महंत के चेले आनंद-आद्या ने नहीं खाई जेल की रोटी:नैनी सेंट्रल जेल में दोनों अलग-अलग बैरक में, CCTV से निगरानी, रात के वक्त खाने में मिली रोटी-सब्जी और दाल...पर भूखे रहे

प्रयागराज/लखनऊ9 महीने पहले
महंत के चेले आनंद गिरि और आद्या तिवारी को बुधवार को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और प्रयागराज स्थित बाघंबरी गद्दी मठ के महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड केस से पर्दा अब CBI हटाएगी। प्रदेश की योगी सरकार की सिफारिश पर CBI महंत के मौत की जांच करने के लिए प्रयागराज पहुंच गई है। उधर, जेल भेजे गए महंत के शिष्य आनंद गिरि और लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी को सेंट्रल नैनी जेल में हाई सिक्योरिटी में रखा गया है। दोनों को अलग-अलग बैरकों में बंदियों से अलग रखा गया है। दोनों की CCTV से निगरानी की जा रही है। वहीं, गुरुवार को तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को कोर्ट ने 6 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजा है।

महंत आनंद गिरि और पुजारी आद्या तिवारी को बुधवार की शाम 4:43 बजे नैनी सेंट्रल जेल लाया गया था। दोनों अपने साथ काफी सामान लेकर जेल पहुंचे थे, जिसमें बिस्तर-खाने के सामान शामिल थे। लेकिन जेल अफसरों ने गेट पर ही जांच के बाद रोक दिया। रात खाने में रोटी, तुरई की सब्जी और अरहर की दाल दी गई। जेल अधिकारियों का कहना है कि आनंद गिरि और आद्या ने खाना नहीं खाया। वे पूरी रात बेचैन रहे। अपनी बैरकों में टहलते रहे।

इधर, कथित उत्तराधिकारी बलवीर गिरि से अभी भी SIT की पूछताछ जारी है। अखाड़ा परिषद ने बलवीर को उत्तराधिकारी मानने से भी इनकार कर दिया है। कहा, सर्वसम्मति से अखाड़ा परिषद नए उत्तराधिकारी का चयन करेगा।

अखाड़ा परिषद ने बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया।
अखाड़ा परिषद ने बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया।

इसलिए बलवीर से हुई पूछताछ
महंत नरेंद्र गिरि की समाधि प्रक्रिया के बाद उनके शव के पास मिले सुसाइड नोट में घोषित उत्तराधिकारी बलवीर से पूछताछ हुई। SIT मठ के अंदर ही पहुंची। दरअसल, महंत का सुसाइड नोट सामने आने के बाद खुद को गद्दी का अगला उत्तराधिकारी बता रहे बलवीर गिरि बुधवार को अपने बयान से पलट गए थे।

उन्होंने कहा था कि वह गुरुजी की हैंडराइटिंग को नहीं पहचानता है। ऐसे में सुसाइड नोट में उनकी ही राइटिंग है यह वह कंफर्म नहीं कर सकता है। जबकि एक दिन पहले यानी मंगलवार को उन्होंने सुसाइड नोट में गुरुजी नरेंद्र गिरी की ही राइटिंग होने की पुष्टि की थी।

सुरक्षा में लगे 11 पुलिसकर्मियों को हटाया गया
पुलिस ने महंत नरेंद्र गिरि की सुरक्षा में लगे 11 पुलिसकर्मियों को हटाते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। लापरवाही सामने आने पर निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है। जल्द ही सभी पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। महंत नरेंद्र गिरि को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली थी।

महंत को बुधवार को मठ के बगीचे में समाधि दी गई।
महंत को बुधवार को मठ के बगीचे में समाधि दी गई।

एक दिन पहले महंत को मठ में दी गई समाधि
बुधवार की दोपहर बाद बाघंबरी मठ में महंत नरेंद्र गिरि को भू-समाधि दी गई। अंतिम क्रिया नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में घोषित उत्तराधिकारी बलवीर ने संपन्न कराई। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर का स्वरूप रानी नेहरू हॉस्पिटल में 5 डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट CM को बंद लिफाफे में सीएम योगी को भेज दिया गया है। शुरुआती रिपोर्ट में फांसी लगाने की बात सामने आई है।

महंत नरेंद्र गिरि का शव 20 सितंबर की शाम 5:20 बजे मठ के एक कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला था। शिष्यों ने ही फंदा काटकर शव को नीचे उतारा था। पुलिस जब पहुंची तो शव बिस्तर पर था। इसके दूसरे दिन सुसाइड नोट सामने आया, जिसमें शिष्य आनंद गिरि, आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप को मौत के लिए जिम्मेदार बताया गया। यह भी लिखा था कि उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही थी। जिससे परेशान होकर उन्होंने सुसाइड किया है।

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