लखीमपुर हिंसा के विरोध में सुल्तानपुर में मशाल जुलूस:डीएम ऑफिस के सामने प्रदर्शन किया; बोले- किसान विरोधी नीति अपना रही सरकार, किसानों के हक का हनन करने की कर रही राजनीति

सुल्तानपुर10 दिन पहले
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मशाल जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। - Dainik Bhaskar
मशाल जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया।

यूपी चुनाव से ठीक पहले लखीमपुर में भड़की आग ठंडी पड़ने का नाम नही ले रही है। गुरुवार रात सुलतानपुर में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्यों ने मशाल जुलूस निकालकर डीएम ऑफिस पर प्रदर्शन किया। एसोसिशन के जिला उपाध्यक्ष रवि प्रजापति ने सरकार की नीतियों पर चिंता जताई और कहा कि किसान इस देश की सबसे मजबूत आधारशिला है। यह सरकार किसान विरोधी नीति अपना कर किसानों के हक का हनन करने की राजनीति कर रही हैं।

लखीमपुर खीरी में हुई निर्मम तरीके से किसानों की हत्या व साथ में पत्रकार रमन की हत्या में शामिल निरंकुश केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उर्फ मोनू ने गाड़ी द्वारा कुचल कर मार दिए जाने पर एसोसिशन के सदस्य आक्रोशित दिखे। एसोसिशन की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप यादव जनवादी ने कहा कि घटना पर खामोश मोदी नीति योगी सरकार के खिलाफ किसानों की निर्मम हत्या पर उन्हें ढांढस बंधाने और न्याय दिलाने के लिए हम सड़कों पर संघर्ष करने के लिए उतरना पड़ा।

सामंतवाद की जड़ें मजबूत हो गई हैं

आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार महा जंगलराज में तब्दील हो गई है। टेनी मिश्रा और उसके पुत्र आशीष मिश्रा ने किसानों के साथ मध्ययुगीन बर्बरता दिखाते हुए किसानों को अपनी गाड़ियों से रौंद कर यह साबित कर दिया है कि सामंतवाद की जड़ें मजबूत हो गयी हैं। इसीलिए सरकार इनकी गिरफ्तारी नहीं कर पा रही है। उन्होंने यह भी कहा क्या मंत्री व उनके कारिंदे बेटे किसानों को भेड़-बकरी समझ रहे थे जो रौदते चले गये। हमें लगता है आज लोकतंत्र खतरे में है।

सरकार कारपोरेट घरानों की पिट्ठू बन बैठी है

उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे और काले कानून पर कोई ठोस पहल सरकार नही कर रही है। अलबत्ता वो और इसे हिंसक बनाने के लिए अपने मंत्रियों और अफसरों को उकसा रही है। जिसका परिणाम लखीमपुर में देखने को मिला। सभी विपक्षी पार्टियों को नजरबंद कर दिया गया ताकी मनमानी किया जा सके। अभी तक सैकड़ों किसानों ने अपनी शहादत दे दी है लेकिन सरकार टस से मस नहीं हो रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार कारपोरेट घरानों की पिट्ठू बन बैठी है।

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