किसी के सिर, किसी की हड्‌डी का अंतिम संस्कार:पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद 5 लोगों के शव टुकड़ों में बटोरे, पहले भी हुआ था हादसा

सहारनपुर5 महीने पहलेलेखक: अमित गुप्ता

सहारनपुर में 7 मई की शाम पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट में दो गांवों के 5 युवकों की मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। अंतिम संस्कार के लिए परिवार वालों को शवों के कुछ टुकड़े ही मिले हैं। किसी के सिर का तो किसी की रीढ़ की हड्‌डी का ही अंतिम संस्कार परिवार वाले कर पाए।

महिलाओं की रह-रहकर उठा रही चीख हर किसी के दिल को दहला रही थी। फैक्ट्री में हुए धमाके से ज्यादा मृतकों के घरों का मंजर भयावह था। बहन, मृतक भाई की अर्थी को पकड़कर छोड़ने को तैयार नहीं थी, तो मां अपने बेटों को याद कर बार-बार अपनी सुध खो रही थी। पिता एक कोने में खड़े होकर रो रहा था।

परिवार और गांव वालों से बात की गई तो एक-एक कर दर्दभरी कहानी सामने आईं। कोई आर्थिक तंगी के कारण ओवरटाइम ड्यूटी करता था तो कोई नजदीक होने के कारण 300 रुपए में मजदूरी कर रहा था। धमाके में एक मजदूर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। पटाखा फैक्ट्री में बलवंतपुर गांव से दो और सलेमपुर से तीन युवकों की मौत हुई है। यहां 2 साल पहले भी धमाका हुआ था। उस समय 3 कर्मचारियों की मौत हो गई थी।

बलवंतपुर गांव के दो और सलेमपुर के तीन युवकों के शवों का अंतिम संस्कार हुआ।
बलवंतपुर गांव के दो और सलेमपुर के तीन युवकों के शवों का अंतिम संस्कार हुआ।

वर्धन के केवल सिर का हुआ अंतिम संस्कार
वर्धन ITI की पढ़ाई करने के बाद पटाखा फैक्ट्री में काम करने गया था। हालांकि पिता अर्जुन सिंह ने बताया कि घर की माली हालत ठीक नहीं है। ITI की फीस भरने के लिए पैसे चाहिए थे। वर्धन इसी महीने अपनी फीस का जुगाड़ करने के लिए पटाखा फैक्ट्री में मजदूरी करने गया था। बुआ मेमता और सुलेलता रोती बिलखती बोल रही थीं कि मैंने मना किया था कि पटाखा फैक्ट्री में काम पर ना जा। वहां मौत होती है। गरीबी में गुजारा कर लेंगे। घर भी बेचने की बात कर रही थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। वर्धन का एक बड़ा भाई भी है।

परिवार के दो भाइयों कार्तिक और सागर के शवों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया।
परिवार के दो भाइयों कार्तिक और सागर के शवों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया।

दो चचेरे भाइयों के शवों के टुकड़ों का अंतिम संस्कार
मृतक सागर और कार्तिक दोनों चचेरे भाई थे। सागर के शरीर का आधा हिस्सा ही मिला, जिसका परिजनों ने अंतिम संस्कार किया है। वहीं, कार्तिक के शव के कुछ टुकड़े ही मिल पाए। कार्तिक 11वीं कक्षा में पढ़ता था और सागर BA कर रहा था। दोनों अपने-अपने परिवार में इकलौते थे।

धमाके में जान गंवाने वालों के घर के बाहर गांव वालों की भीड़ जुटी रही। लोग परिवार वालों को ढांढस बंधाते दिखे।
धमाके में जान गंवाने वालों के घर के बाहर गांव वालों की भीड़ जुटी रही। लोग परिवार वालों को ढांढस बंधाते दिखे।

