अस्थाई कर्मचारियों ने राजकीय मेडिकल कालेज के गेट तालाबंदी की:कर्मचारी बोले, कोरोना काल में जान जोखिम में डालकर की नौकरी, अब नौकरी से निकाल दिया, चौकी इंचार्ज पर लगाया अभद्रता का आरोप

सहारनपुरएक महीने पहले
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पुलिस के साथ नोकझोंक करती महिल - Dainik Bhaskar
पुलिस के साथ नोकझोंक करती महिल

सहारनपुर के राजकीय मेडिकल कालेज में नौकरी से हटाए जाने के बाद अस्थाई कर्मचारियों ने हंगामा कर दिया है। कर्मचारियों ने मेडिकल कालेज के मुख्य द्वारा पर तालाबंदी कर कालेज प्रशासन के खिलाफ मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी की। पुलिस की कर्मचारियों के साथ जमकर नोकझोंक हुई। अस्पताल में आने वाले मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। बाद में इमरजेंसी का गेट खोला गया। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उन्हें नौकरी पर दोबारा से नहीं रखा जाता वह धरना जारी रखेंगे।

कोरोना काल में हुई थी तैनाती

तालाबंदी करने से रोकती पुलिस
तालाबंदी करने से रोकती पुलिस

कोरोना संक्रमण जब अपने चर्म पर था, तो शासन के आदेश पर जिला प्रशासन ने अस्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। कर्मचारी मरीजों की देखभाल और अन्य कार्य करते थे। लेकिन करीब एक माह पहले उनको शॉर्ट नोटिस देकर नौकरी से निकाल दिया। जिसके बाद कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। कर्मचारी करीब 33 दिनों से धरने पर बैठे हैं। मौके पर एसडीएम सदर, सीओ नकुड़, थानाध्यक्ष सरसावा ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन कर्मचारी अपनी जिद पर अड़े रहे।

जान जोखिम में डालकर की नौकरी

धरने पर बैठे अस्थाई कर्मचारी
धरने पर बैठे अस्थाई कर्मचारी

धरने पर बैठे विपिन कुमार, कुलदीप नवनीत सचिन अंजू, गायत्री, रितु, निशा, राखी, मनमीत, विशाल दिनेश आदि का कहना है कि हमने जान को जोखिम में डालकर कर कोरोना काल मे कार्य किया। कर्मचारियों ने स्थाई करने की मांग पर अड़े हुए है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें नौकरी पर स्थाई करने आश्वासन दिया गया था, लेकिन कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया। उनका कहाना है कि हमारे साथ अन्याय किया जा रहा है, जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक हमें काम पर वापस नहीं लिया जाता धरना जारी रहेगा। इसके लिए चाहे भूख-हड़ताल क्यों न करनी पड़े। इस मौके पर उन्होंने मेडिकल चौकी प्रभारी पर अभद्रता का आरोप लगाया।

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