"मदरसों को सरकार की जरूरत नहीं":दारुल उलूम के सम्मेलन में मदनी बोले- सरकारी जमीन पर मदरसा-मस्जिद बने तो खुद तोड़ें

सहारनपुर16 दिन पहले

यूपी में चल रहे गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराए जाने का योगी सरकार ने फैसला लिया है। इसको लेकर सहारनपुर के दारुल उलूम देवबंद की मस्जिद रशीदिया में मदरसों के सर्वे को लेकर एक सम्मेलन किया गया।

इस दौरान जमीयत-उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा, "सर्वे सरकार का अधिकार है। मगर, मदरसों को सरकार की जरूरत नहीं है। मदरसों में कोई अवैध गतिविधि नहीं होती है। हम सर्वे का विरोध नहीं कर रहे हैं। हम पूरी जानकारी देंगे। सरकारी जमीन पर मदरसा-मस्जिद बने, तो खुद तोड़ें।"

उन्होंने कहा, "जो लड़के बाहर से हाईस्कूल का सर्टिफिकेट लेकर आएंगे। उनको भी दारुल उलूम में एडमिशन दिया जाएगा। उन्हें भी दीनी तालीम देंगे। बाहर की शिक्षा भी जरूरी है।" इसका सभी मदरसा संचालकों ने हाथ उठाकर समर्थन किया।

मौलाना मदनी ने कहा कि सरकार को मदरसों, मुसलमानों और मस्जिदों को टारगेट नहीं करना चाहिए।
मौलाना मदनी ने कहा कि सरकार को मदरसों, मुसलमानों और मस्जिदों को टारगेट नहीं करना चाहिए।

इससे पहले एडमिशन के लिए हाईस्कूल के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती थी। रविवार को मस्जिद रशीदिया में करीब 500 मदरसा संचालक और 5 हजार से ज्यादा लोग सम्मेलन का हिस्सा बने। महमूद हाल में मीडिया से बात करते हुए मौलाना अरशद मदनी ने कहा, ''योगी सरकार के मदरसों के सर्वे से कोई आपत्ति नहीं है। मदरसा संचालक सर्वे में सहयोग करें, क्योंकि मदरसों के अंदर कुछ भी ढका-छुपा नहीं है। सबके लिए मदरसों के दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं।''

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आज जारी हो सकती है नई गाइडलाइन
अब तक देवबंद के लगभग 250 मदरसों में सर्वे हो चुका है। इस बीच उलमा सर्वे को लेकर योगी सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं। माना जा रहा है कि मदरसा संचालकों के लिए दारुल उलूम की तरफ से नई गाइडलाइन जारी हो सकती है। ।

ये तस्वीर मस्जिद के बाहर की है। आयोजन को देखते हुए फोर्स तैनात की गई है।
ये तस्वीर मस्जिद के बाहर की है। आयोजन को देखते हुए फोर्स तैनात की गई है।

मदरसों की कमियों को कमेटी करेगी दूर
मौलाना हकीमुद्दीन कासमी का कहना है, "अब 12 सदस्य कमेटी मदरसों के संपर्क में रहेगी। मदरसों के अंदर अगर कुछ कमियां हैं, तो उनको दूर करने का काम किया जाएगा। अगर जरूरत हुई तो इस मसले पर यह कमेटी सरकार से सीधे बातचीत करेगी। ताकि, गलतफहमियों को दूर किया जाए। सभी मसलों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उसके बाद सरकार से भी बातचीत की जाएगी।"

उन्होंने कहा, "सरकार को मदरसों या मुसलमानों को टारगेट नहीं करना चाहिए। देश हित में जो भी जरूरी हो, उन कामों को संवैधानिक तरीके से करना चाहिए। जिस तरह सरकार मदरसों को निशाना बना रही है, उससे पूरे एक वर्ग को टारगेट किए जाने का संदेश जा रहा है। इसका हम विरोध करते हैं।"

12 सदस्य स्टेरिंग कमेटी सरकार से करेगी वार्ता
बैठक में एक 12 सदस्य स्टेरिंग कमेटी गठित की गई। इसमें दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, जमीयत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी, जमीयत-उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद मौलाना महमूद मदनी, जमीयत उलमा हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी, दारुल उलूम वक्फ देवबंद के मोहतमिम मौलाना मोहम्मद सुफियान कासमी, दारुल उलूम देवबंद के नायब मोहतमिम मुफ्ती राशिद आजमी, मौलाना अशफाक आजमी, नियाज फारूकी, कमाल फारुकी, मुज्तबा फारूक, मौलाना अशहद रशीदी और मौलाना अजहर मदनी को शामिल किया गया है।

खुफिया एजेंसियां इस सम्मेलन को लेकर अलर्ट
दारुल उलूम में मदरसों को सर्वे को लेकर भारी पुलिस-पीएसी तैनात की गई है। साथ ही खुफिया टीमों को भी अलर्ट कर दिया गया है। उधर, आला अफसर भी सीधे देवबंद पर नजर रख रहे हैं। हिंद राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया के नाजिम मौलाना मुफ्ती शौकत बस्तवी ने घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा कि मदरसे कभी भी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं पाए गए हैं। इसलिए मीडिया को मदरसों को लेकर सकारात्मक रवैया रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सर्वे से घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि मदरसे खुली किताब हैं। सभी के लिए इनके दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं। इसलिए अगर सरकार सर्वे करती है, उससे डरने की जरूरत नहीं है बल्कि उसमें संपूर्ण सहयोग करते हुए सही जानकारी दें।