श्रावस्ती में नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को सजा:अदालत ने 10 वर्ष सश्रम कारावास और 25000 अर्थदंड की सुनाई सजा

श्रावस्ती2 महीने पहले
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श्रावस्ती में नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म के एक मामले की सुनवाई जिला सत्र न्यायाधीश उमेश कुमार द्वितीय की अदालत में हुई। अदालत ने इस मामले में एक अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई और 25000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

अभियोजन पक्ष से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक एससी- एसटी एक्ट प्रेम कुमार मिश्रा ने बताया कि इकौना थाना क्षेत्र के निवासी व्यक्ति ने थाना इकौना पर प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें उन्होंने बताया कि 11 जनवरी 2009 को रात में लगभग 9:00 बजे मंगरे कहार का लड़का संजय मेरी बेटी कलावती को बहला-फुसलाकर घर से भगा ले गया। लड़की को इधर-उधर ढूंढा गया किंतु लड़की नहीं मिली। रात में संजय मेरी बेटी को जबरदस्ती हाथ पकड़ कर भगा ले जा रहा था। तो बादशाह व पंकज ने नहर की पुलिया के पास देखा भी था।

पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट किया दाखिल
इकौना पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना की व न्यायालय पर चार्जशीट प्रस्तुत किया। मामले का विचारण अपर जिला सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट पर हुआ। अपर जिला सत्र न्यायाधीश उमेश कुमार द्वितीय ने अभियुक्त संजय पुत्र मंगरे को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

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