देवबंद में ATS कमांडो सेंटर:दारूल उलूम ने दुनिया में नाम कमाया, आतंकियों ने देवबंद पर बदनुमा धब्बा लगाया; अब आतंकी जड़ें होंगी कमजोर

देवबंद (सहारनपुर)9 महीने पहलेलेखक: सचिन गुप्ता
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देवबंद में यूपी एटीएस का एक कम� - Dainik Bhaskar
देवबंद में यूपी एटीएस का एक कम�

दारूल उलूम देवबंद इस्लामी शिक्षा के लिए दुनियाभर में मशहूर है। पर अफसोस, कई आतंकी घटनाओं ने इस देवबंद पर बदनुमा धब्बा लगा दिया। आतंकी हाफिज सईद और बगदादी का नाम देवबंद से जुड़ा। पुलवामा हमले के दो साजिशकर्ता भी यहीं से पकड़े गए। देशभर में कई जगह जो आतंकी पकड़े गए, उनमें कई ने देवबंद में पनाह ली। इन्हीं आतंकी जड़ों को कमजोर करने के लिए योगी सरकार यूपी के देवबंद में एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड (ATS) कमांडो सेंटर खोलने जा रही है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को इसकी आधारशिला भी रख दी।

दारूल उलूम की दुनिया में दीनी तालीम के लिए अलग पहचान है।
दारूल उलूम की दुनिया में दीनी तालीम के लिए अलग पहचान है।

दारूल उलूम समेत हैं करीब 500 मदरसे
दिल्ली से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर कस्बा देवबंद है। यह जिला सहारनपुर के अंतर्गत आता है। यहां दारूल उलूम की स्थापना 30 मई 1866 को हुई। इसका मकसद मुसलमानों को इस्लामी शिक्षा देना है। इस्लामी शिक्षा के लिए आज यह दुनियाभर में जाना जाता है। यह सिर्फ एक इस्लामी विश्वविद्यालय नहीं, एक विचारधारा है, इसलिए इस विचारधारा से प्रभावित मुसलमानों को 'देवबंदी' भी कहा जाता है। देवबंद में आज छोटे-बड़े करीब 500 मदरसे और लाइब्रेरी हैं। यहां दुनियाभर के छात्र पढ़ने के लिए आते हैं। इसलिए खुफिया एजेंसियां यहां हमेशा सक्रिय रहती हैं।

सीएम ने मंगलवार को देवबंद में एटीएस सेंटर की आधारशिला रखी।
सीएम ने मंगलवार को देवबंद में एटीएस सेंटर की आधारशिला रखी।

देवबंद से कैसे है आतंकी कनेक्शन?
22 फरवरी 2019 को देवबंद से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली और आकिब अहमद मलिक पकड़े गए। दोनों को पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए हमले की पहले से खबर थी। एनआईए या एटीएस के हाथों पूर्व में पकड़े गए आतंकी मोहम्मद सुहेल, अब्दुल्ला अल मामून, रजाउल रहमान, इमरान, रजीमुद्दीन, मोहम्मद फिरदौस भी देवबंद में पनाह ले चुके हैं। ज्यादातर आतंकी दीनी तालीम के बहाने देवबंद में रहे और दहशतगर्द तैयार करते रहे। 14 मई 2019 को कई रेलवे स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले शामली के दो भाई भी देवबंद में काफी दिनों तक रुके थे। नवंबर-2020 में दिल्ली में जैश के दो आतंकी पकड़े गए। इनके मोबाइल में एक व्हाटसएप ग्रुप मिला, जिसमें देवबंद का शख्स जुड़ा हुआ था।

22 फरवरी 2019 को देवबंद से दो आतंकी पकड़े गए थे, जिन्हें पुलवामा सीआरपीएफ हमले की पहले से खबर थी।
22 फरवरी 2019 को देवबंद से दो आतंकी पकड़े गए थे, जिन्हें पुलवामा सीआरपीएफ हमले की पहले से खबर थी।

देवबंद में ATS सेंटर का सामरिक महत्व
मुजफ्फरनगर-सहारनपुर हाईवे पर बसा कस्बा देवबंद यूपी और उत्तराखंड के बॉर्डर से सटा हुआ है। देवबंद से 30 किलोमीटर दूर सहारनपुर है, जहां से करीब एक दर्जन से ज्यादा आतंकी पूर्व में पकड़े गए हैं। देवबंद से सटे मुजफ्फरनगर और शामली जिले से भी पूर्व में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स से जुड़े आतंकी, आईएसआई एजेंट पकड़े गए हैं। इस तरह इस सेंटर की यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर पर मजबूत कमांड होगी।

मंच के बैनर पर लिखे स्लोगन से क्षेत्र को अलग संदेश दिया गया।
मंच के बैनर पर लिखे स्लोगन से क्षेत्र को अलग संदेश दिया गया।

पूरा वेस्ट यूपी कवर करेगी ATS
देवबंद में एटीएस कमांडो सेंटर के लिए दो हजार वर्गमीटर जमीन आरक्षित की गई है। नोएडा में इसी तरह का सेंटर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक बनेगा। नोएडा, मेरठ और सहारनपुर में पहले से एटीएस की एक-एक यूनिट मौजूद है। इस तरह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एटीएस की पकड़ मजबूत होगी। देवबंद और नोएडा के सेंटर में करीब 20-20 तेज तर्रार कमांडो और अफसरों की तैनाती की जाएगी।

योगी का नारा- काम भी, लगाम भी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को देवबंद में थे। इस दौरान उन्होंने एटीएस कमांडो सेंटर की आधारशिला रखी। मंच के पीछे जो बड़ा होर्डिंग्स लगा हुआ था, उस पर लिखा था- 'काम भी, लगाम भी'। इस स्लोगन के कई मायने हैं। योगी ने इस नारे से देवबंद में बताने का प्रयास किया कि हमारी सरकार काम भी करती है और देश विरोधी गतिविधियों पर लगाम भी कसती है। उनका निशाना सीधे तौर पर वे लोग थे, जो गलत कार्याें में लिप्त रहते हैं।

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