BHU का सर्वे- 15% युवा वैक्सीन से दूर:वाराणसी में 3.50 लाख लोग वैक्सीन हेजीटेंसी के शिकार; स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ी

वाराणसीएक वर्ष पहले
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वाराणसी के जंतु विज्ञान विभाग में सर्वे करने वाले युवा वैज्ञानिकों की टीम। - Dainik Bhaskar
वाराणसी के जंतु विज्ञान विभाग में सर्वे करने वाले युवा वैज्ञानिकों की टीम।

कोरोना वायरस का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन दुनिया के 20 से ज्यादा देशों में फैल चुका है। मगर, वाराणसी में अभी भी लोग वैक्सीन से परहेज कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी की विजिट से पहले वाराणसी को 100% वैक्सीनेट करने का सपना अब अधूरा लग रहा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के रिसर्चरों ने एक सर्वे करके बताया है कि वाराणसी में करीब 15% युवा वैक्सीन हेजीटेंसी (वैक्सीन से दूरी बनाने वाले) के शिकार हैं। इस सर्वे में पूरे जिले से 5000 लोगों को शामिल किया गया, जिनकी औसत उम्र 24 साल है। वाकई, युवा ही वैक्सीन से परहेज कर रहे हैं। इन्होंने अब तक एक भी डोज नहीं ली।

रिसर्चरों ने वाराणसी शहर और गांव के हर इलाके में ऑनलाइन और ऑफलाइन सर्वे किया है। इस सर्वे में 18-40 साल आयु ग्रुप के लोग शामिल हैं। यह स्टडी मेड आर्काइव के प्री-प्रिंट में प्रकाशित भी हो चुका है।

दूसरी ओर वाराणसी के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभी भी साढ़े 3 लाख लोग ऐसे हैं जो वैक्सीन से बहुत दूर हैं। इन्हें वैक्सीनेशन सेंटर पर लाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। वैक्सीन हेजीटेंसी से आजीज आ चुका स्वास्थ्य विभाग वैक्सीन से दूर रहने वालों की पहचान कर रहा है। जल्द ही इनका विवरण जिला प्रशासन को सौंपने की तैयारी कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग का यह आकड़ा BHU के सर्वे में आए रिजल्ट से मैच कर रहा है। शहर की कुल व्यस्क जनता के सापेक्ष साढ़े 3 लाख भी 15% के ही आसपास बैठ रहा है।

CMO बोले, आगे आए सभासद और पार्षद
वाराणसी के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जिला प्रशासन, UNICEF और केयर इंडिया के साथ मिलकर तेजी से वैक्सीन हर व्यक्ति तक पहुंचा रहा है, मगर कुछ लोग हैं जो आज भी वैक्सीन से दूरी बनाकर बैठे हैं। वैक्सीन हेजीटेंसी की समस्या को खत्म करने के लिए स्थानीय नेताओं, पार्षदों और सभासदों को आगे आने की खासा जरूरत है। उनके क्षेत्र में उनकी बातें तो लोग समझेंगे।

सर्वे टीम में 3 विभाग शामिल
सर्वे करने वाली टीम में BHU का जंतु विज्ञान विभाग से जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, उत्कर्ष श्रीवास्तव्र अविनाश त्रिपाठी, जगजीत कौर, शिप्रा वर्मा और प्रज्जवल प्रताप समेत बड़ी संख्या में रिसर्चर शामिल हैं। वहीं एंथ्रोपोलॉजी, साइटोजेनेटिक्स, साइकोलॉजी और पूर्वांचल यूनिवसिटी के बायो टेक्नोलॉजी विभाग के शोधकर्ता शामिल रहे। इन्होंने बताया है कि निम्न वर्गीय लोगों में वैक्सीन को लेकर डर और भ्रम अभी भी बना हुआ है। इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब वाराणसी आए थे तो वैक्सीन हेजीटेंसी का मुद्दा उठाए थे। आज भी वही समस्या बनी हुई है।

आशा वर्कर और संगिनी ने जुटाए आंकड़े
इस सर्वे में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के छात्र, नौकरीपेशा और दुकानदारी करने वालों को शामिल किया गया था। गांव में लोगों से डाटा कलेक्शन का काम आशा वर्कर, कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, नर्स और संगिनी को शामिल किया गया था। वहीं ऑनलाइन में फॉर्म भरवाने के साथ ही लोगों से फोन पर बातचीत के आधार पर डाटा कलेक्ट किया गया।

इस सर्वे में इस तरह के कुछ सवाल लोगों से पूछे गए थे।

  • कोरोना वायरस क्या है?
  • कोरोना वैक्सीन क्या करती है?
  • कोरोना महामारी में सरकार की क्या भूमिका थी?
  • कोरोना वायरस के प्रसार में जनता की क्या भूमिका थी?
  • आपके अनुसार कौन सा कदम कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में मदद करेगा?
  • आप COVID-19 दूसरी लहर के दौरान भारत के स्वास्थ्य प्रबंधन को कैसे देखते हैं?
  • क्या आप टीका लगवाना पसंद करेंगे?
  • क्या आपने कोविड टेस्ट कराया?
  • कोविड पॉजिटिव हुए या नहीं?
  • आप वैक्सीन के बारे में क्या जानते हैं?
  • क्या वैक्सीनेशन लाइफटाइम COVID-19 से खिलाफ सुरक्षा देगा?
  • गांवों में वैक्सीनेशन करने में क्या-क्या दिक्कते आ रहीं हैं?
  • आपके आसपास वैक्सीनेशन प्रोग्राम को लेकर लोगों में कितना उत्साह है?
  • क्या आपने वैक्सीन ली। यदि नहीं लीं तो इसके पीछे क्या कारण रहा?