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गैंगस्टर ऐक्ट पर इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला:एक FIR पर भी हो सकती है कार्रवाई, रिपोर्ट दर्ज करने को चुनौती देने वाली 12 याचिकाएं खारिज

प्रयागराज3 महीने पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक आपराधिक केस पर भी गैंगस्टर एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई जा सकती है। कोर्ट ने कहा है कि अगर पुलिस इस तरह की कोई कार्रवाई करती है तो उसमें कोई भी अवैधानिकता नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने एक ही एफआईआर होने को लेकर गिरोहबंद कानून (गैंगस्टर एक्ट) के तहत रिपोर्ट दर्ज करने की वैधता को चुनौती देने वाली 12 याचिकाएं खारिज कर दी।

संज्ञान में आए अपराध की विवेचना जरूरी

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा है कि अगर दर्ज प्राथमिकी से संज्ञेय अपराध बन रहा है, तो उसकी विवेचना जरूर होनी चाहिए। यह आदेश जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर तथा जस्टिस समित गोपाल की खंडपीठ ने रितेश कुमार उर्फ रिक्की तथा अन्य की याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया है। राज्य सरकार के अपर शासकीय अधिवक्ता जेके उपाध्याय और अमित सिन्हा ने इस मामले में बहस की।

याची ने कहा- फंसाने के लिए दर्ज की गई है रिपोर्ट

याचियों ने कोर्ट में कहा कि उनके खिलाफ केवल एक एफआइआर दर्ज है। यह एफआईआर उन्हें फंसाने की नीयत से दर्ज कराई गई है। इसमें कोई विश्वसनीय, स्वतंत्र गवाह तथा साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इस मामले में कोर्ट से सभी को जमानत मिल चुकी है या गिरफ्तारी पर रोक लगी है।

अधिवक्ता ने कहा कि जमानत पर छोड़ने के आदेश के कारण गैंग चार्ट तैयार कर गैंगेस्टर एक्ट के तहत एफआइआर दर्ज कराई गई है। न किसी गैंग का पता है और न ही पुलिस के पास अपराध करने के लिए गैंग की मीटिंग का कोई साक्ष्य है। पुलिस ने जमानत पर रिहाई को रोकने के लिए बिना किसी ठोस सबूत के फंसाया है। सरकारी वकील का कहना था कि दर्ज प्राथमिकी से संज्ञेय अपराध बनता है, जिसकी विवेचना होनी चाहिए।

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