पूरा शव नहीं मिला तो बेटों के लौट आने की आस
सागर की मां बबिता और कार्तिक की मां सुशीला देवी बेटों की मौत की खबर सुनकर चीख पड़ी और अपनी सुध खो बैठीं। दोनों बेहोश होकर जमीन पर गिर गईं। बहनें बेसुध हैं और अपने भाई की मौत को झूठा मान रही हैं। देर रात तक जब दोनों भाई घर नहीं लौटे, तो सुबह मौत पर विश्वास हुआ। कार्तिक का शव न मिलने पर मां सुशीला सुबह तक अपने बेटे का इंतजार करती रहीं, लेकिन वह नहीं लौटा।

सागर के पिता राजेश और कार्तिक के पिता जोगेंद्र बोले कि हमारी तो दुनिया ही उजड़ गई। सागर ने तो काम भी छोड़ दिया था। सरकारी नौकरी के लिए वह तैयारी कर रहा था। शनिवार को उसके पास फोन आया था, जिसके बाद वह काम करने के लिए गया था। दो दिनों का काम कहकर घर से निकला था। सागर और कार्तिक पटाखा पैकिंग का काम करते थे।

वर्धन की बुआ ममता रोती हुई बोलीं कि मैंने पहले ही कहा था कि बेटे को काम पर मत भेजो।
वर्धन की बुआ ममता रोती हुई बोलीं कि मैंने पहले ही कहा था कि बेटे को काम पर मत भेजो।

पिता की मौत के बाद राहुल ने संभाली थी फैक्ट्री
फैक्ट्री के मालिक राहुल की भी धमाके में मौत हो गई है। उसके पिता किरण सिंह की मौत के बाद राहुल ने पटाखा फैक्ट्री का काम संभाला था। राहुल का एक भाई गौरी शंकर पुलिस में है, जो मेरठ में तैनात है। राहुल की पत्नी अमृता और उसके एक बेटा अभिजीत (5) और बेटी प्राव्या (3) है।

ग्रामीणों का कहना है कि अक्सर फैक्ट्री में राहुल के पास शाम को उसकी पत्नी अमृता और उसके दोनों बच्चे जाया करते थे, लेकिन शनिवार को वह नहीं गए, नहीं तो पूरा परिवार ही उजड़ जाता। फैक्ट्री मालिक राहुल के आधे शरीर का अंतिम संस्कार हुआ।

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विशाल हायर सेंटर रेफर, हालत गंभीर
विशाल शर्मा उर्फ वंश के पिता संदीप शर्मा प्राइवेट गार्ड की नौकरी करते हैं। धमाके में वंश 90% तक झुलस गया है। पुलिस ने शनिवार को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था, लेकिन चिकित्सकों ने गंभीर हालत देखते हुए देर रात PGI चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया। जहां अभी भी उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि उसकी उम्र काफी कम है। हालांकि पुलिस के अनुसार वह बालिग बताया जा रहा है। वह 10वीं का छात्र था। घर में आर्थिक तंगी के कारण वह पटाखा फैक्ट्री में काम करता था।

धमाके में मृतक राहुल, सुमित और कार्तिक। - फाइल फोटो
धमाके में मृतक राहुल, सुमित और कार्तिक। - फाइल फोटो

दो साल पहले धमाके के बाद फैक्ट्री खेत में शिफ्ट की थी
जिस फैक्ट्री में 7 मई की शाम को धमाका हुआ, उसका लाइसेंस किरण फायर वर्क्स के नाम पर है। इसी नाम से यह फैक्ट्री दो साल पहले तक घनी आबादी में थी। करीब दो साल पहले इसी फैक्ट्री में धमाका हुआ था। उस दौरान तीन मजदूरों की मौत हुई थी। घनी आबादी में फैक्ट्री होने के कारण धमाके के बाद फैक्ट्री को बलवंतपुर के खेतों में शिफ्ट किया था। ग्रामीणों का कहना है कि पहले तीन मौत होने पर मृतकों के परिजनों को फैक्ट्री मालिक राहुल ने तीन-तीन लाख रुपए दिए थे।

वर्धन सरसावा का केवल सिर मिला, जिसका परिवार वालों ने अंतिम संस्कार किया है।
वर्धन सरसावा का केवल सिर मिला, जिसका परिवार वालों ने अंतिम संस्कार किया है।
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