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इलाहाबाद हाईकोर्ट की 6 बड़ी खबरें:हाईकोर्ट ने गन्ना आयुक्त से पूछा- क्या किसानों के बकाया गन्ना मूल्य पर देय ब्याज में कटौती की सरकार मंजूरी ने दी है

प्रयागराज2 महीने पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी से पूछा है कि क्या उनके विभाग ने किसानों के बकाया गन्ना मूल्य पर देय ब्याज में कटौती की मंजूरी राज्य सरकार से ले ली है अथवा नहीं। कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अगर मंजूरी नहीं ली गई है, तो ली जाए और गन्ना किसानों को उनके ब्याज का भुगतान किया जाए।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक बीएम सिंह की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रकाश पाटिया ने बुधवार को यह आदेश दिया।

अवमानना याचिका हाईकोर्ट द्वारा 9 जनवरी 2014 को पारित आदेश का अनुपालन कराने के लिए दाखिल की गई है। याची का कहना था कि हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को 3 सप्ताह में किसानों को बकाया ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया था। जिसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है।

दूसरी ओर, गन्ना आयुक्त की ओर से हलफनामा दाखिल कर कहा गया कि किसानों को मिलने वाले ब्याज को लेकर निर्णय 25 मार्च 2019 को ले लिया गया है। इसके हिसाब से मुनाफे वाली मिले 12% की दर से, जबकि घाटे वाली मिले 7% की दर से ब्याज का भुगतान करेंगे।

गन्ना आयुक्त बार-बार गलत हलफनामा दाखिल कर गुमराह कर रहे

जवाब में याची का कहना था कि गन्ना आयुक्त द्वारा बार-बार गलत हलफनामा दाखिल कर गुमराह किया जा रहा है। वास्तविकता यह है कि ब्याज दर में कमी करने का अधिकार गन्ना आयुक्त को नहीं है और यह कार्य बिना कैबिनेट की मंजूरी के नहीं हो सकता है। इस पर कोर्ट ने जानकारी मांगी कि क्या सरकार ने ब्याज दर कम करने की मंजूरी दी है। जिस पर गन्ना आयुक्त के वकील ने जानकारी करने के लिए समय की मांग की। कोर्ट ने समय देते हुए स्पष्ट किया है कि अगर कैबिनेट की मंजूरी नही ली गई है, तो मंजूरी ले ली जाए। और अगली सुनवाई से पहले किसानों का भुगतान किया जाए। याची ने कोर्ट को बताया कि वास्तविकता यह है कि 47 लाख गन्ना किसानों को हजारों करोड़ ब्याज मिलना था। उनमें से किसी को भी ब्याज नहीं मिला है। इस मामले कि अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

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# भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष व सचिव को नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और सचिव को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।

आल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन व इसके अध्यक्ष आचार्य श्रीकांत त्रिपाठी की याचिका पर यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है। याचिका में काउंसिल के 14वें कार्यकाल के गठन में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया गया है।

याची का कहना है कि 7 मार्च 2021 को विज्ञापन निकाला गया। इसमें सभी पत्रकार संगठनों से सदस्यता के लिए आवेदन मांगे गए। 7 अप्रैल को श्रेणीवार सूची जारी की गई और बैठकें हुईं। बाद में पता चला कि चेयरमैन ने उन्हीं को सदस्य नामित किया, जिनके दावे खारिज किए गए थे। इसमें भारी अनियमितता बरती गई है। जिसे विभिन्न आधारों पर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

# बोर्ड से चयनित अध्यापक को प्रधानाचार्य पद पर तैनाती देने पर निर्णय लेने का सचिव को निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड एलनगंज प्रयागराज के सचिव को भदांव इंटर कॉलेज थलईपुर, मऊ के प्रधानाचार्य पद पर नियुक्त करने पर दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याची से दो हफ्ते में प्रत्यावेदन सचिव को देने को कहा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने राम नारायण मिश्र की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

मालूम हो कि इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य पद की 2011 की भर्ती में याची चयनित हुआ और उसे राष्ट्रीय इंटर कॉलेज शाहपुर मुजफ्फरनगर आवंटित किया गया। लेकिन कॉलेज की प्रबंध समिति से कार्यभार ग्रहण कराने से इंकार कर दिया। जिला विद्यालय निरीक्षक ने 24 अगस्त 2019 को प्रबंध समिति को याची को प्रधानाचार्य पद पर कार्यभार ग्रहण कराने का निर्देश दिया। इसके बावजूद उसे कार्यभार ग्रहण करने नहीं दिया गया।

