वाराणसी से झांसी तक वीरांगना एक्सप्रेस चलाई जाए:रानी लक्ष्मीबाई की जन्मस्थली पर मनाई गई जयंती; काशी से गई मिट्टी को झांसी में रखा गया

वाराणसी2 महीने पहले
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वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 186वीं जयंती वाराणसी में उनकी जन्मस्थली भदैनी पर मनाई गई। - Dainik Bhaskar
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 186वीं जयंती वाराणसी में उनकी जन्मस्थली भदैनी पर मनाई गई।

वाराणसी के भदैनी स्थित जन्मस्थली पर रानी लक्ष्मीबाई की जयंती मनाई जा रही है। झांसी में 19 नवंबर को वाराणसी की इसी जन्मस्थली से गई मिट्टी और कलश से पूजा की जाएगी। पीएम नरेंद्र मोदी भी इसमें शामिल होंगे। वाराणसी में लोगों ने लक्ष्मीबाई की जयंती पर मांग की है कि महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर वीरांगना एक्सप्रेस झांसी तक चलाई जाए।

देश की प्रथम महिला वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 186वीं जयंती वाराणसी में उनकी जन्मस्थली भदैनी पर मनाई गई। लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर, 1828 को वाराणसी के भदैनी में हुआ था। भदैनी के सामने अस्सी घाट पुलिस चौकी है। उन्हें यहां पर मणिकर्णिका नाम से बुलाया जाता था। जागृति फाउंडेशन और महारानी लक्ष्मीबाई जन्मस्थली स्मारक समिति द्वारा यह कार्यक्रम किया गया।

बुंदेलखंड एक्सप्रेस का नाम बदलकर वीरांगना एक्सप्रेस करने की मांग।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस का नाम बदलकर वीरांगना एक्सप्रेस करने की मांग।

महंत बोले- गर्व है कि हम मनु के मोहल्ले से हैं
मुख्य अतिथि संकट मोचन मंदिर के महंत प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि हम मनु के मोहल्ले से हैं, यही बात काफी गर्व करने वाली है। झांसी की रानी पहले काशी की बेटी थी। उनके समर्पण ने देश को आजादी दिलाई। उनकी वीरता के किस्सों को पूरा वाराणसी बड़ी लगन के साथ पढ़ता है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि BHU राजनीति शास्त्र विभाग के डीन प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्र ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई ने झांसी में अंग्रेजों के सामने समर्पण करने से मना कर दिया। कहा कि मैं जिंदा रहते हुए अपनी झांसी किसी को नहीं दूंगी। उसी सोच की परिणति स्वतंत्रता के रूप में हमें मिली है।

जन्मस्थली से शहीद स्थल तक केवल 1 ट्रेन
जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अपील की है कि वाराणसी से झांसी जाने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस का नाम बदलकर वीरांगना एक्सप्रेस कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि महारानी की जन्म स्थली से लेकर उनकी शहीद स्थली तक सिर्फ एक ट्रेन जाती है। इसलिए इसका नाम वीरांगना ही होना चाहिए। प्रधानमंत्री यह काम पूरा करके महारानी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें।

समारोह में प्रभुदत्त त्रिपाठी, हृदय नारायण मिश्र, राजेश मिश्रा, सत्यांशु जोशी, प्रताप बहादुर सिंह, हरिनाथ गौड़ उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने किय और धन्यवाद विश्वनाथ यादव ने दिया।

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