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सहारनपुर में बसेरों और भंडारों की धूम, मेले पर रोक:कोरोना संक्रमण के कारण 800 साल से चलने वाला जाहरवीर गोगा का मेला नहीं लगेगा, म्हाड़ी पर भी जाने की नहीं होगी अनुमति

सहारनपुरएक दिन पहले
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श्री गोगा म्हाडी का प्रतीकात्� - Dainik Bhaskar
श्री गोगा म्हाडी का प्रतीकात्�

राजस्थान के बागड़ के बाद सहारनपुर में बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज की शान में गंगोह रोड स्थित म्हाड़ी पर मेला दशकों से लगता आया है। लेकिन वैश्विक कोरोना महामारी के 2020 में गुद्याल का मेला नहीं लगा है। इस बार भी गुद्याल का मेला नहीं लगेगा है। हालांकि इस बार छड़ियों को म्हाड़ी पर ले जाने और श्रद्धालुओं पूजन करने की अनुमति जिला प्रशासन ने दे दी है। हालांकि म्हाड़ी पर श्रद्धालु प्रसाद नहीं चढ़ा सकेंगे।
वाहन से जाएंगी छड़ियां
गोगा म्हाड़ी पर इस वर्ष मेले की शुरूआत शुक्ल पक्ष की दशमी पर 16 सितंबर को होनी है। दो सप्ताह तक शहर में भ्रमण करने और बेसेरों के बाद जाहरवीर गोगा के प्रमुख चिन्ह नेजा की अगुवाई में 26 छड़ियां बैंडबाजों के साथ विभिन्न इलाकों से होती हुई विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर पहुंचेंगी और यहां से पूजन के उपरांत म्हाड़ी की ओर प्रस्थान कर जाएंगी।
श्रद्धालुओं की रहती है भीड़
बाबा जाहरवीर की म्हाड़ी पर छड़ियों के पहुंचने से पूर्व लाखों श्रद्धालु छड़ियों का इंतजार में रहते हैं। जैसी ही छड़ियां अपने स्थलों पर पहुंचती है तो सर्वप्रथम प्रसाद चढ़ाने और मन्नत मांगने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। दो दिन म्हाड़ी पर मेला चलने के बाद तीसरे दिन छड़ियां वापस अपने-अपने स्थानों पर प्रस्थान करती हैं। इन दिनों मेले से पूर्व बाबा श्री जाहरवीर की शान में जगह-जगह बसेरों और जागरण का आयोजन किया जा रहा है। रात के समय छड़ियों के भक्त श्रद्धालुओं को बाबा की वीरता के किस्से सुना रहे हैं। बसेरों में कढ़ी चावल का प्रसाद वितरित किया जाता है। बैंडबाजों संग श्रद्धालु छड़ियों को अपने घर लेकर जा रहे हैं।
एक अंग्रेज अधिकारी ने मेला रूकवाने की थी कोशिश
800 सालों के इतिहास में कोरोना संक्रमण के कारण दो सालों से म्हाड़ी पर मेला नहीं होगा। छड़ी के भक्त पंकज उपाध्याय का कहना है कि अंग्रेजी शासनकाल में एक अधिकारी ने म्हाड़ी पर भरने वाले मेले को रूकवाने की कोशिश की थी। लेकिन तब उस अंग्रेज अधिकारी के घर में जगह-जगह सांप निकल आए थे। लेकिन मेला आयोजित लगाने की अनुमति दी और खुद भी म्हाड़ी पर जाकर प्रसाद चढ़ाया था तो सांप घर से चले गए थे।
बाबा जाहरवीर गोगा ने कबली भगत को दिया था नेजा
बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज राजस्थान से गंगा स्नान के लिए घुड़सवारी कर हरिद्वार जाते थे। यात्रा के दौरान गंगोह मार्ग पर विश्राम के लिए रूकते थे। जाहवीर गोगाजी जब 800 साल पूर्व सहारनपुर के कबली भगत से गंगोह मार्ग पर तालाब से मछलियां पकड़ रहे थे, जाहरवीर गोगा जी ने कबली भगत को मछली पकड़ने का काम छोड़कर म्हाड़ी बनाकर पूजा करने को कहा था। बाबा ने कबली भगत को चांदी का नेता दिया था। कबली भगत ने बाबा जाहरवीर का प्रचार प्रसार किया और अपनी जीविका चलाई।
भादो माह की शुक्ल पक्ष में भरता है मेला
बाबा जाहरवीर गोगा जी का मेला भादो माह में शुक्ल पक्ष की दशमी का मेला तभी से भरता है। बाबा ने कबली भगत को कहा था कि मेला आयोजित करोगे तो रोजी-रोटी पूरे वर्ष चलती रहेगी। तभी कबली भगत ने म्हाड़ी का निर्माण कराया।

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