'स्वामी' को सपा ज्वाइन करते ही मिला 'प्रसाद':MP-MLA कोर्ट से वारंट पर बोले, 'मैं भी हाईकोर्ट का एडवोकेट रहा हूं, वारंट आने दीजिए'

सहारनपुर4 महीने पहले
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अखिलेश यादव के साथ केशव प्रसाद - Dainik Bhaskar
अखिलेश यादव के साथ केशव प्रसाद

स्वामी प्रसाद मौर्य के 7 साल पुराने दबे हुए विवादित बयान को अब चिंगारी लगी है। चिंगारी को आग में बदलकर भाजपा फिर से एक बार यूपी की सत्ता में काबिज होना चाहती है। स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ MP-MLA कोर्ट से वारंट जारी हुआ है। जिसमें 24 जनवरी को कोर्ट में पेश होना है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में कहा है कि 'मैं भी हाईकोर्ट का एडवोकेट रहा हूं, वारंट आने दीजिए'। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मैं न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करता हूं और जो भी प्रक्रिया होगी, उसका भी सामना करूंगा।

2 दिन पहले ही छोड़ी भाजपा
11 जनवरी को स्वामी प्रसाद मौर्य ने कई विधायकों को लेकर भाजपा से इस्तीफा दिया। इस्तीफा देते ही स्वामी प्रसाद मौर्य को MP-MLA कोर्ट से 7 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी के वारंट जारी हुआ है। उन्होंने 2014 में बसपा सरकार बयान दिया था कि 'किसी को भी पूजा नहीं करनी चाहिए। इस पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में उन पर केस दर्ज कराया गया था।

7 साल पुराने मामले में उनके खिलाफ इस समय गिरफ्तारी वारंट जारी होने को लेकर सवाल भी उठाए जा सकते हैं। यहीं नहीं चुनाव से ऐन वक्त पर ऐसा होने को वह अपने पक्ष में भी भुना सकते हैं। 2014 में उन्होंने एक विवादित बयान दिया था, जिसमें कहा था कि किसी को भी पूजा नहीं करनी चाहिए।

तीन बार के विधायक है स्वामी
योगी कैबिनेट में श्रम मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्या ने भाजपा छोड़ दी। वह 3 बार पडरौना सीट से विधायक रहे। 2 बार बसपा, एक बार भाजपा की टिकट पर। 2022 में उन्हें पडरौना सीट से ही चुनाव लड़ना है। इस सीट पर 19% ब्राह्मण भाजपा से नाराज हैं। दूसरी तरफ यादव, मुस्लिम और अन्य सामान्य जातियों का 27% वोट भी सपा के पक्ष में जाता हुआ दिख रहा है।

कुल 46% वोटर्स के छिटकने का खतरा स्वामी नहीं उठाना चाहते थे। इसलिए स्वामी ने सपा का हाथ थाम लिया। फिर 18% एससी और 18% ओबीसी वोटर पहले से स्वामी प्रसाद के साथ है। साइकिल पर सवारी के बाद तकरीबन उनकी जीत तय है।

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