वीडियो को रिकॉर्ड करता है। रिकॉर्ड किए हुए वीडियो को बाद में आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है। कोर्ट स्टाफ के अलावा किसी और द्वारा इसका फिल्मांकन करना या फोटो खींचना सख्त मना होता है।
  • न्यूजीलैंड: यहां कार्यवाही का सीधा प्रसारण नहीं किया जाता है, बल्कि न्यूजीलैंड में रिकॉर्ड किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट आवेदन करने पर मीडिया को ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की अनुमति देता है।
  • दक्षिण अफ्रीका: दक्षिण में सुप्रीम कोर्ट और निचली अदालत की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में प्रभारी न्यायाधीश की सहमति पर कार्यवाही को रिकॉर्ड करने और टीवी पर प्रसारित करने के उद्देश्य से अदालत के अंदर मीडिया को भी इंट्री दे रखी है।
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