देवबंद में मां त्रिपुर बाला सुंदरी देवी के दर्शन:महाभारत काल में यहां अर्जुन ने की थी साधना, 7 सेमी की प्रतिमा में मां का दिखता है स्वरूप

सहारनपुर2 महीने पहले

नवरात्र में दैनिक भास्कर आपको UP में स्थित मां के शक्तिपीठों और प्रमुख मंदिरों के दर्शन करा रहा है। आज हम आपको सहारनपुर जिले के देवबंद में स्थित मां के शक्तिपीठ मां त्रिपुर बाला सुंदरी के दर्शन करा रहे हैं। यह मंदिर अत्यंत पौराणिक है। मंदिर के मुख्यद्वार पर लगे शिलालेख की भाषा कोई आज तक नहीं पढ़ सका है। महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास की कुछ अवधि यहां व्यतीत की थी।

अर्जुन ने इसी मंदिर में शक्ति साधना की थी। यहां देश ही नहीं दुनियाभर से वर्ष भर श्रद्धालु आते हैं। यहां प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की चतुर्दशी तिथि पर एक विशाल मेला लगता है। ऐसी मान्यता है कि मां के दर्शनों से भक्तों की सभी मुराद पूरी होती हैं।

7 सेंटीमीटर की प्रतिमा में प्राकृत रूप में विराजमान हैं मां

देवबंद के छोर पर स्थित यह मंदिर करीब 34 बीघा भूमि में स्थित है। यहां कभी घना वन था। जिसे देवी वन के नाम से जाना जाता था। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया कि त्रिपुर बाला सुंदरी में ब्रह्मा, विष्णु और रूद्र, ये तीन पुर (शरीर) समाहित हैं।

मां त्रिपुर बाला सुंदरी ने महादानव भंडासुर का वध किया था। शक्तिपीठ में मां त्रिपुर बाला सुंदरी देवी का स्वरूप लगभग 7 सेंटीमीटर ऊंची प्रतिमा में प्राकृत रूप में विराजमान है।

सहारनपुर के देवबंद में शक्तिपीठ मां त्रिपुर बाला सुंदरी का प्राचीन मंदिर।
सहारनपुर के देवबंद में शक्तिपीठ मां त्रिपुर बाला सुंदरी का प्राचीन मंदिर।

पुजारी आंख बंद करके खोलते हैं गर्भगृह के कपाट

परंपरा के मुताबिक शक्तिपीठ के पुजारी आंखें बंद करके गर्भगृह के कपाट खोलते हैं। इसके बाद आंखें बंद करके ही माता की प्रतिमा को स्नान कराते हैं। फिर वस्त्र पहनाकर प्रतिमा को ढक दिया जाता है। कहा जाता है कि एक बार एक पुजारी ने मां की प्रतिमा का स्नान कराते समय आंखें खोल लीं तो उसकी नेत्र ज्योति चली गई थी।

मां की लंबी आराधना और क्षमा याचना के बाद उसे फिर से दिखना शुरू हुआ। ऐसी मान्यता है कि मां यहा तेज हवा और आंधी के बीच गर्भगृह में प्रवेश करती हैं। शक्तिपीठ पर पूजा के मुख्य दिन से पूर्व आंधी और बारिश होती है। बिजली कड़कती हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि मां के गर्भगृह में प्रवेश करने के समय ऐसा सदियों से होता आ रहा है।

मां त्रिपुर बाला सुंदरी देवी।
मां त्रिपुर बाला सुंदरी देवी।

ये है रहस्य
शक्ति पीठ, ऐतिहासिक हाेने के साथ-साथ पौराणिक है इसका प्रमाण शक्तिपीठ में प्रवेश करते ही मिल जाता है। दरअसल शक्तिपीठ के प्रवेश द्वार पर शिलालेख है। यहां अज्ञात भाषा में कुछ लिखा गया है। यह कौन सी भाषा है और प्रवेश द्वार पर क्या लिखा गया है इसका पता आज तक पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ भी नहीं लगा सके हैं।

मार्कडेय पुराण में है जिक्र
देवबंद स्थित मां त्रिपुर बाला सुंदरी शक्तिपीठ बेहद पौराणिक है। इस शक्तिपीठ का उल्लेख मार्कडेंय पुराण में भी है। मार्कडेय पुराण में शक्तिपीठ के रहस्य और मान्यता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। शक्तिपीठ का अंतिम जीर्णोद्धार राजा रामचंद्र महाराज द्वारा कराए जाने की बात प्रचलित है।

दर्शन से भोग और मोक्ष दोनों मिलते हैं
आदि-अनादि काल से देवबंद में स्थित श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी शक्तिपीठ देश-विदेश में रहने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। कहा जाता है क‍ि मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी की उपासना करने वालों को भोग तथा मोक्ष दोनों प्राप्त होते हैं।

शक्तिपीठ मां त्रिपुर बाला सुंदरी देवी।
शक्तिपीठ मां त्रिपुर बाला सुंदरी देवी।

महाभारत काल में हुई स्‍थापना
सिद्धपीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर की स्थापना कब और किसने की, इसके पुख्ता प्रमाण तो किसी के पास नहीं हैं, परंतु मारकंडे पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों से पता चलता है कि इस शक्तिपीठ की स्थापना महाभारत काल में हुई थी। यहां मंदिर परिसर में एक विशाल सरोवर भी है।

मां में समाहित हैं ब्रहमा, विष्णु और महेश के पुर

ग्रंथों के अनुसार मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी मां महाशक्ति जगदम्बा का रूप हैं। ब्रहमा, विष्णु और महेश तीन पुर (शरीर) जिनमें हैं, वह त्रिपुर बाला हैं। तंत्र सार के मुताबिक, मां राजेश्वरी त्रिपुर बाला सुंदरी प्रातरू कालीन सूर्य मंडल की आभा वाली हैं। उनके चार भुजा एवं तीन नेत्र हैं। वह अपने हाथ में पाश, धनुष-बाण और अंकुश लिए हुए हैं जबक‍ि मस्तक पर बालचंद्र सुशोभित है।

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