फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों को किया गया जागरूक:कृषि वैज्ञानिकों ने बताई विधि, कहा- फसल अवशेष को जलाएं नहीं खेत में सड़ाये

सिद्धार्थनगर2 महीने पहले
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सिद्धार्थनगर में कृषि विज्ञान केंद्र सोहन के कृषि वैज्ञानिकों ने बढ़नी के चरगवां में इन सीटू फसल अवशेष प्रबंधन योजना को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें फसल सुरक्षा कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने किसानों को जागरूक किया।

उन्होंने बताया कि फसल अवशेष के जलाने से पर्यावरण में कार्बन ऑक्साइड, कार्बनमोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई-ऑक्साइड, सूक्ष्म कण जैसे हानिकारक पदार्थ घुलकर पशुओं और मनुष्यों को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि किसान भाई फसल अवशेष नहीं जलाये।

कृषि वैज्ञानिकों ने बढ़नी के चरगवां में किसानों को किया जागरूक।
कृषि वैज्ञानिकों ने बढ़नी के चरगवां में किसानों को किया जागरूक।

20 से 25 दिन में फसल अवशेष सड़कर खाद बन जायेगा
कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. एसएन सिंह ने कहा कि फसल के अवशेषों को खेत में ही डिकम्पोजर की सहायता से सड़ाये। 25 लीटर पानी में 1 से 2 किलोग्राम गुड़ को मिलाकर हल्की आंच पर उबालें।उबालनें के बाद इसे ठंडा करें। इसके बाद डिकंपोज़र की एक कैप्सूल को घोलें और फिर घोल को 3 से 4 दिन के लिये रख दें। इसके बाद 10 लीटर प्रति एकड़ प्रयोग करें। जिससे 20 से 25 दिन में फसल अवशेष सड़कर खाद बन जायेगा।

अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरा नष्ट हो जाती है
बीज वैज्ञानिक डॉ सर्वजीत ने बताया की एक टन धान अवशेष में लगभग 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 2.5 किलोग्राम पोटाश और 1.2 किलोग्राम सल्फर और 400 किलोग्राम कार्बन होता है। जो फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरा नष्ट हो जाती है। यदि किसान धान के अवशेष को प्रभावी तरीके से अपने खेत में ही कृषि यंत्रो से या डिकम्पोज़र की सहायता से खेतों में ही मिलाकर सड़ाते हैं तो अगली फसल की शुरुआती अवस्था में लगभग 40 प्रतिशत नाइट्रोजन, 30 से 35 प्रतिशत फास्फोरस, 80 से 85 प्रतिशत पोटाश और 40 से 45 प्रतिशत सल्फर की पूर्ति हो जाती है। इसलिए किसान भाई फसल अवशेष न जलाकर खेत में ही सड़ाये।

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