सिद्धार्थनगर में हरी खाद के लिए ढ़ैंचा की बुवाई:मिट्टी में होगी सूक्ष्म जीवों की बढ़ोत्तरी, मृदा संरक्षण व जल धारण की शक्ति में सुधार

सिद्धार्थनगर2 महीने पहले
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डुमरियागंज तहसील के कैथवलिया रेहरा में भारी संख्या में किसान ढ़ैंचा की बुवाई किये हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनकी फसल को हरी खाद मिलेगी और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। गांव में लगभग 35 बीघे से अधिक भूभाग पर इसकी खेती की गई है। धान की रोपाई से पहले जोताई कर इसे मिट्टी में मिलाकर पलेवा किया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिकों से मिली सलाह के बाद किसान इसकी खेती से जुड़े हैं।

किसान साल दर साल अधिक अन्न उत्पादन की होड़ में रासायनिक खाद डाई, यूरिया और पोटाश का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो रासायनिक खाद के लगातार प्रयोग से कुछ समय तो अच्छा उत्पादन मिलता है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी उर्वरा क्षमता खत्म होने लगती है। इसी समस्या से कैथवलिया रेहरा पंचायत के किसान जूझ रहे थे।

डुमरियागंज तहसील के कैथवलिया रेहरा में किसानों ने की ढ़ैंचा की बुवाई।
डुमरियागंज तहसील के कैथवलिया रेहरा में किसानों ने की ढ़ैंचा की बुवाई।

किसानों को अनुदान पर मिला बीज
अनूप श्रीवास्तव, छोटे यादव और भूपेंद्र त्रिपाठी सहित दर्जनों किसान अपने खेत की घटती उर्वरा शक्ति से परेशान थे। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि विज्ञानी डा. मार्कडेय सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने हरी खाद के रूप में ढ़ैंचा बोने की सलाह दी। कृषि गोदाम डुमरियागंज से अनुदान पर बीज मिला तो किसानों ने मई महीने में इसकी बुआई की।

कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डा. मार्कडेय सिंह ने किसानों को ढ़ैचा की खेती करने की सलाह दी।
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डा. मार्कडेय सिंह ने किसानों को ढ़ैचा की खेती करने की सलाह दी।

ढ़ैंचा का पौधा खेत से नष्ट करता है खर पतवार
कृषि वैज्ञानिक डा. मार्कडेय सिंह ने बताया कि ढ़ैंचा की हरी खाद से मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की बढ़ोत्तरी होती है। मृदा संरक्षण व जल धारण की शक्ति में सुधार होता है। इसके साथ ही मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है। ढ़ैंचा का पौधा खेत से खर पतवार भी नष्ट कर देता है।

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