सोरांव... छप्पर में रहने को मजबूर:गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले पात्र को नहीं मिला आवास

सोरांव14 दिन पहले

मऊआइमा विकास खण्ड में स्थित एक गांव ऐसा है, जहां आज भी लोग आदिवासियों की तरह रहने को है। मजबूर हम आपको बता दें कि सोरांव तहसील अंतर्गत मऊआइमा विकास खण्ड के पिलखुवां गांव में कई ऐसे लोगों का घर है जैसे आदि काल में आदिवासी रहते थे।

शीला पत्नी हैदर पटेल भी पिलखुवां गांव में सैकड़ों वर्ष पुरानी मिट्टी के बने कच्चे जर्जर मकान में रह कर अपना गुजारा कर रही है। देखने से ऐसा लगता है कि इसमें कोई जंगली जानवर भी नहीं रह सकता है। दीवार चारों तरफ से फटी हुई ऊपर का छज्जा पानी से भीगकर बिल्कुल सड़ा हुआ, कब दीवार और छज्जा गिर जाए कुछ पता नहीं। शीला ने बताया कि कई बार मेरे नाम से आवास भी सरकार द्वारा दिया गया लेकिन गांव के ही कुछ अराजकतत्वों द्वारा पात्रता सूची में नाम होते हुए भी आवास आने के बाद भी अपात्र घोषित करा दिया जाता है। शीला ने बताया कि हम लोग गरीबी रेखा के नीचे अपना जीवन यापन करते हैं। मेरे पास जमीन भी मात्र छः बिस्सा ही है जो साल भर गृहस्थी का अनाज भी नहीं होता है किसी तरह से मजदूरी करके अपने परिवार का जीवन यापन करा रहीं हैं।

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