सिद्धार्थनगर में बिना पंजीयन के संचालित हो रहे अस्पताल:विभागीय मिलीभगत से नहीं होती है कार्रवाई, सभी उपचार का किया जाता है दावा

सिद्धार्थनगर2 महीने पहले
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सिद्धार्थनगर में बिना पंजीयन के अस्पताल संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से इनका संचालन हो रहा है। इनपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि इनका संचालन लगभग दो वर्ष से हो रहा है। बावजूद इसके प्रति जिम्मेदार आंख बंद किए बैठे हैं।

खीरा मंडी डुमरियागंज में हिंद मैटरनिटी सेंटर के नाम से बोर्ड लगाकर किराए के भवन में अस्पताल संचालित हो रहा है। यहां ईसीजी जैसी अत्याधुनिक जांच की सुविधा के साथ हर रोग के उपचार की बात का उल्लेख अस्पताल के बोर्ड पर लिखा मिला। इतना नहीं अस्पताल परिसर में अल्ट्रासाउंड, पैथालाजी व मेडिकल स्टोर भी संचालित हो रहा है। यहा अल्ट्रासाउंड के लिए महिला और पुरुष इंतजार करते मिले।

अल्ट्रासाउंड कराने के लिए इस अस्पताल में मरीज आते हैं।
अल्ट्रासाउंड कराने के लिए इस अस्पताल में मरीज आते हैं।

अब तक बिना पंजियन के चल रहा था अस्पताल
संचालक मो. अली से पंजीयन के बारे में पूछने पर बताया कि डेढ़ माह पहले पंजीयन के लिए आवेदन किया है। अभी प्रपत्र नहीं मिला। अल्ट्रासाउंड सेंटर व पैथोलॉजी पंजीयन के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके। यहां बतौर चिकित्सक डा. मो. अफजल, डा. कमलेश कुमार, डा. खान जोहरा की तैनाती बताई गई। लेकिन संचालक के अलावा अन्य चिकित्सक नहीं मिले।

बिना पंजीकरण वाले अस्पताल में मेडिकल भी संचालित होता है।
बिना पंजीकरण वाले अस्पताल में मेडिकल भी संचालित होता है।

गेस्ट हाउस में चल रहा था अस्पताल
एक गेस्ट हाउस में कुछ दिन पहले तक चलने वाला जीवन हेल्थ केयर सेंटर एवं अल्ट्रासाउंड अब दूसरी जगह खीरा मंडी से ही संचालित हो रहा है। पूर्व एसडीएम ने इसे सील करते हुए कार्रवाई के लिए विभाग को लिखा था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। संचालक धीरज ने बताया कि अभी दूसरी जगह से शिफ्ट हुए हैं। पंजीयन तो अस्पताल का नहीं है। लेकिन इसके लिए आवेदन कर दिया गया है। यहां डा. असगर व डा. नेहा वर्मा की तैनाती बताई गई। लेकिन संचालक के अलावा कोई चिकित्सक नहीं मिला।

15 दिन के भीतर पंजीकरण कराने के लिए कहा गया
सीएमओ डा. अनिल चौधरी ने बताया कि बिना पंजीयन के चल रहे अस्पतालों को नोटिस दी गई है। 15 दिन के भीतर पंजीकरण कराने के लिए कहा गया है। समय सीमा पूर्ण होते ही टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। बिना पंजीयन चलने वाले अस्पताल बंद कराते हुए संचालक पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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