नकुड़ में गला घोंटकर की गई थी लक्ष्य की हत्या:पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, परिजनों को दिलाई जाएगी आर्थिक मदद

नकुड़10 दिन पहले
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मृतक लक्ष्य के घर लगी लोगों की भीड़। - Dainik Bhaskar
मृतक लक्ष्य के घर लगी लोगों की भीड़।

नकुड़ के गांव खानपुर गुजर्र में 22 दिन बाद मिले साढ़े तीन वर्षीय लक्ष्य का अंतिम संस्कार बेहद गमगीन माहौल में हो गया। लक्ष्य की हत्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 5 दिन पहले की गई थी। पोस्टमाटर्म रिपोर्ट में हत्या का कारण 4-5 दिन पहले गला घोटकर आया है।

एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने 1 दिन पहले गन्ने के खेत में मिले बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया था। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में बच्चे की हत्या गला घोंटकर की गई है। कोतवाल जसवीर सिंह ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी आया है कि बच्चे की हत्या 5 दिन पहले हुई है। पुलिस गंभीरता के साथ हत्यारों की गिरफ्तारी करने के लिए प्रयास कर रही है।

परिजनों पर पुलिस ने बनाया अंतिम संस्कार का दबाव

गन्ने के खेत में मिलें 22 दिन पहले लापता हुए लक्ष्य का शव का पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई। पुलिस लगातार परिजनों पर जल्द से जल्द अंतिम संस्कार का दबाव बना रही थी। लेकिन परिजन व गांव के लोगों ने पुलिस को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि पहले हत्या का खुलासा होगा। आरोपी जेल जाएंगे उसके बाद ही लक्ष्य का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

आश्वासन के बाद बच्चे का अंतिम संस्कार

पुलिस परिजनों पर लक्ष्य के अंतिम संस्कार करने का दबाव बनाती रही। लेकिन परिजन व ग्रामीण हत्यारों का खुलासा किए बिना संस्कार को तैयार नहीं थे। सुबह लगभग साढ़े सात-आठ बजे के तहसीलदार राधेश्याम शर्मा, कोतवाल जसबीर सिंह पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। परिजनों को मनाने में जुट गये। काफी देर बाद बसपा विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र ओलरी, राजकुमार गंधर्व व अरविन्द व ग्राम प्रधान याकूब व कारी साजिद ने भी समझाया। तो परिजन अंतिम संस्कार को तैयार हो गये।

शासन से सहायता दिलाने का आश्वासन

बेहद गमगीन माहौल में लक्ष्य का अंतिम संस्कार हो सका। शव के साथ भी बड़ी संख्या में लोग रहे। लक्ष्य के पिता मजदूरी करके परिवार का गुजरा करता है। उसकी किसी से कोई दुश्मनी होने का सवाल तक नहीं पैदा हुआ। छह साल पहले बड़े बेटे की जहरीला पदार्थ खाने से मौत हो गई थी।

तहसीलदार ने कहा परिवार को आर्थिक मदद दी जाएगी। तहसीलदार राधेश्याम शर्मा ने ग्रामीणों को बताया कि प्रशासन के पास तो इस तरह का कोई फंड नहीं है। लेकिन परिवार की माली हालत को देखकर वे शासन से सहायता दिलाने का प्रयास करेंगे।

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