कैराना का डर अब भी जिंदा है:पलायन करने वाले आधे परिवार ही लौटे, जो आए वे भी खौफ में; अब भी घरों पर ताले वैसे ही

कैराना13 दिन पहलेलेखक: भंवर जांगिड़

ठंड से कंपकंपाते पश्चिमी UP में कैराना से हिंदू परिवारों के पलायन की हवा फिर से गर्म हो चली है। यूं भी कह सकते हैं कि ये शोले कोहरे में ढके हुए थे, लेकिन चुनावी माहौल ने उन्हें फिर से भड़का दिया है। सच बात भी यही है कि कैराना में डर अभी भी जिंदा है। इस डर की वजह भी है। कैराना से पलायन की खबरें भले ही मुजफ्फरनगर दंगों के समय वायरल हुई हों, मगर इसका बड़ा कारण इस छोटे से कस्बे में फैली संगठित अपराध की विष बेल है।

आज इनमें से ज्यादातर अभी जेल में हैं और इन्हें संरक्षण देने के आरोपी विधायक भी जमानत के लिए भटक रहे हैं। फिर भी, अपराधियों का खौफ इतना ज्यादा है कि उस समय घरों पर ताले लगाकर गए परिवारों में कुछ ही लौटे हैं। जो लौटे हैं उन्हें भी ये डर सता रहा है कि निजाम बदलने के साथ कहीं खौफ का राज दोबारा न लौट आए।

कैराना का रुख करते ही चाहें या न चाहें लेकिन वो घटना सभी को याद आ ही जाती है।
कैराना का रुख करते ही चाहें या न चाहें लेकिन वो घटना सभी को याद आ ही जाती है।
दैनिक भास्कर ने उन लोगों से भी बात करने की कोशिश की जिन्होंने दो साल पहले ही घर वापसी की है, उनमें अभी भी खौफ है।
दैनिक भास्कर ने उन लोगों से भी बात करने की कोशिश की जिन्होंने दो साल पहले ही घर वापसी की है, उनमें अभी भी खौफ है।

2 साल बाद घर लौटे...मगर कैमरे पर पहचान बताने में डर
हम मूला पंसारी की उन दुकानों पर गए जिन्होंने दो साल पहले घर वापसी की है, कहने लगे कि हम वो लोग ही नहीं है, आप जिनके बारे में पूछ रहे हैं वो यहां नहीं रहते। कैसे मान सकते हैं? हमारे सामने मूला पंसारी के पड़पोते दुकान चला रहे थे। जब हमने कहा कि आप भले ही कैमरे पर कुछ ना बोलें, लेकिन अपनी पहचान तो न छुपाएं। कहने लगे, रहने दो जी, हम अपना जीवन चला रहे हैं यह क्या कम है? क्या बताएं कैसे सुबह 4 बजे अंधेरे में पूरा सामान समेट कर चुपचाप निकल गए थे। कमोबेश यही खामोशी हिंदू परिवारों के उन गलियों में भी हैं जहां अधिकांश मकानों पर ताले जड़े हैं और जिनमें लोग रहते हैं, वे बस खिड़की से ही झांक रहे हैं।

दैनिक भास्कर के रिपोर्टर से बात करते हुए पीड़ित परिवार ने आपबीती बयां की।
दैनिक भास्कर के रिपोर्टर से बात करते हुए पीड़ित परिवार ने आपबीती बयां की।

लौटे वे भी आधे-अधूरे, सांसद हुकम सिंह ने उठाया था मुद्दा
कैराना से पलायन करने वालों की वास्तविक संख्या की लिस्ट कभी बनी ही नहीं। सबसे पहले पलायन का मुद्दा उठाने वाले कैराना सांसद हुकम सिंह ने करीब 300 लोगों के पलायन की बात कही थी। पिता की मौत के बाद राजनीतिक विरासत संभाल रही उनकी बेटी मृगांका सिंह बताती हैं कि करीब 50 परिवार लौट आए हैं। उधर हिंदू मोहल्ले में रहने वाले वकील आलोक चौहान कहते हैं कि हमारे यहां से छह-सात परिवार गए थे, वे तो लौटे नहीं। पंसारी परिवार के जितेंद्र मित्तल मुद्दे की बात कहते हैं कि लौटे तो हैं लेकिन आधे-अधूरे।

