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  • Uttar Pradesh, Prayagraj, Ganga’s Waters Rise, Dead Bodies Emerge, Hundreds Of Dead Bodies Buried On The Banks Of The Ganges In Prayagraj Were Washed Away In The Ganges, 30 To 35 Dead Bodies Were Coming Daily, In Unnao The Shroud Only One And A Half Kilometers Away On The Banks Of The Ganges

उफनाती गंगा में कफन की कतार:प्रयागराज में गंगा किनारे दफन हुए सैकड़ों शव गंगा में बह गए, रोज आ रही थीं 30 से 35 लाशें, उन्नाव में गंगा किनारे डेढ़ किलोमीटर दूर तक कफन ही कफन

प्रयागराज/ उन्नाव5 महीने पहले

प्रयागराज के फाफामऊ में जहां गंगा के किनारे सैकडों लाशें दफन हुई थीं, वहां अब गंगा का तेज बहाव है। रोजाना 30 से 35 लाशें उफनकर बाहर आ रही हैं। उधर, उन्नाव में भी गंगा किनारे एक किलोमीटर के दायरे में कफन ही कफन नजर आ रहे हैं। ये कफन उन लाशों के हैं, जो गंगा किनारे यहां दफनाए गए थे।

बहकर आए 32 शवों के अंतिम संस्कार के लिए रची चिता भी बह गई

प्रयागराज के फाफामऊ रेलवे और मुख्य पुल के बीच में करीब आधा किलोमीटर दायरा गंगा में डूब गया है। यहां कोरोना संक्रमण काल में बड़ी संख्या में शव दफनाए गए थे। अब ये क्षेत्र गंगा के पानी में समा गया है। शवों के ऊपर से अब पानी बहने लगा है। सोमवार को कई शव कटान के कारण गंगा में बह गए। यहां मिले 32 शवों को जलाने के लिए नगर निगम की ओर से लगाई गईं चिताएं भी बह गईं। तेज बहाव और कटान के कारण अब नगर निगम प्रशासन के पास भी करने को कुछ नहीं बचा है। अब सब गंगा मइया के हवाले हो गया है। मार्च से मई 2021 के बीच में कोविड-19 काल में बहुत अधिक मौतें हुई थीं। इन मौतों के कारण श्रृंगवेरपुर, फाफामऊ में गंगा किनारे पांच हजार से अधिक शवों को दफनाया गया था।

प्रयागराज में गंगा किनारे इस तरह से लाशें दफन थीं। दफन लाशों के आसपास इस तरह से कवर कर दिया गया था।
प्रयागराज में गंगा किनारे इस तरह से लाशें दफन थीं। दफन लाशों के आसपास इस तरह से कवर कर दिया गया था।

भास्कर ने उठाया था मुद्दा, प्रशासन ने हटवा दिए थे कफन

दैनिक भास्कर ने सबसे पहले इसे खबर को 'गंगा किनारे कहां से आ रहे शव, कौन दफना रहा:प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर में नदी किनारे 1 किमी के दायरे में इतनी लाशें कि गिनती करना भी मुश्किल' शीर्षक से प्रकाशित किया था। पहले तो प्रशासन ने इस प्रकरण को परंपरा का हवाला देते हुए खारिज करने की कोशिश की पर जब दैनिक भास्कर ने इस खबर को प्रकाशित किया तो बौखलाहट में शवों के ऊपर से रामनामी हटवा दी गई ताकि दूर से दिखाई न दे और मीडिया का ध्यान इस तरफ न जाए। बाद में चुनरी हटाने का वीडियो वायरल होने के बाद तत्कालीन डीएम भानुचंद्र गोस्वामी ने जांच बैठा दी, जिसकी रिपोर्ट आज तक लंबित है। मई-जून की वह तस्वीर आपने जरूर देखी होगी, जिसमें फाफामऊ गंगा पर बने रेलवे पुल के नीचे सैकड़ों शव दफन थे। आज यह क्षेत्र गंगा के पानी में डूब गया है।

उन्नाव में गंगा में पानी बढ़ा तो डूब गई लाशें, किनारे कफन की कतार

उन्नाव में गंगा घाट एक बार फिर चर्चा में है। उन्नाव में गंगा का जलस्तर कम होने से रेती में दबी लाशों के कफन सामने आने लगे हैं। गंगा के दो घाटों पर ऐसा नजारा दिख रहा है।

अभी हाल ही में उत्तराखंड से 5 लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया था। इसके बाद जब पानी कम हुआ तो उन्नाव में कफन की कतार सी दिखने लगी। हालांकि अभी किसी भी ग्रामीण को पानी में बहता कोई शव नहीं दिखा है। ग्रामीण नन्हा बताते हैं कि गंगा का पानी जब-जब कम होता है कफन ऐसे ही दिखते हैं। नन्हा ने बताया कि शवों के कफन खुल गए हैं। जब गंगा कटान करती है तो ऐसा ही नजारा सामने आता है। अब जब पानी बढेगा तो हो सकता है कि शव बाहर आ जाये।

एक घाट पर डेढ़ किमी के एरिया में दिखा ऐसा नजारा

नानामऊ घाट तकरीबन डेढ़ किमी का है। गंगा किनारे लोग अंतिम संस्कार भी करते हैं। कुछ लोग शवों को जलाते हैं तो कुछ लोग सिर्फ दफन कर देते हैं। ऐसे में गंगा में पानी कम होने की वजह से अब कफन सामने आने लगे हैं। कुछ ऐसा ही दृश्य रौतापुर घाट पर भी देखने को मिला था। यहां तकरीबन 200 से 250 मीटर के एरिया में लाशें दफन हैं। बताते हैं कि यदि पानी बढ़ा तो यह लाशें बाहर आ जायेंगी।

बालूघाट पर जेसीबी लगवाकर दबाए गए थे शव

वहीं बीते एक हफ्ते पहले ही गंगा के बालूघाट पर कई शव बाहर आ गए थे। जिसे प्रशासन ने जेसीबी से बालू डलवाकर ढक दिया गया था। इससे पहले जब गंगा उफान पर थी तब भी शवों के बहने की तस्वीरें सामने आई थी।

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