खतरे में जिंदगी:जिंदगी को दांव पर लगाकर नदी पार कर रहे लोग, बिना पुल कैसा बसेगा श्रद्धालुओं का शहर ?

जलालाबाद, शाहजहांपुर11 दिन पहले

शाहजहांपुर जनपद के जलालाबाद के निकट रामगंगा नदी कोलाघाट पर पैंटून पुल चालू न होने के कारण गंगा स्नान के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग की लापरवाही से पुल का कार्य पूरा न हो पाने से जनता में आक्रोश व्याप्त है।

शाहजहांपुर जनपद के रामगंगा नदी पर बने कोलाघाट पर बने पक्के पुल का एक पिलर 29 नवंबर 2021 को भरभरा कर गिर गया था। 18 दिसंबर 2021 को रौज़ा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भीड़ इकट्ठी करने के लिए आनन फानन पीडब्ल्यूडी विभाग ने 100 मीटर लंबा पुल बना दिया था। जल्दबाजी में बना पैट्रून पुल 10 दिन ही चल सका।

आस में लोग

कुछ ही दिन में बदायूं से उधार में मंगाए गए स्लीपर बदायूं के पीडब्ल्यूडी कर्मचारी उठा ले गए। 28 दिसंबर को पुल फिर बंद हो गया। तब से लोगों को पुल बनाये जाने की आस लगी है।

मजबूरी में लोग जिंदगी को दांव पर लगाकर नाव से नदी पार कर रहे हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग की लापरवाही के चलते 15 दिन बीत जाने के बावजूद भी पैट्रून पुल नहीं बन सका है।

क्षेत्र के लोग हो रहे प्रभावित

पुल न होने से कलान, मिर्जापुर, ढाई घाट, अमृतपुर उसावा, म्याऊं, बदायूं, शमशाबाद, जलालाबाद, अल्लाहगंज, शाहजहांपुर के लोगों को को मोटर बोट के सहारे आवागमन करना पड़ता है।

ढाई घाट पर कल्पवासियों का लगने लगा मेला

ढाई घाट के रामनगरिया में श्रद्धालुओं का शहर बसने जा रहा है। यहां आने जाने वालों को नावों से गुजरना पड़ पड़ रहा है। बता दें कि लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, नेपाल बॉर्डर तक के श्रद्धालु उपवास में एक माह तक डेरा डालकर गंगा में स्नान करते हैं।

आ चुके हैं 121 स्लीपर

मामले में पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजेश चौधरी ने दैनिक भास्कर को बताया कि, स्लीपर उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ से मंगाए गए हैं। 121 स्लीपर आ चुके हैं, जिन्हें बिछा दिया गया है। पुल का निर्माण जारी है, शुक्रवार तक काम पूरा करके इसे चालू कर दिया जाएगा।

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