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इस माह टीईटी कराना सरकार के सामने बड़ी चुनौती:जनवरी 2022 में हो सकती है शिक्षक पात्रता परीक्षा, परीक्षा की तैयारियां शुरू, शासन स्तर से घोषित होगी डेट

एक महीने पहले
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यूपी टीईटी जनवरी के दूसरे सप्ताह तक हो सकती है। - Dainik Bhaskar
यूपी टीईटी जनवरी के दूसरे सप्ताह तक हो सकती है।

सरकार के सामने चुनावी वर्ष में 22 लाख बेरोजगारों की नाराजगी से पार पाना और समय से शिक्षक पात्रता परीक्षा कराना सबसे बड़ी चुनौती है। योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही इस बात का दावा कर रही है कि वह टीईटी दिसंबर में ही कराएगी पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। एक्सपर्ट और परीक्षा नियामक प्राधिकारी सूत्रों की मानें तो इतने कम समय में इतनी बड़ी परीक्षा करा पाना संभव नहीं है।

माना जा रहा है कि सरकार इसे जनवरी के दूसरे सप्ताह में कराने की तैयारियां कर रही है। सरकार के गले की फांस बनी टीईटी को लेकर शासन स्तर पर बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है। हालांकि डेट की अभी औपचारिक घोषणा बाकी है।

इस बार भी पेपर लीक हुआ तो सरकार की बढ़ेगी मुसीबत

योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली यूपी सरकार ने यूपीटीईटी 28 नवंबर को प्रस्तावित की थी। परीक्षा होती इसके एक दिन पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो गया। परीक्षा निरस्त कर दी गई। दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में पूरे प्रदेश से बेरोजगारी का दंश झेल रहे युवाओं की नाराजगी साफ झलक रही थी। नौकरी पाने का सपना संजोने वाले युवाओं के भीतर पेपर लीक होने से खासा नाराजगी थी। 22 लाख युवाओं और उनके जुड़े परिवारों का मामला होने के नाते सरकार दबाव में आई और सभी परिवहन निगम की बसों का बेड़ा परीक्षार्थियों को सकुशल घर ले जाने के लिए लगा दिया गया। यह सब तो ठीक है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है परीक्षा कब होगी? अभी तक न एजेंसी तय हुई और न ही प्रश्न पत्र तैयार कैसे होगी परीक्षा?

नए सचिव व परीक्षा नियंत्रक 16 घंटे कर रहे काम

योगी सरकार ने अनिल भूषण चतुर्वेदी को परीक्षा नियामक प्राधिकारी का नया सचिव बनाया है। मनोज कुमार अहिरवार को परीक्षा नियंत्रक के तौर पर नई तैनाती दी है। अनिल भूषण चतुर्वेदी इसे पहले भी सचिव का पद संभाल चुके हैं। उन्हें अनुभव तो है पर बदली परिस्थितियों में समय से नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए उन्हें कमसे कम डेढ़ माह का समय चाहिए। सरकार ने एक माह के भीतर जो परीक्षा कराने की समय सीमा दी है वह 28 दिसंबर को पूरी हो रही है। आज आठ दिसंबर हो चुकी है। ऐसे में 20 दिन में परीक्षा कराना असंभव सा है। यही कारण है कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में आजकल 16 घंटे तक अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे हैं। परीक्षा सकुशल कराना सरकार और प्राधिकारी कार्यालय की नाक का सवाल बन गया है।

15 जनवरी तक ही परीक्षा कराने पर विचार

परीक्षा 15 जनवरी तक कराने पर मंथन चल रहा है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि सचिव ने 28 दिसंबर तक परीक्षा कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। सचिव बुधवार को शासन स्तर पर हो रही मीटिंग में अपनी बात रखेंगे। इस माह के अंत तक परीक्षा कराने में क्या क्या व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं उससे अवगत कराएंगे। सूत्रों के अनुसार प्राधिकारी ने सरकार के सामने 15 जनवरी तक परीक्षा कराने का प्रस्ताव रखा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है एजेंसी का चयन न होना। पहले एजेंसी का चयन करने के लिए विज्ञापन निकालना होगा। विज्ञापन के बाद एजेंसी चयन के लिए कुछ दिन का समय देना होगा। इसके बाद एक्सपर्ट पैनल का चयन करना होगा, जोकि पेपर तैयार करेगा। इसके बाद परीक्षा तिथि के अनुसार परीक्षा केंद्रों का चयन करना होगा। 10 अति संवेदलशील जिलों में परीक्षा केंद्रों के चयन को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होगी। पूरी प्रदेश में 22 लाख परीक्षार्थियों के सेंटर तय करने और सेंटर्स पर परीक्षार्थियों के केंद्र आवंटन में कमसे कम 20 दिन का समय लगेगा। ऐसे में 15 जनवरी से पहले परीक्षा करा पाना संभव नहीं है।

