जनता के एम्स में राजनीति:गोरखपुर का एम्स 4 साल में बनकर तैयार, रायबरेली का एम्स 9 साल में भी अधूरा

रायबरेली2 महीने पहले

पीएम मोदी आज गोरखपुर में 1011 करोड़ रुपए की लागत वाले एम्स का उद्घाटन करेंगे, लेकिन 14 साल पहले रायबरेली में जिस एम्स का शिलान्यास सोनिया गांधी ने किया था, उसका आज तक उद्घाटन ही नहीं हो सका। एम्स की व्यवस्था ओपीडी से आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रायबरेली एम्स का अभी तक उद्घाटन क्यों नहीं हुआ?

रायबरेली एम्स पर हुई है खूब राजनीति

रायबरेली एम्स यूपी की राजनीति से अछूती नहीं रहा है। सोनिया गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र में 2007 एम्स की घोषणा की थी, लेकिन तमाम रुकावटों के चलते यह साकार नहीं हो पाया। अखिलेश सरकार आने तक एम्स को जमीन भी नहीं मिल पाई थी। अखिलेश सरकार ने एम्स को जमीन दी। 2013 में आनन फानन में सोनिया और प्रियंका गांधी ने एम्स की नींव रखी। वह आगे नहीं बढ़ सकी। 2018 में रेल कारखाने पहुंचे मोदी ने यहां ओपीडी की औपचारिक शुरुआत कर दी थी। जिसके आगे अभी तक यह एम्स नहीं बढ़ सका है।

जुलाई 2021 में संस्थान के निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने फीता काटकर एम्स का अनौपचारिक उद्घाटन किया।
जुलाई 2021 में संस्थान के निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने फीता काटकर एम्स का अनौपचारिक उद्घाटन किया।

400 रेजिडेंट डॉक्टर चाहिए, 52 के भरोसे है एम्स

रायबरेली के एम्स के उद्घाटन की कहानी भी बड़ी अजब है। अभी बीते जुलाई 2021 में संस्थान के निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने फीता काटकर एम्स का अनौपचारिक उद्घाटन किया। यहां अधिकारियों के मुताबिक 200 रैजिडैंट डॉक्टर और 200 जूनियर रैजिडैंट डॉक्टर्स की जरूरत है लेकिन मात्र 26 रैजिडैंट और 26 जूनियर रैजिडैंट डॉक्टर ही इस समय काम कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले मरीज इससे प्रभावित होते हैं।

400 नर्सों के भरोसे है 35 डिपार्टमेंट

यहां अभी पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्तियां भी पूरी नहीं है। यहां 35 डिपार्टमेंट कुल 400 नर्सों के भरोसे हैं। जबकि अभी आधे से ज्यादा डिपार्टमेंट शुरू ही नहीं हुए हैं। अभी कुल 12 विभागों में ही इलाज की सुविधा है। हालांकि कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि अभी हमने नियुक्तियां निकाली हैं जल्द ही एम्स रायबरेली अच्छे से चलने लगेगा।

रायबरेली एम्स में अभी सिर्फ लगभग 800 मरीजों का रोजाना इलाज होता है।
रायबरेली एम्स में अभी सिर्फ लगभग 800 मरीजों का रोजाना इलाज होता है।

800 मरीजों का होता है रोजाना इलाज

रायबरेली एम्स में अभी सिर्फ लगभग 800 मरीजों का रोजाना इलाज होता है। जबकि यहां रायबरेली के अलावा अमेठी, सुलतानपुर, प्रतापगढ़, बाराबंकी, फतेहपुर, कानपुर और आसपास के जिलों के लोग आते रहते हैं। हालांकि, इनमें कभी किसी को बिना इलाज लौटना पड़ता है तो कभी इलाज में देरी होती है।

क्या कहता है विपक्ष?

रायबरेली एम्स के पूरी क्षमता से चालू ना होने के बीच गोरखपुर में लोकार्पण होने जा रहे दूसरे एम्स को लेकर लोगों में आशंकाएं पनप रही हैं। लोगों का कहना है कि रायबरेली एम्स को पूरी क्षमता से चालू किए जाने के बाद ही दूसरी परियोजना पर काम किया जाना था। कांग्रेस जिला अध्यक्ष पंकज तिवारी कहते हैं कि रायबरेली एम्स अधूरा होने से आसपास के करीब 20 जिले के लोगों को लखनऊ और दिल्ली मजबूर होकर इलाज के लिए जाना पड़ता है। केंद्र सरकार व राज्य सरकार को रायबरेली एम्स परियोजना को पूरा करने के बाद ही दूसरी योजना को मंजूरी देनी चाहिए थी।

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