उन्होंने बताया कि मेरा आधा परिवार पानीपत में है और अजय-विजय में से विजय लौटा है, उसने दुकान खोली है, लेकिन अभय का परिवार नहीं आया वह सूरत में बस गया। ऐसे ही सुरेंद्र गुप्ता उदयपुर में अपने बेटे के पास चले गए। अब मृगांका सिंह कहती है गुंडों के खात्मे के माहौल से ही लोग लौटे हैं और जो बचे हुए हैं, उन्हें भी लाने की वे कोशिश कर रही हैं। उनकी यहां जमीन-जायदाद लावारिस पड़ी है और जब कोई चीज लंबे समय तक लावारिस रहती है तो उसके मालिक काेई और बन जाते हैं।

गलियों में बने घरों में ताले लगे होने की वजह से आज भी सन्नाटे जैसा माहौल रहता है।
गलियों में बने घरों में ताले लगे होने की वजह से आज भी सन्नाटे जैसा माहौल रहता है।
आज भी खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीड़ित परिवारों के मकानों में अभी भी ताले लगे हुए हैं।
आज भी खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीड़ित परिवारों के मकानों में अभी भी ताले लगे हुए हैं।

प्रताड़ित बोले, अभी तो सुरक्षित महसूस करते हैं...आगे का पता नहीं
दुकान में विनोद सिंघल की तस्वीर पर फूल माला लगी है और उनका दस-बारह साल का बेटा अर्नब, चाचा वरूण के साथ काम में हाथ बंटा रहा है। दोनों की सुरक्षा में एक गनमैन चौबीस घंटे साथ रहता है। पंसारी परिवार के जितेंद्र मित्तल ने बताया कि मौजूदा सरकार के भरोसे पर ही उनका परिवार सूरत से लौटा है। हालांकि, दोनों सरकारों ने पीड़ित परिवारों के लिए कुछ नहीं किया। अखिलेश ने मृतक आश्रितों को दस-दस लाख रुपए देने का वादा किया था और तीन महीने पहले पलायन से लौटे परिवारों से मिलने आए मुख्यमंत्री योगी ने आश्रितों को नौकरी व पेंशन देने की बात कही थी। किसी का कोई वादा पूरा नहीं हुआ।

हत्या के आरोपी गिरफ्तार, संरक्षण देने के आरोपी विधायक पर भी गाज
कैराना की हत्याओं में यहां के मुकीम उर्फ काला और फुरकान गैंग का हाथ था। दोनों को गिरफ्तार भी कर लिया गया। जेल में मुकीम की हत्या हो गई। फुरकान को जमानत मिली। पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ के कैराना दौरे से ठीक पहले फिर जेल भेज दिया गया। इन अपराधियों को संरक्षण देने के आरोपी सपा के मौजूदा विधायक नाहिद हसन पर भी गाज गिरी। नाहिद हसन के खिलाफ हत्या के प्रयास, गैंगरेप पीड़िता के परिवार को धमकाने और जबरन वसूली के भी मामले दर्ज हैं। वर्ष 2019 में शामली की विशेष अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया था और पूरे एरिया में मुनादी करवाई थी। सितंबर 21 में उन्होंने कोर्ट में सरेंडर किया था, कुछ घंटों के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। पुलिस ने उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट भी लगा दिया।

नाहिद हसन पूर्व विधायक मुनव्वर हसन के बेटे हैं। गैंगस्टर एक्ट लगने के बाद से भूमिगत हैं।अब तक यह कयास लगाए जा रहे थे कि नाहिद की गैरमौजूदगी में उनकी बहन चुनाव में उतरेगी, लेकिन पिछले दो-तीन दिन से विधानसभा के लोगों तक यह संदेश पहुंचा है कि नाहिद खुद जमानत करवा कर चुनाव में उतरेंगे।