अलीगंज में निकला चेह्ल्लुम का जुलूस:मौलाना जमाल अब्बास बोले-हुसैन की जीत का सबूत, किसी मुसलमान के घर में नहीं मिलेगा यज़ीद नाम का बच्चा

सुल्तानपुर6 दिन पहले
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तकरीर में शामिल लोग। - Dainik Bhaskar
तकरीर में शामिल लोग।

चेह्ल्लुम के मौके पर बंधुआकला थाना क्षेत्र के अलीगंज बाजार में जुलूस निकालकर हजरत इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश किया गया। बड़ी संख्या शिया-सुन्नी समुदाय ने एक साथ जुलूस निकाला और ताजिये को सुपुर्द खाक किया। ये जानकारी मौलाना रजी हैदर ने दी।

मौलाना ने बताया कि जुलूस अलीगंज से मनियारी गांव में इमामबारगाह हुसैनिया बाबुल मुराद से निकाला गया। जो अलीगंज स्थित दरगाह हजरत अली में जाकर समाप्त हुआ। दौराने जुलूस अलीगंज बाजार में मस्जिद के सामने मौलाना जमाल अब्बास ने तकरीर की। मौलाना ने कहा कि सन चौदह सौ साल पहले यज़ीद ने इमाम हुसैन को कत्ल करके ये सोचा था कि अब तो ये नाम मिट जाएगा। लेकिन नामे हुसैन आजतक जिंदा है पर यजीद का नाम मिट गया। आज उसकी हिमायत करने वाले भी अपने बच्चों का नाम यज़ीद नहीं रखते। लेकिन हर मुसलमान के घर में एक नाम हुसैन का मिल जाएगा।

लखनऊ-वाराणसी हाइवे से गुजरता जुलूस।
लखनऊ-वाराणसी हाइवे से गुजरता जुलूस।

कर्बला वालों की याद में निकला जुलूस

मौलाना रजी हैदर ने बताया कि 10 मोहर्रम सन 61 हिजरी को इमामे हुसैन और उनके 71 साथी कत्ल हुए थे ठीक दूसरे दिन उनकी औरतों-बच्चों को कैदी बनाकर कूफा और कूफे से शाम ले जाया गया था। शाम में जिंदाने शाम में सबको एक साल तक कैद रखा गया। एक साल तक शाम के जिंदान में कैद रखने के बाद यजीद ने इमाम हुसैन के बेटे इमामे सज्जाद को बुलाया और हत्थकड़ी बेड़ी को कटवाकर कहा कि हमने तुम्हें आजाद कर दिया। जिसके बाद काफिला वहां से कर्बला पहुंचा था।

जुलूस में मोहम्मद शोएब, डॉ. तकी हैदर, अरमान हुसैन, गुलाम अली, मोहम्मद सादिक, सगीर हुसैन, नवाब हैदर, आबिद हुसैन आदि मौजूद रहे।

घरों से निकला ताजिया।
घरों से निकला ताजिया।
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