शाहजहांपुर के शहीद बेटे की परिवार की आपबीती:मां-बाप को सदमा न लगे इसलिए बड़े भाई ने छिपाई शहादत की खबर, पत्नी को फेसबुक से हुई जानकारी...एक साल पहले ही हुई थी शादी

शाहजहांपुर2 महीने पहले
एक साल पहले ही हुई थी सारज की शादी।

पाकिस्तान सीमा से लगे जम्मू-कश्मीर के पूंछ सेक्टर के पास आतंकियों से लोहा लेते हुए शाहजहांपुर का एक बेटा शहीद हो गया। शहीद सारज शाहजहांपुर जिले के बंडा थाना क्षेत्र के गांव बरीबरा का रहने वाला था। पूंछ सेक्टर में पिछले कई दिनों से आतंकियों से मुठभेड़ चल रही है। सोमवार को साराज भी अपनी टीम के साथ सर्च ऑपरेशन में निकले थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे आतंकियों ने हमला कर दिया। इस हमले पांच जवान शहीद हुए। इनमें सारज भी शामिल है। शहादत की सूचना बड़े भाई को दी गई है।

माता-पिता को सदमा न लगे इसलिए कई घंटे तक बड़े भाई ने ये खबर छिपाए रखी। साथ ही मायके गई हुई जवान की पत्नी को भी शहादत की जानकारी नहीं दी गई। लेकिन इसी बीच सोशल प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पत्नी के किसी रिश्तेदार ने सारज के शहादत की बात पोस्ट कर दी। यह जानकारी मिलते ही पत्नी तत्काल ससुराल के लिए निकल पड़ी। वह ससुराल पहुंच गई है, माता पिता लगातार उसे संभालने का प्रयास कर रहे हैं। सारज की शादी डेढ़ साल पहले ही हुई थी।

सारज की शहादत की खबर सुनकर मां का हुआ बुरा हाल।
सारज की शहादत की खबर सुनकर मां का हुआ बुरा हाल।

2019 में हुई थी बड़े भाई से मुलाकात
सारज के बड़े भाई सुखबीर सिंह ने बताया कि भाई से मुलाकात 2019 में आखिरी बार हुई थी। जुलाई में जब वह घर पर छुट्टी मनाने आया था, तब वे घर पर नहीं थे। मैं भी सेना में हूं। नेटवर्क न होने की वजह से हम बात भी नहीं कर पाते थे। उनके जाने की बात से घर में सन्नाटा छा गया है। कोई यकीन ही नहीं कर पा रहा कि अब सारज नहीं रहे। हम लोग तो अपने मां-बाप के लिए कुछ करने की सोच रहे थे, लेकिन उसे पहले ही सराज हम सबको छोड़ गए। सराज के पिता ने बताया कि शहीद होने से दो दिन पहले उसने फोन पर बात की थी। पिता और परिवार के अन्य लोगों का हालचाल भी जाना था। सारज ने 2015 में सेना ज्वाइन की थी।

सेना की 11 सिख रेजीमेंट में हुए थे भर्ती
थाना बंडा क्षेत्र के अख्तियारपुर धौकल निवासी विचित्र सिंह के 26 साल के बेटे सारज सिंह सेना की 11 सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। 16 आरआर रेजीमेंट के तहत कश्मीर के स्वर्णकोट में उनकी तैनाती हुई थी। जहां 11अक्टूबर को हुए आतंकी हमले में सारज सिंह शहीद हो गए। उनके साथ चार अन्य जवान भी शहीद हुए हैं। सारज सिंह की शहादत की खबर सेना द्वारा सबसे उनके भाई सुखबीर सिंह को दी गई थी।

बड़े भाई ने रिश्तेदारों को घर आने से रोका
सारज के शहीद होने की सूचना उनके माता-पिता और पत्नी बर्दाश्त नहीं कर पाते। यही कारण था कि सोमवार को सुबह से शाम तक सुखबीर ने अपने माता-पिता को कुछ नहीं बताया। रोज की तरह घर में माता-पिता कामकाज करते रहे। शहादत की खबर जब रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को लगी, तो उनका घर पर आना शुरू हो गया। जैसे ही कोई घर पर आता, तो बड़ा भाई सुखबीर उनको घर के बाहर रोक लेता। उनको बताता कि माता-पिता को इसके बारे में न बताएं, क्योंकि वो सहन नहीं कर पाएंगे।

सारज की पत्नी शहादत की खबर सुनते ही बेहोश हो गई।
सारज की पत्नी शहादत की खबर सुनते ही बेहोश हो गई।

1 साल पहले ही राजविंदर से हुई थी शादी
सारज सिंह की शादी डेढ़ साल पहले पिहानी की रहने वाली रजविंदर कौर से हुई थी। पत्नी भी काफी समय से पति सारज सिंह को फोन पर संपर्क करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उनका संपर्क नहीं हो पाया। दरअसल, पिछले तीन चार दिनों से पूंछ एरिया में आतंकियों से मुठभेड़ चल रही थी। इसीलिए सारज का फोन शायद लग ही नहीं रहा था।

दोनों भाइयों को देखकर सेना में हुआ था भर्ती
गांव बरीबरा के विचित्र सिंह के तीन बेटे गुरप्रीत सिंह, सुखबीर सिंह, सारज सिंह सेना में हैं। सारज सिंह सबसे छोटा है, अपने दोनों भाइयों को सेना में देखकर ही सारज भी सेना में गया था। सुखबीर सिंह इन दिनों छुट्टी पर घर आए हुए हैं। सुखबीर सिंह ने बताया कि सेना की ओर से उनको सारज सिंह के शहीद होने की सूचना दी गई है। शहीद का शव घर कब आएगा, इसकी जानकारी अभी नहीं मिल सकी है।

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