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गंगा दशहरा पर संक्रमण का साया:गंगा में कटान और जलस्तर बढ़ा, नदी किनारे रेत में दफन शवों से उठने लगी दुर्गंध; सता रहा पानी से संक्रमण का खतरा

प्रयागराज3 महीने पहले
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गंगा में जलस्तर बढ़ने के कारण मंडरा रहा है गंगा दशहरा पर दोहरा खतरा। - Dainik Bhaskar
गंगा में जलस्तर बढ़ने के कारण मंडरा रहा है गंगा दशहरा पर दोहरा खतरा।

दो दिन बाद 20 जून को गंगा दशहरा है। उत्तर प्रदेश में इस पर्व का खास महत्व है। मगर इस बार गंगा दशहरा पर कोविड-19 और गंगा किनारे दफन शवों के उतराने से होने वाले संक्रमण का दोहरा खतरा मंडरा रहा है। आस्था की डुबकी पर संक्रमण का साया साफ दिख रहा है। ऐसे में अभी तक किए गए सारे प्रशासनिक इंतजाम फीके साबित हो रहे हैं। आशंका है कि यदि गंगा में पानी और तेजी से बढ़ा तो गंगा की रेती में दफन कई शव उतराते दिखाई देंगे। अभी तक नगर निगम की ओर से कटान से खुले 25 शवों का दाह संस्कार किया जा चुका है।

गंगा दशहरा पर्व की हिंदू धर्म में बड़ी मान्यता है। इस पर्व पर गंगा किनारे मेला लगता रहा है और बड़ी संख्या में श्रृद्धालु स्नान-दान करते हैं। लेकिन कोरोना काल में फाफमऊ व श्रृंगवेरपुर घाट पर गंगा के तटों पर दफनाए गए सैकड़ों शवों के कारण अब प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। पानी बढ़ने के कारण गंगा में तेजी से कटान हो रही है। अब तक जानकारी में 25 शव उतरा चुके हैं। इनको निकलवाकर नगर निगम दाह संस्कार भी करवा चुका है।

मेयर ने किया शव का अंतिम संस्कार, शवों से आ रही दुर्गंध
17 जून को खुद प्रयागराज की मेयर ने एक शव का अंतिम संस्कार किया है। नमी के कारण अब इन शवों से दुर्गंध आनी शुरू हो गई है। खुल रहे शवों में सड़ांध शुरू हो गई है। उनका अंतिम संस्कार करना भी नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रही है। फिलहाल, लगभग हर रोज निकल रहे ऐसे शवों को गंगा से छानकर अंतिम संस्कार कराया जा रहा है, ताकि उन्हें बहने से रोका जा सके।

कोरोना संक्रमित के भी हो सकते हैं शव, पानी में बढ़ा संक्रमण का खतरा
अप्रैल-मई में जब कोरोना का पीक था, तो बहुत ज्यादा संख्या में लोगों की मौत हुई थी। कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। ऐसी आशंका है कि लकड़ी और दाह संस्कार का अधिक खर्च होने के कारण कोरोना संक्रमित कई शव भी श्रृंगवेरपुर, फाफामऊ, छतनाग घाटों पर रेत में दफना दिया गए थे। अब फाफामऊ घाट पर आए दिन शवों के उतराने का सिलसिला जारी है। ऐसे में पानी में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

गंगा-यमुना में तेजी से बढ़ रहा पानी
बांधों से पानी छोड़े जाने व बारिश होने से गंगा-यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से संगम की रेती जलमग्न हो गई। तीर्थपुरोहितों, फेरी वालों और पूजन सामग्री बेचने वालों ने अपना डेरा हटा लिया है। पहले कोरोना संक्रमण की वजह से पर्यटकों का न आना और अब जलस्तर बढ़ने से गंगा के किनारे काम करने वाले हजारों लोगों के सामने आर्थिक संकट मुंह बाए खड़ा है। यही हाल रहा तो इस बार समय से पहले ही लोगों को बाढ़ क सामना करना पड़ सकता है। तीर्थपुरोहित बताते हैं कि अरसा बाद जून में इस तरह जलस्तर बढ़ रहा है।

जलस्तर आंकड़ों में

  • फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 76.55 मीटर
  • छतनाग में जलस्तर बढ़कर 71.34 मीटर
  • नैनी में यमुना का जल स्तर 72.06 मीटर
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