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प्रयागराज का यमुना पुल बना सुसाइड पाइंट:17 साल में 1547 लोग कर चुके हैं यहां आत्महत्या, हर महीने औसत 5 लोग करते हैं यहां खुदकुशी

प्रयागराज2 महीने पहले
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प्रयागराज का नया यमुना ब्रिज 1510 मीटर लंबा है। - Dainik Bhaskar
प्रयागराज का नया यमुना ब्रिज 1510 मीटर लंबा है।

उत्तरप्रदेश के सांस्कृतिक-धार्मिक शहर प्रयागराज के नये यमुना पुल से पिछले 17 सालों में 1547 लोग सुसाइड कर चुके हैं। केबल स्टे ब्रिज होने की वजह से यह आकर्षण का केंद्र तो है ही, यहां बढ़ती सुसाइड की संख्या की वजह से इसे अब शहर में सुसाइड पाइंट भी कहा जाने लगा है। पुलिस के रिकार्ड पर नजर डालें तो पता चलता है कि यहां से हर महीने औसतन 5 से 7 लोग यमुना में छलांग लगाते हैं। कुछ को बचा लिया जाता है, लेकिन कईयों की लाश तक नहीं मिलती। सरकारी आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2004 से मई 2021 तक में इस पुल से तकरीबन 2 हजार से ज्यादा लोग छलांग लगा चुके हैं। इनमें 1547 की मौत हो गई। बाकी को बचा लिया गया। इनमें से 859 लोगों ने नैनी की तरफ से और बाकी लोगों ने कीडगंज की तरफ से यमुना में छलांग लगाई थी। हालांकि हकीकत के आंकड़े इससे कहीं ज्यादा है, क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि रात के अंधेरे में बाहर से आकर जो लाेग यहां सुसाइड कर लेते हैं, उसका किसी को पता ही नहीं चलता।

खोली गई जल पुलिस चौकी, पुल पर लगाये गए है गार्ड

इस अनहोनी को रोकने के लिए पुल के पास ही जल पुलिस चौकी खोली गई। ऊपर सुरक्षा गार्ड लगाए गए जिसका नतीजा यह रहा कि पिछले करीब 3 महीने में रीवा के एक ही परिवार के 5 लोगों समेत 15 लोगों की जान जल पुलिस और गोताखोरों के द्वारा बचाई जा चुकी है।

लोहे की जाली लगाने से इंकार कर चुकी है कंपनी

नैनी गुरु नानक नगर के रहने वाले समाजसेवी सरदार पतविन्दर सिंह बताते हैं कि शुरुआत में जब यहां आत्महत्या करने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई तो पुल के दोनों तरफ लोहे की जाली लगाने की मांग की गई। प्रशासन ने इस पुल का निर्माण करने और मेंटेनेंस का कार्य देखने वाली कंपनी से इस बारे में राय भी ली थी, लेकिन भार बढ़ने की वजह से पुल में दिक्कत आने की बात कह कर लोहे की जाल लगाने से मना कर दिया गया था। भाजपा नेता घनश्याम जायसवाल का कहना है कि यह पुल हमारी आधुनिकता का प्रतीक है लेकिन आत्महत्याएं होने की वजह से यह कलंकित हो रहा है।

सत्ता परिवर्तन की वजह और आपसी खींचतान के चलते नही हो पाया उद्घाटन

करीब 157 वर्ष पुराने यमुना पुल के जर्जर होने से वर्ष 2000 में तत्कालीन इलाहाबाद सांसद और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ मुरली मनोहर जोशी की पहल पर इस ब्रिज का निर्माण शुरु हुआ था। काम पूरा होने के बाद भाजपाई इसे अपनी उपलब्धि बताकर पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सेतु के नाम से इसका नामकरण कर उद्घाटन करना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस खुद इसका श्रेय लेना चाहती थी। इसी खींचतान में आज तक उद्घाटन नहीं हो पाया। हालांकि मोदी सरकार बनने के बाद इस पुल पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी सेतु का बोर्ड लग गया है, लेकिन विधिवत उद्घाटन आज तक नहीं हुआ।

नए यमुना पुल के बारे में कुछ खास बातें

  • भारत के सबसे लंबे और महज दो पिलरों पर केबल के सहारे टिका है यह पुल। जिसकी ऊंचाई तकरीबन 365 मीटर है।
  • ब्रिज की कुल लंबाई यमुना के मध्य 365 मीटर, शहरी क्षेत्र में 515 मीटर और यमुना पार क्षेत्र में 630 मीटर है यानी यह पूरा पुल 1510 मीटर(4954 फीट) लम्बा है।
  • केबल स्टे ब्रिज राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के बीच मार्ग लिंक के रूप में कार्य करता है।
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