यूपी में स्क्रब टाइफस ले रहा लोगों की जान:स्क्रब टाइफस के मरीजों में कोविड-19 जैसे लक्षण, किडनी, लीवर और प्लेटलेट्स के साथ बीपी को कर रहा डाउन

सहारनपुरएक महीने पहले
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जीवाणु रिक्टेशिय (संक्रमित मा� - Dainik Bhaskar
जीवाणु रिक्टेशिय (संक्रमित मा�

भारत के अलावा इंडोनेशिया, जापान, चीन और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के ग्रामीण इलाकों में स्क्रब टाइफस (ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी बैक्टीरिया) भले ही कहर बरपा रही हो, लेकिन अब भारत में भी इसकी एंट्री हो चुकी है। यूपी के मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी से हुई एंट्री अब सहारनपुर तक पहुंच चुकी है। सहारनपुर के सरकारी व निजी अस्पतालों में रहस्मयी बुखार पिछले कई माह से तांडव मचाए हुए है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग डेंगू और वायरल बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है, लेकिन निजी लैबों द्वारा दी जा रही रिपोर्ट और चिकित्सकों की रिसर्च में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है। इस बैक्टीरिया जनित रोग के लक्षण कोविड-19 से मिलते-जुलते हैं। सहारनपुर में स्क्रब टाइफस के मरीजों की संख्या 80 से ज्यादा है, लेकिन सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं है।

वरिष्ठ फिजिशियन डा.अंकुर उपाध्याय
वरिष्ठ फिजिशियन डा.अंकुर उपाध्याय

रहस्मयी बुखार का कहर
वेस्ट यूपी में इन दिनों अनजान बुखार ने विकराल रूप धारण कर लिया है, वहीं पूर्व में जीका ने। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इस रहस्मयी बुखार को डेंगू बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन मौसम बदलने के साथ यह जानलेवा वायरस भी अपना रूप बदल रहा है, जिससे चिकित्सा विज्ञान को भी हैरान कर रहा है। अनजान वायरस युवाओं और बच्चों की जिंदगी लील रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने बुखार के प्रकोप को ओर विकराल बना दिया है। हालात यह है कि शहर और गांवों में हर कोई इस बुखार की चपेट में हैं। इन अनजान बुखार से लगभग 50 से ज्यादा जान जा चुकी है, लेकिन सरकारी आंकड़ों में ये मौते भी दफन हो गई है।

डाक्टर दंपति के बेटे की रहस्मयी बुखार से मौत
सितंबर माह में कोरोना की संभावित लहर तो नहीं, लेकिन डेंगू ने अपने पांव पसारने शुरू किए। अक्टूबर तक डेंगू ने अपना विकराल रूप धारण किया और बुखार के हर तीसरे मरीज में डेंगू के लक्षण दिखाई दिए। हैरानी की बात यह है कि निजी लैब में डबल डेंगू और स्क्रब टाइफस (ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी बैक्टीरिया) जैसी रिपोर्ट सामने आने लगी। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में न तो डेंगू से मरने वालों की मौत दर्ज है और न ही स्क्रब टाइफस को लेकर सावधानियां दिखाई दे रही है।

अक्टूबर में होता था दिमागी बुखार
वरिष्ठ चिकित्सक डा.अंकुर उपाध्याय का कहना है कि करीब 5-6 साल पहले वेस्ट यूपी में सितंबर और अक्टूबर के बीच बच्चों में जानलेवा जापानी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) फैलता था, लेकिन तापमान में गिरावट के साथ ही बुखार का वायरस खत्म हो जाता था। लेकिन इस बार तापमान में गिरावट के बाद भी डेंगू का वायरस कमजोर नहीं पड़ा है, बल्कि यह उल्टा और ताकतवर होकर मरीज पर अटैक कर रहा है। उनका कहना है कि इन दिनों बुखार के मरीजों में टाइफाइड या मलेरिया के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं। ज्यादातर मरीजों में जांच के बाद डेंगू की पुष्टि हो रही है। इस बार डेंगू वायरल ने अपना ट्रेंड बदला है। इसमें मरीज के खून में प्लेटलेट्स की मात्रा कम होने के साथ-साथ बीपी भी बहुत कम हो जाता है। डेंगू के इस नए वैरिएंट में मरीज के लीवर और किडनी भी प्रभावित हो रहे हैं। यही कारण है कि इससे मरीज की जान जाने का खतरा ज़्यादा है।

यह है स्क्रब टायफस
वरिष्ठ चिकित्सक डा.अंकुर उपाध्याय ने बताया कि स्क्रब टाइफस एक बीमारी है जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी बैक्टीरिया के कारण होती है। लोगों में यह संक्रमित चिगर्स (लार्वा माइट्स) के काटने से फैलता है। इसे बुश टाइफस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक वेक्टर जनित बीमारी है। यह समय के साथ सेंट्रल नर्वस सिस्टम, कार्डियो वस्कुलर सिस्टम, गुर्दे, सांस से जुड़ी और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम को प्रभावित करता है। कई मामलों में मल्टी आर्गन फेल्योर से रोगी की मौत भी हो सकती है।

यह है लक्षण
इसके लक्षणों में बुखार और ठंड लगना शामिल है। इसके बाद सिर दर्द, शरीर में दर्द और मांसपेशियों में दर्द होता है जैसा कि कोविड के मामले में होता है। स्क्रब टाइफस रोगी कोविड-19 के कई मामलों के विपरीत गंध और स्वाद बना रहता है। कुछ रोगियों में जोड़ों में दर्द भी होता है, जो चिकनगुनिया का लक्षण हो सकते हैं। डा.अंकुर उपाध्याय ने बताया कि बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता लगना बहुत जरूरी है। अगर कोई स्क्रब टाइफस से संक्रमित हो जाता है, तो व्यक्ति को एंटीबायोटिक डॉक्सीसाइक्लिन से इलाज करना चाहिए। जिन लोगों का डॉक्सीसाइक्लिन के साथ जल्दी इलाज किया जाता है, वे आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं।

यह है रोग फैलने के कारण
हैल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि स्क्रब टायफस का बुखार खतरनाक जीवाणु रिक्टेशिय (संक्रमित माइट पिस्सू) के काटने से फैलता है। यह जीवाणु लंबी घास व झाड़ियों में रहने वाले चूहों के शरीर पर रहने वाले पिस्सुओं में पनपता है। इन पिस्सुओं के काटने से यह बीमारी होती है।