सुल्तानपुर में हड़ताल से ठप रहे ग्रामीण बैंक:79 ग्रामीण बैंक शाखाओं में पूरी तरह ठप रहा बैंकिंग कामकाज, सरकार पर लगाया निजीकरण का आरोप

सुल्तानपुर4 महीने पहले
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सुल्तानपुर में हड़ताल से ठप रहे ग्रामीण बैंक। - Dainik Bhaskar
सुल्तानपुर में हड़ताल से ठप रहे ग्रामीण बैंक।

ऑल इंडिया रीजनल रूरल बैंक एंप्लॉयज एसोसिएशन (अरेबिया) की हड़ताल के चलते सोमवार को सुल्तानपुर जिले की सभी 79 ग्रामीण बैंक शाखाओं में बैंकिंग कामकाज पूरी तरह ठप रहाl हड़ताली कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय पर स्थित बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष दिन भर धरना प्रदर्शन और नारेबाजी की l धरने को बड़ौदा यूपी बैंक एंप्लाइज यूनियन और ऑफिसर एसोसिएशन के प्रमुख पदाधिकारियों ने संबोधित किया l

भारतीय राष्ट्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना की मांग

धरने में दूर-दराज शाखाओं से आए हुए सैकड़ों अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुपम गोस्वामी ने कहा कि भारत सरकार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का निजीकरण करना चाहती है। सरकार अपनी पूंजी प्रायोजक बैंकों को ट्रांसफर करने का षड्यंत्र कर रही है, जिसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि देश भर की सभी ग्रामीण बैंकों को आपस में मिलाकर भारतीय राष्ट्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना की जाए। प्रायोजक बैंकों का नियंत्रण पूरी तरह से समाप्त किया जाए। यह भी कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ही देश की गरीब जनता और किसानों की इमानदारी से सेवा कर रहे हैं। अगर उनका निजी करण किया जाएगा तो फिर से देश में साहूकारी और महाजनी प्रथा लौट आएगी l

बैंक कर्मियों के प्रति हो रहा सौतेला व्यवहार

कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष आनंद तिवारी ने कहा कि भारत सरकार ग्रामीण बैंक कर्मियों के प्रति सौतेला व्यवहार कर रही है। ग्रामीण बैंक कर्मियों को पूरी तरह से प्रायोजक बैंकों के समान सभी भत्ते और सुविधाएं अभी भी नहीं दी जा रही हैं। यूनियन के क्षेत्रीय महासचिव सुरेंद्र पांडेय ने बैंक प्रबंधन पर आरोप लगाया कि सफाई कर्मियों के पीएफ कटौती के मामले में बैंक प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की भी अवमानना कर रहा है l ऑफिसर एसोसिएशन के क्षेत्रीय अध्यक्ष आशुतोष मौर्य ने कहा कि पेंशन व्यवस्था लागू होने तक ग्रामीण बैंकों में जितने भी अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत थे, सभी को पुरानी पेंशन योजना से कवर दिया जाना चाहिए, लेकिन सरकार द्वारा केवल वर्ष 2010 तक के कर्मचारियों को ही कवर किया गया है।

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