उन्नाव में धान न बिकने से परेशान किसान:नहीं हो रहा खतौनी का सत्यापन,तहसील के रोजाना काट रहे चक्कर

उन्नावएक महीने पहले
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किसान खरीद केंद्रों में धान की - Dainik Bhaskar
किसान खरीद केंद्रों में धान की

किसानों की आय दोगुनी करने के दावे धरातल पर खोखले नजर आ रहे है। आलम यह है कि किसान खरीद केंद्रों पर अपनी उपज तक नहीं बेच पा रहे हैं। अफसरों की लापरवाही से किसानों की खतौनी का समय से सत्यापन नहीं हो पा रहा है। इससे किसान मजबूरन बिचौलियों को अपनी फसल बेच रहे हैं।

खतौनी का सत्यापन है जरूरी
धान बिक्री के लिए पंजीकरण करा चुके हसनगंज के सैकड़ों किसानों का तहसील में सत्यापन नही हो सका है। इससे उनकी धान की फसल नहीं बिक पा रही है। दरअसल, धान बिक्री के लिए खतौनी का सत्यापन होना जरुरी है। किसान खतौनी का सत्यापन कराने के लिए तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। इससे मजबूरन किसान बिचौलियों से धान बेचने के लिए मजबूर है।

नहीं हो पा रही बुवाई
मकूर के किसान साकेश कुमार, हरौनी समसुद्दीनपुर के किसान धीरज कुमार, मवई ब्राह्मन के ओमप्रकाश, रामप्रकाश, होसराम, जितेंद्र कुमार सहित अन्य सैकड़ों किशानों के आवेदन पेंडिंग पड़े हुए है। किसानों का कहना है कि इस समय रबी की बुवाई का समय चल रहा है। ऐसे में बुवाई के लिए खाद, बीज की आवश्यकता है मगर धान की बिक्री न होने से बुवाई नहीं हो पा रही है।

क्या कहते है किसान
तहसील में धान बेचने के लिये इतनी परेशानी कभी नहीं रही। ऑनलाइन कराये हुए 15 दिन हो गए है। उसके बाद अभी तक तहसील से खतौनी सत्यापन नही हुई है। तहसील मुख्यालय के कई बार चक्कर लगा चुका हूं। सत्यापन न होने से सेंटर प्रभारी धान खरीद नही रहे है।

दीपक बताते है कि धान खरीद के लिए इतनी जटिल प्रक्रिया कर दी है। जिससे हम धान बेच ही नही पाएंगे और बिचौलियो से औने पौने दाम बेच दे रहे है। खेतौनी का तहसील स्तर से सत्यापन नहीं होता है। तहसील के चक्कर पे चक्कर लगा चुके है।

शैलेंद्र कुमार शुक्ला कहते है कि हम 8 दिन से तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। हर बार यही बताया जाता है कि आपका खाता सत्यापित नहीं हो पाएगा । लेखपाल तथा अन्य कर्मियां के चक्कर काट रहे हैं मगर खतौनी सत्यापित नहीं हुई।

रामेश्वर का कहना है कि रबी की बुवाई का समय चल रहा है। ऐसे में धान की बिक्री न होने से खाद ,बीज नहीं खरीद पा रहे हैं। समझ नहीं आ रहा है किस प्रकार से किसानों की आय दोगुनी की जा रही है।