मां कालरात्रि के पूजन को उमड़ा जन सैलाब:गालापुर में पूजन-अर्चन से भक्ति मय रहा वातावरण, सुबह से लगी लाइनें

सिद्धार्थनगर2 महीने पहले
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गालापुर धाम में देवी के सप्तम स्वरूप कालरात्रि के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही। - Dainik Bhaskar
गालापुर धाम में देवी के सप्तम स्वरूप कालरात्रि के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही।

सिद्धार्थनगर में शारदीय नवरात्र के सातवें दिन रविवार को तहसील अन्तर्गत धार्मिक स्थल गालापुर धाम में देवी के सप्तम स्वरूप कालरात्रि के दर्शन-पूजन के लिए जन-सैलाब उमड़ पड़ा। भोर से ही यहां भक्तों की भीड़ दिखाई दी। इसका क्रम पूरे दिन चलता रहा। मां के जयकारे की गूंज आसपास गूंजती रही।

देवी स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ पूजन-अर्चन के लिए आने लगी। पुरुष, महिलाएं, बच्चे सभी श्रद्धा में डूबे रहे। श्रद्धालु हाथ में पुष्प, नारियल, चुनरी आदि लेकर अपनी बारी के आने की प्रतीक्षा करते रहे। हर कोई माता के दर्शन को लालायित दिखा। रुक-रुककर हो रहे मां के जयकारे से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु 11, 51, 101 परिक्रमा कर अपनी हाजिरी मां के दरबार में लगाते हुए देखे गए।

गालापुर धाम में देवी के सप्तम स्वरूप कालरात्रि के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही।
गालापुर धाम में देवी के सप्तम स्वरूप कालरात्रि के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही।

दूर-दराज से आते हैं भक्त
मंदिर के बाहर मेले जैसा माहौल रहा। ऐसी मान्यता है कि माता के इस दरबार मे आने वाला कोई भी भक्त निराश नहीं लौटता है। माता सबकी मुरादें पूरी करती हैं। पूजा-अर्चना के समय स्थान पर मिले श्रद्धालु विजय मणि उर्फ झब्बू पांडेय, सुमित्रानंदन दुबे आदि ने बताया कि वर्ष के दोनों नवरात्र के अवसर पर वह लोग यहां आते हैं। पूजन-अर्चन के साथ मां का आशीर्वाद लेते हैं।

भगवान के द्वारपाल थे जय- विजय
भानपुर रानी में आयोजित मां दुर्गा पूजा समारोह के दूसरे दिन कथावाचक पंडित पुजारी प्रसाद दूबे ने अपने प्रवचन के दौरान भगवान विष्णु के लिए गए समस्त अवतार पर विस्तृत प्रकाश डाला। कहा कि एक बार सनकादि मुनि भगवान विष्णु के दर्शन करने बैकुंठ आए उस समय बैकुंठ के द्वार पर जय - विजय नाम के दो द्वारपाल पहरा दे रहे थे। मुनि द्वार से होकर जाने लगे तो जय विजय ने उनकी हंसी उड़ाते हुए उन्हें रोक लिया।

क्रोधित होकर मुनि ने दिया था श्राप
क्रोधित होकर सनकादि मुनि ने जय विजय को तीन जन्मों तक राक्षस योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया। मुनि के श्राप से घबराकर जय विजय द्वारा सनकादि मुनि जी से क्षमा मांगने पर सनकादि मुनि ने कहा कि तीनों ही जन्म में तुम्हारा अंत स्वयं जगत के पालनहार श्री हरि भगवान विष्णु जी करेंगे। ओमप्रकाश श्रीवास्तव, संतोष सैनी, पवन कुमार प्रजापति, राहुल सैनी, गुड्डू रावत, पिंटू अग्रहरि, अमरीका गुप्ता, कुलदीप पाठक, प्रिंस कन्नौजिया, देवानंद पाठक, नीरज अग्रहरि, प्रहलाद, पी.डी. दूबे, दुर्गेश अग्रहरि, विशाल पाठक, तिलकराम यादव, राज अग्रहरि आदि मौजूद रहे।

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