सहारनपुर में जल रही आस्था की अलख:पथरीले रास्तों से होते हुए मां शाकंभरी देवी के दर्शन करने पहुंच रहे श्रद्धालु, स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुईं थीं माता

सहारनपुर10 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन हम आपको सहारनपुर की शक्ति पीठ मां शाकंभरी देवी के दर्शन करा रहे हैं। कोरोना काल के करीब 18 माह बाद नौ दिवसीय मेला लगाया गया। मेले में श्रद्धालुओं की मां शाकंभरी देवी के प्रति अटूट आस्था दिखाई दी। हालांकि मेले और दरबार में कोई भी कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए दिखाई नहीं दिया। करीब डेढ़ साल से मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु दंडवत होकर मां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। जिसमें महिला भी शामिल है। करीब 8 किलोमीटर दूरी से मार्गों को सजाया गया। श्रद्धालु शाक-सब्जियां और प्रसार चढ़ाने के लिए मां के दरबार में पहुंचे।

माता का मंदिर।
माता का मंदिर।

सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा
मां शाकंभरी देवी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह करीब 3 बजे से ही पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालु मां के दरबार में पहुंच गए। गुरुवार की भोर मां शाकंभरी देवी के जयकारों से गूंज उठी। भूरा देव से लेकर मां के दरबार तक श्रद्धालुओं की कतार लगी हुई है।

मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार
मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार

कोरोना काल में मंदिर के कपाट बंद रहे
वैश्विक कोरोना महामारी में लगे लॉकडाउन के कारण मार्च 2020 में मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे, लेकिन पहला लॉकडाउन खत्म होने के बाद पुजारी को पूजा अर्चना करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन दूसरे लॉकडाउन में फिर से मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। कोरोना की दूसरी लहर मंद पड़ते ही मंदिर के कपाट खोल तो दिए गए थे, लेकिन श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति नहीं दी गई थी।

हालांकि धीरे-धीरे सीमित संख्या रखते हुए श्रद्धालुओं को कोरोना गाइडलाइन का पालन करने के साथ मां के दर्शन करने की अनुमति दी गई। हालांकि दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को अनुमति नहीं दी गई थी। अब शारदीय नवरात्र में प्राचीन सिद्ध पीठ मां शाकंभरी देवी लगने वाले मेले को लगाने की अनुमति मिलने के साथ ही पहले नवरात्र को श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना शुरू हो गई है।

माता के दर्शन को लाइन में लगे श्रद्धालु।
माता के दर्शन को लाइन में लगे श्रद्धालु।

आम दिनों में रहती है भीड़
प्राचीन सिद्ध पीठ मां शाकंभरी देवी के दरबार में आम दिनों में भीड़ रहती है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल आदि राज्यों से श्रद्धालुओं का आवागमन मां के दरबार में 12 महीने रहता है। हालांकि प्रतिदिन संख्या कम होती है लेकिन मां के दरबार में चहल-पहल रहती है। मंदिर परिसर में प्रसाद की दुकानें भी 12 महीने लगी रहती है। हां, बरसात के दिनों में बरसाती नदिया उफान पर होती है, तो श्रद्धालुओं को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

भूरा देव पर बैठी कन्याएं।
भूरा देव पर बैठी कन्याएं।

यह मां शाकंभरी देवी का इतिहास
अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष व श्री शाकंभरी संस्कृत विद्यालय के अध्यक्ष श्रीमहंत सहजानंद ब्रह्मचारी बताते हैं कि देवी पुराण, शिव पुराण और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, हिरण्याक्ष के वंश में महा दैत्य रुरु का एक पुत्र दुर्गम हुआ। दुर्गमासुर ने ब्रह्मा जी की तपस्या करके चारों वेदों को कब्जा लिया।

ब्राह्मणों ने अपना धर्म त्याग कर दिया। चौतरफा हाहाकार मच गया। ब्राह्मणों के धर्म विहीन होने से यज्ञादि अनुष्ठान बंद हो गए और देवताओं की शक्ति भी क्षीण होने लगी। जिसके कारण एक भयंकर अकाल पड़ा। किसी भी प्राणी को जल नहीं मिला जल के अभाव मे वनस्पति भी सूख गई। भूख और प्यास से समस्त जीव मरने लगे।

दुर्गमासुर की देवों से भयंकर लड़ाई हुई। जिसमें देवताओं की हार हुई और दुर्गमासुर के अत्याचारों से पीड़ित देवतागण शिवालिक पर्वतमालाओं में छिप गए। देवताओं ने मां जगदंबा की स्तुति की, जिसके बाद मां जगदंबा प्रकट हुई।

