सिद्धार्थनगर में दफनाए गए ताजिये:पूरी रात मरसिया मजलिस के साथ नौहा-मातम मनाया, जियारत कर बोसा लिया

सिद्धार्थनगर2 महीने पहले
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डुमरियागंज तहसील छेत्र के शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर में रविवार की शाम पैगम्बरे इस्लाम हजरत मुहम्मद मुस्तफा के नवासे हजरत इमाम हसन अलैहिस्सलाम की शहादत पर तमाम घरों पर ताजिए रखे गए। पूरी रात मरसिया मजलिस के साथ नौहा-मातम भी हुआ।

28 सफर के मौके रविवार की शाम कस्बे में हज़रत रसूल ए खुदा सल्लाहो अलैहे व सल्लम और हजरत इमाम हसन इब्ने अली अलैहिस्सलाम के शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर जगह-जगह ताजिए रखे गए। जहां बड़ी तादाद में लोगों ने जियारत कर बोसा लिया।

मातमी दस्ता निकाला

अंजुमन गुलदस्ता मातम रजि. के सालाना अशरे की सातवीं मजलिस को लखनऊ से आये मौलाना मंजर सादिक ने सीरते पैगम्बर व सीरते इमाम हसन अलैहिस्सलाम पर विस्तार से रोशनी डाली। मजलिस के बाद इमाम हसन अस के शबीहे ताबूत के साथ मातमी दस्ता निकला जो बाबुल बाबा के इमाम बाड़े पर जाकर खत्म हुआ।

इन्ही ताजिये को मातमी मंजर के बाद दफन किया गया।
इन्ही ताजिये को मातमी मंजर के बाद दफन किया गया।

जमीन में दफन किये ताजिया

कस्बे के पश्चिम स्थित कर्बला में शहीदों की याद में मंजरे कर्बला को जमीन पर मंजरकशी की गई। सोमवार दोपहर बाद लोग अपने-अपने ताजियों को उठाकर कर्बला ले गए, जहां ताजिए को दफन किया गया।

इसी क्रम में हुसैनिया बाबुल बाबा में एक मजलिस आयोजित हुई। जिसे मौलाना मोहम्मद हसन ने खिताब किया। मजलिस से पूर्व सोजख्वानी हैदरे कर्रार व हमनवा ने किया। नौहाख्वानी को सावन, मंज़र, फ़ज़ले, सज्जाद, आरज़ू, फरहान आदि ने अंजाम दिया। डॉ वज़ाहत हुसैन, काज़िम रज़ा, तसकीन हैदर, इंतेज़ार शबाब, शहनवाज, सोजफ़, शानू, जैगम, सनी, सलमान, आबिद, मोजिज़ आदि मौजूद रहे।