आगरा और गाजियाबाद लैब की रिपोर्ट खोलेगी धमाके का राज:सहारनपुर में जांच टीम को तीन दिन बाद फायर सिलेंडर ज्यों का त्यों मिला, जांच अधिकारियों के मन में उठे सवाल

सहारनपुर5 महीने पहले
फोरेंसिक टीम ने पटाखा फैक्ट्री से बारूद के नमूने लिए थे।

सहारनपुर के सरसावा के गांव बलवंतपुर में 7 मई को पटाखा फैक्ट्री धमाके की जांच ATS, NDRF, दमकल विभाग और अन्य एजेंसी अपने-अपने तरीके से कर रही है। लेकिन फोरेंसिक टीम भी धमाके का कारण जानने के भरसक प्रयास कर रही है।

फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से जो नमूने उठाए थे, उन्हें आगरा और गाजियाबाद की लैब में जांच लिए भेजा गया है। दोनों लैब से आने वाली रिपोर्ट को क्रास चेक किया जाएगा। कंफ्यूजन न हो इसके लिए ही सैंपल दो लैब में भेजे गए है। रिपोर्ट आने के बाद ही पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके का सच सामने आ सकेगा।

लोकल टीम के समझ में नहीं आया मामला
फोरेंसिक टीम ने पटाखा फैक्ट्री से बारूद के नमूने लिए थे। लोकल फोरेंसिक टीम तीन दिनों से बारूद की जांच कर रही है, लेकिन कुछ बारूद किस प्रकार का था, इसकी स्थिति साफ नहीं हो सकी। अधिकारियों के आदेश के बाद अब नमूनों को आगरा और गाजियाबाद की लैब में भेजा गया है। जिससे पटाखा फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाले बारूद की स्थिति साफ हो सके।

फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट का इंतजार उच्चाधिकारी भी कर रहे थे। लेकिन स्थानीय फोरेंसिक टीम बारूद की स्थिति का पता नहीं कर सकी है। आगरा और गाजियाबाद भेजे गए सैंपलों की रिपोर्ट का भी अधिकारियों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

डीएम ने टीम की गठित
पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाका कैसे और क्यों हुआ, इसको जानने शासन से लेकर प्रशासन तक उत्सुक है। धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जिला प्रशासन भी पूरा प्रयास कर रहा है। डीएम अखिलेश सिंह ने जिला प्रशासन की एक टीम का गठन किया है। जिसमें एसडीएम नकुड़ अजय अंबुष्ट, सीओ नकुड़ अरविंद पुंडीर, सीएफओ तेज वीर सिंह को रखा गया है। घटनास्थल पर लाव लश्कर के साथ पहुंचे और दोबारा से बारीकी से जांच की।

आग बुझाने वाले सिलेंडर कैसे बच गए
जिला प्रशासन की टीम मंगलवार को घटनास्थल पर पहुंची। पांच गाड़ियों में टीम के 25 अधिकारी और कर्मचारी थे। घटनास्थल की बारीकी से जांच की। हैरानी तब हुई, जब जांच टीम को घटनास्थल के पास फायर सिलेंडर मिले, वह भी सेफ। सवाल है कि इतने बड़े धमाके में फैक्ट्री के परखचे उड़ गए। फैक्ट्री में खड़ी कार और बाइक भी पूरी तरह खत्म हो गई।

फैक्ट्री मालिक और चार मजदूरों की जान चली गई। लेकिन तीन दिन बाद फायर सिलेंडर ज्यों का त्यों मिला। आग बुझाने वाले सिलेंडर में एक खरोच तक नहीं आई। वहीं घटना वाले दिन मौके पर पहुंचे ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए है।

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