इसी बीच भदांव इंटर कॉलेज मऊ के प्रधानाचार्य के सेवानिवृत्त होने से पद खाली हुआ। वरिष्ठतम अध्यापक के नाते याची को कार्यवाहक प्रधानाचार्य का कार्यभार सौंपा गया है। यह पद भी 2011 की भर्ती में शामिल था। याची ने इसी पद पर तैनाती की मांग की। सुनवाई न होने पर याचिका दायर की। जिस पर कोर्ट ने सचिव बोर्ड को निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

# सामयिक संग्रह अमीनों के नियमित करने का मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज को स्पष्टीकरण के साथ 30 सितंबर को हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि कमेटी की संस्तुति के बावजूद सीजनल संग्रह अमीनों को नियमित करने की कार्रवाई न कर याची के दावे को अधिकार से वंचित क्यों किया गया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने भुवनेश्वर प्रसाद तिवारी की याचिका पर दिया है।

सरकारी वकील का कहना है कि 35 फीसदी संग्रह अमीन के पद सामयिक संग्रह अमीनों से भरे जाने का नियम है। प्रयागराज में संग्रह अमीन के 218 पद हैं, जिसमें से 35 फीसदी कोटे में 76 पद होते हैं। वर्तमान में 76 सामयिक संग्रह अमीनों के पद पर 86 सामयिक संग्रह अमीन कार्यरत हैं।

याची अधिवक्ता का कहना है कि 2016 में सामयिक संग्रह अमीनों को नियमित करने का फैसला लिया गया। 2015 की नियमावली के अनुसार, संग्रह अमीनों के 85 फीसदी पद सामयिक संग्रह अमीनों से भरे जाने चाहिए। कोर्ट ने पिछले आदेश में प्रथमदृष्टया सामयिक संग्रह अमीनों को नियमित न किए जाने को अवैध करार दिया था। 24 मई 2017 को कमेटी की संस्तुति पर जिलाधिकारी द्वारा अमल न करने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। इस पर कोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज को कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है।

# पीडीए की ऑडिट आपत्तियों की जांच की मांग खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण की ऑडिट रिपोर्ट की आपत्तियों के आधार पर आपराधिक केस दर्ज करने का निर्देश जारी करने से इंकार कर दिया है।

अपर महाधिवक्ता का कहना था कि ऑडिट रिपोर्ट में उठाई गई आपत्तियों पर विचार किया गया और कार्रवाई कर सीएजी को प्रेषित कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि आपराधिक केस दर्ज करने का कोई आधार नहीं है और याचिका खारिज कर दी है।

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने अजय कुमार मिश्र की जनहित याचिका पर दिया है।

याची का कहना था कि सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में भारी वित्तीय अनियमितता को लेकर आपत्ति की गई है जिसकी जांच कराई जाए।

कोर्ट ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता की बात नहीं है, जिसकी विवेचना कराई जाए या आपराधिक कार्रवाई की जाए।

सरकार ने साफ कर दिया कि ऑडिट आपत्तियों पर विचार कर कार्रवाई से सीएजी को अवगत करा दिया गया है। इस पर कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।

# चोट पहुंचाने के आरोपी किन्नर की जमानत मंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धारदार हथियार से गंभीर चोट पहुंचाने और विषैला पदार्थ खिलाने के आरोपी मनोज उर्फ पायल किन्नर की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। मनोज की जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने सुनवाई की याचिका पक्ष रख रहे अधिवक्ता विशाल तलवार का कहना था की याची पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उसकी इस घटना में कोई भूमिका नहीं है। घटना के वक्त और मौके पर वह मौजूद नहीं था। याची के खिलाफ थाना सिविल लाइंस मुरादाबाद में मुकदमा दर्ज है। कोर्ट ने मामले के तथ्यों और साक्ष्यों को देखते हुए तथा मौजूदा समय में कोविड-19 के कारण जिलों में अत्याधिक कैदियों की स्थिति के मद्देनजर याची को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है साक्षी शर्त लगाई है कि वह जेल से बाहर रहने के दौरान जमानत प्रावधानों का पालन करेगा अन्यथा उसकी जमानत निरस्त की जा सकती है।

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