सपा सत्ता और कांग्रेस जनता की लड़ रही लड़ाई:सुल्तानपुर में लोगों की समस्याओं को लेकर सड़क पर होता कांग्रेसियों का हल्ला-बोल, कार्यालय तक सीमित दिख रहे सपाई

सुल्तानपुर4 महीने पहले
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उत्तर प्रदेश की सत्ता हथियाने के लिए सपाई आतुर हैं। हालांकि जिस जनता से उन्हें वोट लेना है, उन्हीं के मुद्दों को उठाने के लिए समाजवादी तैयार नहीं। आलम यह है कि जिलाध्यक्ष से लेकर कार्यकर्ता तक लाल टोपी पहन कार्यालय में कुर्सियों की शोभा बढ़ा रहे। वहीं प्रियंका गांधी के जान फूंकने के बाद कांग्रेसी सड़क पर डटे हैं। बरसों बाद यहां जनता के मूलभूत मुद्दे खाद, धान और सड़क की बदहाली को लेकर कांग्रेस जन प्रदर्शन कर रही है। ऐसे में जहां कांग्रेस का ग्रॉफ बढ़ने की संभावना है तो वहीं सपा के गर्त में जाने का खतरा है।

सड़कों पर प्रायश्चित यात्रा निकाली

6 दिसंबर 2021 से लेकर 6 जनवरी के मध्य कांग्रेसी 6 बार सुल्तानपुर की सड़कों पर उतरे। 6 दिसंबर को खाद की किल्लत, धान खरीद और खस्ताहाल सड़कों को लेकर कांग्रेसियों ने डीएम ऑफिस पर प्रदर्शन किया। इसके बाद यूपी के बांदा में 8 ट्रकों में भरकर गौवंशों को जिंदा दफनाए जाने के विरोध में अपने नेतृत्व के निर्देश पर कांग्रेसी 13 दिसंबर को फिर सड़क पर उतरे। बड़ी संख्या में शहर की सड़कों पर प्रायश्चित यात्रा निकाली। गौशाला पर पहुंचकर सरकार के खिलाफ बुद्धि-शुद्धि यज्ञ किया।

सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसी

यह सिलसिला जारी रखते हुए कांग्रेसी 15 दिसंबर को जयसिंहपुर तहसील पहुंचे और वहां सड़कों की मरम्मत और धान खरीद के लिए तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। ठीक दूसरे दिन 16 दिसंबर को प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने के लिए विरोध दर्ज कराया। इसके बाद 14 दिनों तक चुप बैठे कांग्रेसी हजारों की संख्या में 30 दिसंबर को अमेठी पहुंच गए। यहां दलित किशोरी की पिटाई में हुए प्रदेश अध्यक्ष के प्रदर्शन में शामिल हुए। नए साल में 4 जनवरी को कांग्रेसियों ने चिट फंड कंपनियों के खिलाफ भी मोर्चा खोला।

सपाई 2022 में सरकार बनाने का दावा कर रहे

वहीं 2017 में जिले की 5 में से 4 सीटें गंवा चुके सपाई 2022 में सरकार बनाने और सत्ता में आने का दम भर रहे हैं। वो भी जनता से मुंह फेर कर कार्यालय में बैठकर। सूत्रों के अनुसार जिलाध्यक्ष से लेकर उनके खेमे के कुछ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता दिन भर यहां मौज मस्ती करके शाम होते वापस हो लेते हैं। सवाल तो है कि जब यह जनता की समस्या को सुनने को तैयार नहीं, उनके मुद्दे उठाने को राजी नहीं तो कुछ दिनों बाद उसी जनता के बीच कौन सा मुंह लेकर जाएंगे। क्या ऐसे में सुल्तानपुर की सीटें सपा के खाते में आ सकती हैं। उधर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जिले का प्रभार भी उस हाथ में दे रखा है, जो हाल में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में भाई की पत्नी को चुनाव नहीं जीता सके।

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