एल्डर्स कमेटी का गठन कर चुनाव कराए बार:उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने बार एसोसिएशन बोर्ड आफ रेवेन्यू को चुनाव कराने का दिया निर्देश

प्रयागराजएक महीने पहले
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उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने बार एसोसिएशन बोर्ड ऑफ रेवेन्यू को चुनाव कराने का निर्देश दिया है। काउंसिल ने कहा है की एल्डर्स कमेटी का गठन कर जल्द चुनाव कराया जाए। बता दें कि साल कि 2004 से यहां बार एसोसिएशन के चुनाव नहीं हुए हैं। साल 1995 से हर्ष नारायण शर्मा व बीके पांडेय की कार्यकारिणी चल रही है। इसको लेकर बार एसोसिएशन के सदस्यों में आक्रोष व्याप्त था। चुनाव कराए जाने हेतु बार एसोसिएशन के सदस्यों ने माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दी है, जिसकी सुनवाई जल्द हो सकती है।

इसी बीच अध्यक्ष बार काउंसिल ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एक आदेश जारी कर बार एसोसिएशन से जल्द पांच सदस्यीय एल्डर कमेटी गठित करने को कहा और अति शीघ्र चुनाव तिथि घोषित करने हेतु कहा तथा चुनाव स्वतंत्र व निष्पक्ष कराने हेतु स्वयं सहित उपाध्यक्ष राकेश पाठक को चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया।

शिक्षा अलंकार डिग्री धारक शिक्षक की बर्खास्तगी पर दिए स्थगन आदेश को चुनौती

इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक शिकायतकर्ता द्वारा योजित विशेष अपील की पोषणीयता पर प्रश्न किया गया है । प्रतिवादी द्वारा दाखिल आपत्ति पर जवाब देने के लिए शिकायतकर्ता को 6 जुलाई तक का समय दिया गया है। विशेष अपील में एकल जस्टिस द्वारा अलीगढ़ के शिक्षा अलंकार डिग्री धारक शिक्षक की बर्खास्तगी पर दिए गए स्थगन आदेश को चुनौती दी गई है।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने साल 2011 में मिर्जापुर के शिक्षक विनोद कुमार उपाध्याय की याचिका खारिज कर दी थी कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में राष्ट्रीय पत्राचार संस्थान कानपुर की शिक्षा अलंकार डिग्री के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश का अनुपालन न होने पर वर्ष 2012 में राम मणि पांडे द्वारा अवमानना याचिका दायर की गई थी। अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान तत्कालीन सचिव जितेंद्र कुमार ने कोर्ट को हलफनामा देकर आश्वस्त किया था कि 2011 के आदेश का अनुपालन कर दिया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा 2012 में शासनादेश भी जारी किया गया था। लेकिन अधिकारियों ने अलीगढ़ के शिक्षक की सेवाएं समाप्त करने के स्थान पर 2013 में सेवाओं का विनियमितीकरण कर दिया।

2021 में अलीगढ़ के अरुण कुमार द्वारा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करने पर अधिकारियों ने शिक्षक की सेवाएं समाप्त कर दी। जिसके खिलाफ शिक्षक द्वारा याचिका योजित की गई, न्यायालय ने अंतरिम स्तर पर शिक्षक को राहत देते हुए बर्खास्तगी के खिलाफ स्थगन आदेश दे दिया ।