इटवा के कठौतिया रामनाथ में बंदरों का आतंक:क्षण भर में उठा ले जाते हैं सामान, भगाने पर कर देते हैं हमला

इटवा22 दिन पहले

सिद्धार्थनगर के इटवा तहसील क्षेत्र के कठौतिया रामनाथ गांव में इन दिनों बंदरों के बढ़ते आतंक छाया हुआ है। बंदरों का झुंड कब किसी पर झपट्टा तार कर घायल कर देते हैं तो कोई खाद्य सामग्री भी उठा ले जाते हैं। कपड़ा आदि सामानों को भी नुकसान पहुंचा देते हैं। बच्चे हों या बड़े, सभी में दहशत छाई हुई है। ग्रामीणों ने बंदरों के आतंक से छ़ुटकारा पाने के लिए गांव में नारेबाजी भी की और वन विभाग के जिम्मेदारों से बंदरों से निजात दिलाने हेतु गुहार लगाई।

थोड़ी सी निगाह चूकते ही बंदर मार देते हैं झपट्टा

गांवों में बंदरों का आतंक छाया हुआ है। बंदरों का झुंड कभी पेड़ पर, कभी रास्ते अथवा छतों पर डेरा डालते रहते हैं। कोई भोजन करता है, या खाद्य सामग्री बाजार से लाता है और थोड़ी निगाह चूकती है तो बंदर झपट्टा मारकर उसे झपट लेते हैं और सामग्री लेकर भाग जाते हैं। कोई भगाने की कोशिश करता है तो हमला कर देते हैं, दो-तीन बच्चे घायल भी हो चुके हैं।

छत पर कपड़ा सुखाना हुआ मुश्किल

गांव में बंदरों की दहशत इस तरह छाई कि घरों के छत पर लोगों को कपड़ा सुखाना मुश्किल हो गया है। यदि कोई धुला कपड़ा छत पर सूचने के लिए डालता है तो बंदर या उसे उठा ले जाते हैं अथवा नोंच-नोंच कर फाड़ देते हैं। अनाज सुखाने के लिए छत पर डाला जाता है तो भी बंदर मुसीबत बन जाते हैं। महिलाओं को लाठी-डंडा लेकर छतों पर रखवाली करनी पड़ती है।

समाधान का किया जाएगा प्रयास- वन दरोगा

ग्रामीणों में राम प्रसाद, राजू, बाबू राम, राम कुबेर का कहना है कि बंदरों का झुंड खाने पीने की सामग्री अथवा अन्य कीमती चीजों को उठाकर ले जाते हैं। ग्रामीण भगाते हैं तो बंदर उन पर हमला कर देते हैं। मन्तराम, प्रभावती देवी, मंजू आदि ने कहा कि बंदरों के आतंक से छतों पर जाना मुश्किल हो जाता है। छत पर कोई कार्य होता है तो पहरेदारी करनी पड़ती है। वन दरोगा चंद्रिका प्रसाद चौधरी ने बताया कि जानकारी हुई है। कर्मचारियों को भेजकर समाधान के लिए जो संभव प्रयास होगा, वह किया जाएगा।

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