लखनऊ में परीक्षा तिथि पर चल रहा मंथन

परीक्षा नियंत्रक प्राधिकारी के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि परीक्षा की तिथि को लेकर बुधवार को शासन में मीटिंग है। परीक्षा की तिथि के तय होने के बाद बाकी तैयारियां जोर पकड़ेंगी। डेट तय होने के बाद एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसके बाद परीक्षा केंद्रों का चयन होगा। इस बार डिग्री कॉलेजों को भी परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। संवेदनशील जिलाें में सेंटर्स बनाने में विशेष सावधानी बरती जा रही है।

आखिल क्यों नहीं हो सकती दिसंबर में परीक्षा? समझते हैं पूरी प्रक्रिया

  • सबसे पहले एजेंसी का चयन किया जाता है। इसके लिए अखबारों में टेंडर निकाला जाता है।
  • एजेंसी के चयन में कुछ दिन का समय देना होता है। ऐसा नहीं होता कि आज टेंडर निकाला और आज ही एजेंसी का चयन कर लिया।
  • टेंडर निकालने के बाद एजेंसी का चयन किया जाता है। उसका भौतिक निरीक्षण किया जाता है। इसमें एक सप्ताह से लेकर 10 दिन का कमसे कम समय चाहिए।
  • इसके बाद अनुभवी व कॉन्फिडेंशियल लोगों का पैनल तैयार किया जाता है। ये लोग पेपर का ब्लू प्रिंट तैयार करते हैं, यानी पेपर कैसा होगा?
  • इस ब्लू प्रिंट को विषय के विशेषज्ञों को दिया जाता है। वे पेपर को चेक करते हैं। सवाल और ऑप्शन ठीक हैं या नहीं?
  • इसी ब्लू प्रिंट के आधार पर प्रश्नपत्र तैयार करना होता है। पेपर बनने के बाद उसका मॉडरेशन होता है।
  • इसमें और भी कॉन्फिडेंशियल लोग बैठते हैं। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स को इसमें शामिल किया जाता है। ये चेक करते हैं कि पेपर सिलेबस के अंदर ही तैयार किया है कि नहीं?
  • पेपर 3-4 सेट में बनाया जाता है। ये पेपर परीक्षा नियामक की कस्टडी में होता है।
  • इस प्रक्रिया को पूरा करने में कमसे कम 15 से 20 दिन का समय देना होता है।
  • अगला स्टेप आता है प्रिंटिंग प्रेस का चयन। पेपर प्रिंटिंग में देना। प्रिंटिंग में देने में ही सबसे ज्यादा एहतियात बरतनी होती है।
  • सबसे पहले ब्लैक लिस्टेड प्रिंटिंग प्रेस का पता किया जाता है। इसके लिए सभी एग्जाम कंडक्ट कराने वाली संस्थाओं से लिस्ट मांगी जाती है।
  • कॉन्फिडेंशियल प्रिंटर्स होते हैं। प्रेस का निरीक्षण सचिव करते हैं। इस दौरान प्रिंटर्स की स्क्रीनिंग से लेकर सुरक्षा को परखा जाता है।
  • देखा जाता है कि प्रिंटिंग में काम करने वाले कर्मचारियों की किस प्रकार स्क्रीनिंग होती है? वे मोबाइल या अन्य डिवाइस लेकर तो अंदर नहीं जाते हैं।
  • परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव अपने विवेक से प्रिंटिंग के लिए किसी एजेंसी का चयन करता है। यह बेहद गोपनीय रहता है।
  • एक या दो अधिकारी के अलावा उस एजेंसी के बारे में किसी को पता नहीं होता है।
  • इसके बाद परीक्षा केंद्रों का चयन किया जाता है। परीक्षा केंद्रों की भी रिपोर्ट मांगी जाती है। यह देखना होता है कि जिस केंद्र का चयन हो रहा है वहां से कभी कोई पेपर तो लीक नहीं हुआ? नकल का कोई पूराना रिकार्ड तो नहीं है?
  • इन सारी प्रक्रिया को पूरी करने में कमसे कम एक से डेढ़ माह का मिनिमम समय चाहिए।
  • किसी भी प्वाइंट पर चूक या जल्दबाजी का सीधा का मतलब है फिर से पेपर आउट होना। यही कारण है कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी के नए सचिव ने सरकार को 15 जनवरी तक पेपर कराने का प्रस्ताव दिया है।
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