बच्चों की पढ़ाई के बीच तीसरी लहर का डर:शामली में पेरेंट्स नहीं भेज रहे बच्चों को स्कूल, 30 प्रतिशत के करीब बच्चे पहुंच रहे स्टूडेंट, टीचर्स कर रहे अवेयर

शामली3 महीने पहले
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स्कूल खोलने की व्यवस्था में कुछ तब्दीलियां होनी चाहिए जिससे सभी छात्र छात्राएं अपनी पढ़ाई को अच्छे से पूरी कर सकें।  - Dainik Bhaskar
स्कूल खोलने की व्यवस्था में कुछ तब्दीलियां होनी चाहिए जिससे सभी छात्र छात्राएं अपनी पढ़ाई को अच्छे से पूरी कर सकें। 

शामली में कोरोना की दूसरी लहर समाप्त होने के बाद अब पेरेंट्स को तीसरी लहर का डर सता रहा है। यही कारण है कि वह बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। स्कूलों का स्टाफ बच्चों को अवेयर करने में लगा हुआ है। स्कूल प्रशासन द्वारा कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था की गई है वहीं, स्कूल में मात्र 20 से 30% बच्चे ही स्कूल पहुंच रहे हैं।

कोरोना ही नहीं, समस्या और भी हैं। शामली के हिंदू कन्या इंटर कॉलेज में देहात से आने वाली लड़कियों को ट्रांसपोर्ट की दिक्कत सता रही है जबकि देहात से आने वाली लड़कियां अधिकतर सुबह ट्रेन से आती हैं। घर वापस जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल की प्रधानाध्यापक डॉ. दीपाली गर्ग ने बताया कि हम लोगों ने दो पालियों में स्कूल चला रहे हैं। लेकिन बच्चे फिर भी नहीं आ रहे हैं।

20 से 30 प्रतिशत ही आ रहे बच्चे
अभी तक छात्रों की संख्या 20 से 30% ही है। दीपाली गर्ग ने बताया कि हमारे स्कूल में देहात की छात्राएं ज्यादा हैं जिससे एक दूसरी पाली में आने और जाने में छात्राओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल खोलने की व्यवस्था में कुछ तब्दीलियां होनी चाहिए जिससे सभी छात्र छात्राएं अपनी पढ़ाई को अच्छे से पूरी कर सकें।

वहीं, स्कूल में आने वाली छात्राओं का कहना है कि ऑनलाइन ही अच्छे से पढ़ाई हो रही थी लॉकडाउन के नियमों के पालन के अनुसार स्कूल में पढ़ाई के दौरान कुछ दिक्कतें होंगी जिससे पढ़ाई में बाधा पड़ सकती है।

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