स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी:साल 2011 में शिष्या ने दर्ज कराया था दुष्कर्म का मुकदमा, पेश न होने पर कोर्ट ने दिखाई सख्ती

शाहजहांपुर3 महीने पहले
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साल 2011 में मुमुक्ष आश्रम के अधिष्ठाता व पूर्व केंद्रिय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर उनकी शिष्या ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। - Dainik Bhaskar
साल 2011 में मुमुक्ष आश्रम के अधिष्ठाता व पूर्व केंद्रिय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर उनकी शिष्या ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था।

शाहजहांपुर में दुष्कर्म के मुकदमें कोर्ट में पेश न होने पर पूर्व केंद्रिय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। इससे पहले ढुलमुल रवैया अपनाने के कारण कोर्ट ने चौक कोतवाली इंस्पेक्टर की भी फटकार लगाई है। बता दें कि, वर्ष 2011 में शिष्या ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। वर्ष 2018 में सरकार ने मुकदमा वापस लेने के लिए अपील की थी, लेकिन पीड़िता की आपत्ति जताने पर अपील को खारिज कर दिया गया था। वहीं इस मामले पर कोशिश के बावजूद चिन्मयानंद का पक्ष नही मिल पाया है।

स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ गैर जमानती वारंट
साल 2011 में मुमुक्ष आश्रम के अधिष्ठाता व पूर्व केंद्रिय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर उनकी शिष्या ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे को लेकर चिन्मयांनद अदालत में पेश नहीं हुए। शुक्रवार को अदालत ने चिन्मयानंद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। इससे पहले चौक कोतवाली के इंस्पेक्टर के ढीले रवैय को देखकर अदालत ने फटकार भी लगाई है। शुक्रवार को अदालत में स्वामी चिन्मयानंद की तरफ से दो वकीलों ने बहस की थी। इसके बाद सख्ती दिखाते हुए अदालत ने गैर जामनती वारंट जारी कर दिया। वहीं इस मामले पर जब स्वामी चिन्मयानंद और उनके वकीलों का पक्ष जानने की कोशिश की तो, उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

पेश न होने के कारण कोर्ट ने दिखाई सख्ती
बता दें कि, वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से स्वामी चिन्मयानंद पर दर्ज दुष्कर्म के मुकदमें को वापस लेने के लिए अपील की थी, लेकिन पीड़िता ने अदालत में अर्जी लगाकर आपत्ति जताई थी। जिसके बाद अदालत ने सरकार की अपील को खारिज कर दिया था। तब भी अदालत ने स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।

चिन्मयानंद ने कार्रवाई से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली। वहां से उनको स्थगन आदेश मिल गया था। उसके बाद होईकोर्ट से पत्रावली शाहजहांपुर की अदालत में आने के बाद मुकदमें में कुछ तेजी आ गई थी। उसके बाद भी स्वामी चिन्मयानंद अदालत में पेश नहीं हुए और न ही वारंट जारी होने के बाद अपनी जमानत कराई थी।

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