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लापता बेटी को पाकर खुशी से झूम उठे मां-बाप:प्रयागराज में मां के डांटने पर 11 साल की उम्र में घर छोड़कर चली गई थी शाहीन, 6 साल बाद लौटी

प्रयागराज3 महीने पहले
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प्रयागराज के मंफोर्डगंज की रहने वाली है शाहीन - Dainik Bhaskar
प्रयागराज के मंफोर्डगंज की रहने वाली है शाहीन

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के मंफोर्डगंज की रहने वाली शाहीन 6 साल बाद अपने घर सही सलामत वापस लौट आई है। 11 साल की उम्र में मां के डांटने पर वह घर छोड़कर भाग गई थी। लापता बेटी को पाकर घरवाले खुश हैं। पुरानी बातें याद करने पर उनकी आंखें नम हो जा रही है।

11 साल की उम्र में शाहीन ने छोड़ दिया था घर

घटना 2015 की है। मंफोर्डगंज में रहने वाले सलीम उर्फ डब्लू अपनी पत्नी तबस्सुम, बड़ी बेटी शाहीन (11) व बेटे सिराज और मेराज के साथ खुशहाल जीवन जी रहे थे। एक दिन उनकी बड़ी बेटी शाहीन ने शरारत की तो मां ने डांट दिया। उस समय वह 11 वर्ष की थी। इसके बाद गुस्से में शाहीन अपने घर से निकल गई।

मां-बाप ने बहुत खोजा, लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं चल पाया। यह खोज पिछले छह सालों से जारी थी। घरवाले कभी बेटी के सकुशल मिलने की उम्मीद करते तो कभी निराश हो जाते। फिर भी उन्होंने अपनी बेटी के मिलने की आस नहीं छोड़ी। दो जून को उनकी इच्छा पूरी हो गई।

6 साल बाद सही सलामत लौटी घर

उनकी बेटी छह साल बाद अपने सकुशल घर वापस आ गई। बेटी के पांव जब सलीम के घर में पड़े तो सभी की आंखें नम हो गई। शाहीन की आंखों में भी खुशी के आंसू थे। सभी ने उसको अपने गले से लगा लिया। सभी एक साथ पूछ रहे थे। बेटी तू कहां चली गई थी, तेरी मां का रो-रोकर बुरा हाल था। वह कुछ न बोल सकी। बस रोती ही रही।

समाज सेवी ने मां-बाप को खोजा

इस सुखद कहानी के पीछे एक समाजसेवी की अहम भूमिका रही। शाहीन का छह साल से कोई पता नहीं था कि वो कहां है, किस हाल में है। तभी समाज सेवी अरशद नवाज को 28 अप्रैल 2021 को एक वायरल वीडियो मिला,जो एनजीओ ग्रेस केयर होम, गाजियाबाद ने वायरल की थी।

इस वीडियो में शाहीन अपना,अपने माता-पिता व शहर का नाम बताती हुई दिख रही है। इसके अलावा अपने माता-पिता से उसे यहां से ले जाने की अपील कर रही है।अरशद ने वीडियो को देखने के बाद उसके बताए पते पर जाकर मम्फोर्डगंज में तलाश शुरू की तो उसका परिवार वहां नहीं मिला।

अरशद नवाज ने नहीं मानी हार

पता चला कि उसका परिवार यहां से छह साल पहले ही घर छोड़कर चला गया है। अरशद नवाज ने हिम्मत नहीं हारी और निरंतर प्रयास करता रहा। इसी बीच अरशद नवाज की समाजसेवी अनवर खान से बात हुई। दोनों ने उसके घर का पता लगाने की कोशिश की तो उसके पिता का कहीं से नंबर मिल गया। पता चला कि अब वह परिवार म्योराबाद में रहता है।

सही सलामत घर पहुंची शाहीन
सही सलामत घर पहुंची शाहीन

एनजीओ के संचालक ​​​​​ने की मदद
अरशद खोजते खोजते शाहीन के पिता के पास म्योराबाद पहुंचे। जब उन्होंने बताया कि छह साल पहले उनकी गायब बेटी सकुशल है तो परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी गाजियाबाद के एनजीओ में है। अब अगली कोशिश शुरू हुई बच्ची को परिवार तक पहुंचाने की।

इस काम में सबसे अहम भूमिका रही जूविनाइल कोर्ट मजिस्ट्रेट मोहम्मद हसन जैदी (सैम जैदी) की। अरशद नवाज ने एसएम जैदी से पूरी बात बताई फिर उनके माध्यम से बात हुई गाजियाबाद की मजिस्ट्रेट मधु से। उनके सहयोग के बाद ग्रेस केयर होम एनजीओ के संचालक सुमित से फोन पर बात हुई।

बेटी को देखा तो भर आई आंखें

इसके बाद परिवार को सारे डॉक्यूमेंटस के बारे में बताया गया। सभी कागजी कोरम पूरा होने के बाद एनजीओ ने बेटी शाहीन से वीडियो कॉल के माध्यम से बात कराई। बेटी को सकुशल देखने के बाद परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा।आंखें भर आई।

अगले दिन अरशद नवाज ने टिकट देकर बच्ची के पिता व दादा को गाजियाबाद के लिए रवाना किया। जब शाहीन ने अपने पापा और दादा को देखा तो खुशी से उछल पड़ी।

सारी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बच्ची अपने पिता और दादा के साथ दो जून की सुबह अपने परिवार के बीच पहुंची तो पूरे परिवार में जश्न का माहौल हो गया। सभी खुशी से झूम उठे। सभी की आंखें नम हो गईं।

इतने साल तक सुरक्षित हाथों में रही शाहीन

शाहीन जब घर से निकली तो वह घूमते घूमते रेलवे स्टेशन पहुंची। वहां से मुंबई जाने वाली ट्रेन में बैठ गई। इसके बाद मुंबई पहुंच गई। वहां प्लेटफार्म पर जब उसे पुलिस वालों में इधर-उधर घूमते देखा तो पकड़ लिया। पूछताछ की तो पता चला कि वह इलाहाबाद की रहने वाली है।

बस केवल अपने माता-पिता का नाम ही बता पा रही थी। इसके बाद पुलिस वालों ने उसे एक एनजीओ के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद उस एनजीओ ने शाहीन को गाजियाबाद सेंटर पढ़ाई के लिए भेज दिया।

तब से शाहीन गाजियाबाद ही रह रही थी। शाहीन ने बताया कि उसे कहीं कोई दिक्कत नहीं हुई। एनजीओ ने उसका पूरा ध्यान रखा। शाहीन के पिता कहते हैं कि अल्लाह का शुक्र रहा कि मेरी बेटी सुरक्षित हाथों में रही।

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