डलमऊ...गंगा में घटे प्रदूषण का संदेश दे रही डाल्फिन:कोरोना महामारी के कारण गंगा में मानव गतिविधियां हुईं कम, दूषित जल में नहीं रहते हैं जलीय जीव

डलमऊ, रायबरेली3 दिन पहले
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गंगा में प्रदूषण का स्तर कम हो रहा है, जिसकी गवाही स्वयं जलीय जीव दे रहे हैं। डलमऊ के आसपास पंद्रह किमी परिक्षेत्र में डाल्फिन की संख्या में इजाफा हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों के अनुसार कोरोना महामारी के कारण गंगा में मानव गतिविधियां कम हुईं, जिसके कारण प्रदूषण का स्तर काफी कम हुआ है।

हालांकि बीच-बीच में गंगा के पानी में अचानक कुछ परिवर्तन हुआ, लेकिन वह प्रदूषण संपूर्ण पानी में नहीं रहता सिर्फ एक किनारे पर ही दिखता है। जबकि नदी के दूसरे किनारे पर धवल जल प्रवाहित होता है। गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन सामाजिक प्राणी हैं। डाल्फिन को सूंस भी कहा जाता है। इस जलीय जीव में आक्रामक प्रवृत्ति नहीं होती यह मानव पर हमला नहीं करती हैं।

डलमऊ में धीरे धीरे डाल्फिन का कुनबा बढ़ रहा है। सुबह व सायं यह आपको सहज ही अटखेलियां करती दिखेंगी। बीते एक वर्ष में गंगा में डाल्फिन की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई। गंगा तट पर स्थित सनातन धर्म पीठ बड़ा मठ के स्वामी दिव्यानंद गिरि ने बताया कि गंगा में डाल्फिन की संख्या बढ़ी है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय के निजी सहायक प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि गंगा में प्रदूषण का स्तर बहुत कम हुआ है, जिसके कारण डाल्फिन की संख्या बढ़ रही है। दूषित जल में डाल्फिन नहीं रह सकती। जहां पानी स्वच्छ होगा, वहीं डाल्फिन व अन्य जलीय जीव रहते हैं।

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