संसार की दुर्दशा देखकर मां जगदंबा का हृदय पसीज गया और उनकी आंखों से आंसुओं की धारा प्रवाहित होने लगी। मां के शरीर पर 100 नेत्र प्रकट हुए। शत नैना देवी की कृपा हुई ओर संसार में बारिश हुई, जिससे नदी और तालाब जल से भर गए।

श्रीमहंत सहजानंद ब्रह्मचारी बताते हैं कि देवताओं ने उस समय मां शताक्षी देवी नाम से आराधना की। माता ने पहाड़ पर दृष्टि डाली तो सर्वप्रथम सराल नामक कंदमूल की उत्पत्ति हुई । इसी दिव्य रूप में मां शाकंभरी देवी के नाम से पूजित हुई।

अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष व श्री शाकंभरी संस्कृत विद्यालय के अध्यक्ष श्रीमहंत सहजानंद ब्रह्मचारी।
अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष व श्री शाकंभरी संस्कृत विद्यालय के अध्यक्ष श्रीमहंत सहजानंद ब्रह्मचारी।

शिवालिक पहाड़ी में आसन लगाया
मां शाकंभरी देवी ने दुर्गमासुर को रिझाने के लिए सुंदर रुप धारण कर शिवालिक पहाड़ी पर आसन लगा लिया। जब असुरों ने पहाड़ी पर बैठी जगदंबा मां को देखा तो उनको पकड़ने का विचार आया। दुर्गमासुर भी मां को पकड़ने के लिए पहुंचा था लेकिन मां ने पृथ्वी और स्वर्ग के बाहर एक घेरा बना दिया और स्वयं उसके बाहर खड़ी हो गई। दुर्गमासुर के साथ देवी का घोर युद्ध हुआ अंत में दुर्गमासुर मारा गया। इसी स्थल पर मां जगदंबा ने दुर्गमासुर तथा अन्य दैत्यों का संहार किया।

शिवालिक पहाड़ियों की गोद में है मां का आसन
इतिहासकार राजीव उपाध्याय यायावर बताते हैं कि देवी भगवती पुराण में सहारनपुर का सांस्कृतिक इतिहास प्राप्त होता है। मां शाकंभरी देवी का मंदिर तथा इसके चतुर्दिक क्षेत्र जसमोर रियासत के राजा परिवार के अधिकार में है। सहारनपुर गजेटियर तथा सत्यकेतू विद्यालंकार द्वारा लिखित ऐतिहासिक उपन्यास आचार्य विष्णुगुप्त के आधार पर इस मंदिर की स्थिति 326 ईसा पूर्व के आसपास सिद्ध होती है। यह कहा जाता है कि सम्राट चंद्रगुप्त अपने प्रवास काल में यहां आकर रहा करते थे और प्रतिदिन मां शाकंभरी देवी के दर्शन करते थे।

इतिहासकार राजीव उपाध्याय।
इतिहासकार राजीव उपाध्याय।

चार प्रतिमाएं विराजमान
शाकंभरी देवी के मंदिर में चार प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं, शाकंभरी देवी उनके दायी ओर भीमा देवी एवं भ्रामरी देवी तथा बायी ओर शताक्षी देवी की प्रतिमा विराजमान है। ये सभी मां दुर्गा के ही रूप कहे गए हैं। दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय में उक्त चारों देवियो के स्वरूप का तात्विक वर्णन मिलता है।

उन्होंने बताया कि पुराणों में धारण है कि देवी ने एक सहस्र दिव्य वर्षों तक प्रत्येक मास के अंत में मात्र एक बार शाकाहार करते हुए घोर तप किया था। उनकी तपस्या की चर्चा सुनकर श्रद्धालु एवं ऋषि-मुनि उनके दर्शनार्थ यहां पहुंचे तो देवी के शाकाहार से ही उनका आतिथ्य सत्कार किया था।

कई नेताओं ने भी नवाया शीश
भाजपा के अमित शाह ने भी अपनी परिवर्तन यात्रा की शुरुआत यहीं से की थी और मां शाकंभरी देवी के आशीर्वाद से जनसभा को संबोधित किया था। पूर्व लोकसभा चुनावों के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी माता के दरबार में माथा टेका था और उनकी मां शाकंभरी में विशेष श्रद्धा को दर्शाया था।

सपा के अमर सिंह ने भी माता के दरबार मे दर्शन किए। इनके अलावा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति माता के दरबार मे शीश झुका चुके हैं।

खबरें और भी हैं...