विश्व की सबसे खतरनाक खरपतवार गाजर घास:मनुष्य में दमा और एलर्जी रोग करती पैदा, पशुओं को भी नुकसान, खात्मे के बताए तरीके

हसनगंज, उन्नाव15 दिन पहले
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हसनगंज में कृषि विज्ञान केन्द्र धौरा में गाजर घास उन्मूलन की किसानो को जानकारी दी गई। इस दौरान किसानों को गाजर घास से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक एके सिंह ने बताया गाजर घास विश्व की सबसे खतरनाक खरपतवार है। जो मनुष्य में विभिन्न प्रकार के रोग जैसे दमा और एलर्जी पैदा करती है। इस घास से पशुओं को भी नुकसान होता है। भारत में यह घास सबसे पहले 1955 में महाराष्ट्र में देखी गई थी।

एक साल में तीन पीढ़ी पूरी कर लेती गाजर घास

बताया कि जब हमारे देश में अमेरिका से शंकर गेहूं लाया गया, उसी के साथ इस घास का भी हमारे देश में फैलाव हो गया। वैज्ञानिक डा. जय कुमार यादव ने बताया की इस घास का पौधा एक वर्ष में लगभग दो - तीन पीढ़ी लगभग पूरी कर लेता है। 1 वर्ग मीटर जगह में इसके पौधों से एक से डेढ़ लाख बीज पैदा होते हैं। इस घास को खत्म करने के लिए इसमें फूल आने से पहले इसको उखाड़ कर कहीं मिट्टी में दबा देना चाहिए। उखाड़ते समय हाथ पर ग्लब्स और मुंह पर मास्क जरूर लगा कर रखें।

मैक्सिकन बीटल से हो सकता इसका खात्मा

इस घास को मैक्सिकन बीटल से खत्म किया जा सकता है। यह बीटल्स इसके पौधों को खा जाता है। इसके अलावा रसायन से इसको खत्म किया जा सकता है, जैसे- ग्लैफोसेट एक से डेढ़ लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600 से 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करके, मेट्रिब्यूज़ीन 0. 5 लीटर प्रति हेक्टयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान डा. अर्चना सिंह, डा. रत्ना सहाय, डा. धीरज कुमार तिवारी, इंजी. रमेश चंद्र मौर्य, डा. सुनील सिंह, डा. विनीता सिंह शांतनु और अनुभव आदि मौजूद रहा। कार्यक्रम में बांदा कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बीएससी उद्यान विभाग के छात्रों ने भी प्रतिभाग किया।

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