सीतापुर जेल में बंदी की मौत:जेल प्रशासन का कहना- हार्ट अटैक से गई जान, 7 दिन पहले भी एक बंदी की हुई थी मौत

सीतापुर3 दिन पहले
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जेल प्रशासन ने कैदी की मौत को हार्ट अटैक से होना बताया है। - Dainik Bhaskar
जेल प्रशासन ने कैदी की मौत को हार्ट अटैक से होना बताया है।

सीतापुर में सात दिन पहले जेल में दाखिल हुए एक सजायाप्ता कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी। जेल प्रशासन ने परिजनों को सूचना दे दी है। वहीं, जेल प्रशासन ने कैदी की मौत को हार्ट अटैक से होना बताया है।

दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने अभी 7 दिन पहले ही बंदी को सजा सुनाई थी जिसके बाद वह जेल में बंद हुआ था। जेल के अंदर अचानक कैदी की मौत से अब जेल प्रशासन पर सवालियां निशान उठने लगे हैं। बीती 23 दिसंबर को भी रिहाई के एक दिन पहले की कैदी की मौत हुई थी।

7 दिन पहले आये बंदी की हुयी मौत

मामला सीतापुर के जिला कारागार का है। यहां बाराबंकी जनपद के घुंघटेर थाना अंतर्गत ग्राम अट्ठार निवासी हरिनाम पुत्र पाटनदीन पर महमूदबाद कस्बे की एक महिला को अपने साथ भगाकर उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप था। मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी हरिनाम जमानत पर रिहा चल रहा था लेकिन केस कोर्ट में ट्रायल चलने के बाद 7 जनवरी को कोर्ट ने उसे दुष्कर्म के आरोप में दोषी करार देते हुए उसे 8 साल की सजा सुनाई थी।

देर रात बिगड़ी थी तबियत

पुलिस ने उसे जेल भेज दिया था। परिजनों के मुताबिक, बीती देर रात बंदी हरिनाम की तबियत बिगड़ी तो जेल प्रशासन ने उसकी सूचना परिजनों की दी लेकिन दोपहर बाद अचानक उसकी तबियत बिगड़ी और उसकी मौत हो गयी। परिजन जब तक जेल पहुंचते तब तक परिजनों को बंदी की मौत की सूचना भी मिल गयी।

एक माह के भीतर दो कैदियों की संदिग्ध मौत

जेल में सजा पाए कैदी की मौत पर जेलर आर.एस.यादव का कहना है कि कैदी की हार्ट अटैक से मौत हुई है और परिजनों ने भी किसी प्रकार का नहीं लगाया है। गौरतलब है कि 23 दिसंबर को भी जब पत्नी और उसके दो बच्चे अपने पिता की रिहाई की खबर सुनकर खुश थे लेकिन जब तक परिजन जेल पहुंचते तब तक उस कैदी की भी रिहाई से पहले ही जेल में मौत हो गयी।

जेल प्रशासन पर लगाया था प्राताड़न का आरोप

उस वक्त भी परिजनों ने जेल प्रशासन पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था लेकिन जेल प्रशासन ने उस वक़्त भी कैदी की हार्ड अटैक से मौत होना स्वीकार किया था लेकिन एक माह अभी बीता भी नहीं था की दूसरे कैदी की भी आकस्मिक मौत हो गयी। कैदियों की असमय मौत से अब जेल प्रशासन पर सवालियां निशान जरूर खड़े होने लगे है लेकिन उस चारदीवारी के पीछे परिजनों की सुनने वाला कोई नहीं है और वह महज आरोप लगाकर ही संतुष्ट हो जाते है।