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कोरोना काल में बदहाल व्यवस्था देख निकल पड़े चुनाव लड़ने:प्रयागराज के शहर दक्षिणी से तरूण बने MLA उम्मीदवार, दूसरी लहर में खो चुके हैं 2 भाई

प्रयागराज10 महीने पहले
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कोरोना काल में दो सगे भाइयाें को खो चुके हैं तरूण श्रीवास्तव। - Dainik Bhaskar
कोरोना काल में दो सगे भाइयाें को खो चुके हैं तरूण श्रीवास्तव।

तरूण श्रीवास्तव कोई खानदानी या पुराने बड़े नेता नहीं है लेकिन पढ़े लिखे जरूर हैं। इनके राजनीति में आने की कहानी और नेताओं से थोड़ी हटकर है। तरूण अपने दो सगे भाइयों को कोरोना की दूसरी लहर में खो चुके हैं। इन्होंने सरकारी व्यवस्था को उसी दौरान बहुत नजदीक से देखा। अपने भाइयों के साथ-साथ कोरोना मरीजों को तड़पते हुए और मरते हुए देखा है। अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज में किस हद तक लापरवाही की गई यह तरूण से बेहतर शायद ही कोई और बता सकता है।

अपने दोनों भाईयों (अरूण श्रीवास्तव और अभिषेक श्रीवास्तव) को बचाने के लिए जो भी जतन हो सकता था करते रहे लेकिन फिर उन्हें बचाने में असफल हुए। बस यहीं से वह राजनीति में इंट्री करते हैं और इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ लड़ने निकल पड़ते हैं। शुरूआत विधानसभा-2022 से की और निर्दल प्रत्याशी के रूप में शहर दक्षिणी से नामांकन किया।

कैबिनेट मंत्री नंदी के सामने लड़ रहे चुनाव

तरूण श्रीवास्तव उसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं जहां से योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी भी चुनाव लड़ रहे हैं। इसी शहर दक्षिणी से सपा के रईस शुक्ला भी प्रत्याशी के रूप में प्रचार प्रसार कर रहे हैं। तरूण श्रीवास्तव समाजशास्त्र से MA की पढ़ाई किए हैं और कंप्यूटर के शिक्षक भी रह चुके हैं।

इनका प्रचार प्रसार करने का तरीका नायाब है। इन्होंने चोर-चांडाल मुक्ति मोर्चा नारों के साथ लोगों को यह बता रहे हैं कि सरकारी व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो चुकी है। यह कहते हैं कि अस्पतालों में मरीजों के इलाज में किस तरह की लापरवाही की जाती है उसे बहुत बारीकी से देखें हैं वह इसे खत्म करना चाहते हैं, इसलिए आमजन का सहयोग चाहिए।

तुम मुझे वोट दो-मैं तुम्हें आजादी दूंगा

संतोष केसरवानी अनूठे अंदाज में कर रहे हैं अपना प्रचार
संतोष केसरवानी अनूठे अंदाज में कर रहे हैं अपना प्रचार

संतोष केसरवानी ने नामांकन के आखिरी दिन सबसे आखिरी प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। गले में अपना संदेश टांगे यह लोगों के बीच में जाकर चुनावी प्रचार कर रहे हैं। यह कहते हैं कि मेरी लड़ाई सीधे मंत्री नंदी से है और मैं उन्हें इस चुनाव में शिकस्त देने के लिए मैदान में उतरा हूं। लोगों में जाकर कहते हैं… तुम मुझे एक वोट दो- मैं तुम्हें आजादी दूंगा। ना तो बाइक है और ना ही कार। पैदल चलते हैं और पीठ पर बैग लिए कुछ कागजात भी साथ लेकर प्रचार प्रसार निकलते हैं।

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