गए थे मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने, आंखों पर बन आई:सहारनपुर में डॉक्टर की लापरवाही और सस्ते लेंस से गई 27 मरीजों की आंखों की रोशनी

सहारनपुर7 महीने पहले

सहारनपुर के SBD जिला अस्पताल में ऑपरेशन के बाद 27 मरीजों की आंखों की रोशनी चले जाने के बाद हड़कंप मच गया है। ऑपरेशन के 4 दिन बाद ही मरीजों की आंखों में सूजन, जलन, पानी आना और मवाद (पस) बनना शुरू हो गया था। अस्पताल के डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने इन्फेक्शन न होने के लिए मरीजों को दवाई दी।

इसकी वजह सस्ते लेंस का इस्तेमाल और डॉक्टरों की लापरवाही बताया जा रहा है। ऑपरेशन के बाद महज 250 रुपए के लेंस आंखों में लगा दिए गए, जबकि महंगे लेंस भी आते हैं, जिनसे आंख सुरक्षित रहती है। सरकारी फंड में हेराफेरी के भी संकेत मिल रहे हैं।

जब इससे भी काम नहीं चला तो प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए उन्हें रेफर कर दिया। 8 मरीजों का इलाज PGI चंडीगढ़ में चल रहा है। वहीं, ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर इसका कारण इन्फेक्शन बता रहे हैं। CMO संजीव मांगलिक ने बताया कि मामले जानकारी हुई है। इसमें जांच कराते हैं, दोषी पर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जिला अस्पताल में हंगामा करते हुए डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

इंफेक्शन या गलत ऑपरेशन

दैनिक भास्कर की टीम ने जब ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक डॉ. लाल से बात की तो वह बोले इंफेक्शन के कारण आंखों पर प्रभाव पड़ सकता है। ठंड और लापरवाही के कारण भी ऐसा हो सकता है। यदि इतनी बड़ी संख्या में ऐसा हुआ है, तो कहीं न कहीं इन्फेक्शन कारण हो सकता है।

इस दौरान रिपोर्टर से बात करते हुए डॉक्टर ने कहा, 'मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। मेरी गलती नहीं है। यदि ऐसा कुछ हुआ है, तो मुझे बचा लो'। हालांकि, मरीजों के परिजन डॉक्टर पर गलत ऑपरेशन करने का आरोप लगा रहे हैं।

इलाज के बाद आ सकता है विजन

इस मामले में PGI चंडीगढ़ में HOD एडवांस आई सेंटर प्रो. एसएस पांडव ने कहा कि सहारनपुर से आंखों के ऑपरेशन के बाद कुछ लोगों की आंखों में इन्फेक्शन हो गया है। PGI में इलाज के लिए मंगलवार को चार मरीज आए हैं। दो दिन पहले भी तीन मरीज आए थे। सभी का फिलहाल इलाज चल रहा है।

बुधवार को इन सभी मरीजों का रिव्यू किया जाएगा। इसके बाद सर्जरी का फैसला लिया जाएगा। अभी इन सभी मरीजों का विजन न के बराबर है। इलाज के बाद इनका विजन आने की संभावना है।

केस नंबर-1
गांव झिंझोली की ब्रह्मवती का ऑपरेशन तीन दिसंबर को जिला अस्पताल में हुआ था। ब्रह्मवती के बेटे जीत सिंह का कहना है कि मेरी मां की बायीं आंख में मोतियाबिंद था। ऑपरेशन के बाद वह अपनी मां को घर ले गए। चार दिन बाद आंखों से पानी आने लगा, सूजन, दर्द और लाली छाने लगी।

तब जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां इन्फेक्शन लगाकर और दर्द निवारक दवाई देकर घर भेज दिया। फिर भी आराम नहीं मिला। दोबारा अस्पताल ले गए, वहां से निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। उसके बाद प्राइवेट डॉक्टर ने भी हाथ खड़े कर दिए। अब PGI चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया है।

केस नंबर-2

जिला अस्पताल में संतोष शर्मा की दाईं आंख के मोतियाबिंद का ऑपरेशन तीन दिसंबर को हुआ था। ऑपरेशन के बाद से ही आंखों में पानी, सूजन, जलन और मवाद बनना शुरू हो गया था। डॉक्टर को दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। 23 दिसंबर को PGI चंडीगढ़ में भर्ती कराया।

इलाज के बाद आंखों में होने लगी दिक्कत
इलाज के बाद आंखों में होने लगी दिक्कत

केस नंबर-3
सहारनपुर के सुभाष चंद ने अपनी पत्नी प्रमोद का ऑपरेशन तीन दिसंबर को ही जिला अस्पताल में कराया था। उनकी पत्नी के साथ भी वही परेशानी शुरू हो गई। इसके बाद दो दिन पहले PGI चंडीगढ़ में भर्ती कराया।

केस नंबर-4
सहारनपुर के अमित का कहना है कि उसने अपनी माता जगवती का ऑपरेशन जिला अस्पताल में कराया था। इसके बाद से आंखों में तकलीफ बढ़ती गई। अमित का कहना है कि 18 दिसंबर को अपनी माता को लेकर वह जिला अस्पताल गए। चिकित्सक के दवाई देने के बाद भी आराम नहीं हुआ। इसके बाद 19 दिसंबर को पीजीआई चंडीगढ़ में दिखाने के लिए आए थे। मगर, चिकित्सक ने 20 दिसंबर को यहीं पर भर्ती कर लिया।

केस नंबर-5

पीड़ित सुरेश भारती।
पीड़ित सुरेश भारती।

सहारनपुर के चंद्र नगर की रहने वाली सुरेश भारती का भी ऑपरेशन तीन दिसंबर को हुआ था। आंखों में इंफेक्शन हो गया, जिसके बाद परिजनों ने निजी अस्पताल में इलाज कराया। मगर, कोई लाभ नहीं हुआ। परिजनों का कहना है कि चिकित्सक का कहना है कि सुदेश भारती की आंखों में मवाद बनने की वजह से कार्निया खराब होने की जानकारी दी। सुदेश का कहना है कि उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। आंखों के सामने सफेद और लाल फूल बने दिख रहे हैं।

2 दिसंबर को कराया था मोतियाबिंद का ऑपरेशन
जिला अस्पताल में दो दिसंबर को एक आई सर्जन ने मोतियाबिंद के 27 ऑपरेशन कर लेंस लगाए थे। अलग-अलग मोहल्लों और ज्यादातर गांव के मरीज ऑपरेशन कराने के बाद अपने-अपने घर चले गए थे। कुछ दिन बाद ही 1 आंख से नहीं दिखाई देने की शिकायतें मिलनी शुरू हो गईं। परिजन मरीजों को लेकर जिला अस्पताल पहुंच रहे थे और चिकित्सक दवा देकर उन्हें वापस भेज देते थे।

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