आजादी के 75वें साल पर 5 कहानियों की पेंटिंग:वाराणसी में 75 युवा 75 मीटर लंबे कैनवास पर उकेर रहें भारत की गाथा

वाराणसी7 महीने पहले
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वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित दृश्य कला संकाय की कला वीथिका में युवा कलाकारों की टीम पेंटिंग ले- आउट को मूर्त रूप प्रदान करने में जुटी हुई है। - Dainik Bhaskar
वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित दृश्य कला संकाय की कला वीथिका में युवा कलाकारों की टीम पेंटिंग ले- आउट को मूर्त रूप प्रदान करने में जुटी हुई है।

भारतीय स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरा होने पर वाराणसी में 75 मीटर लंबे कैनवास पर राष्ट्रीय सेवा योजना के 75 स्वयंसेवकों द्वारा पेंटिंग बनाई जा रही है। इस पेंटिंग में पूरे भारतवर्ष की गौरव गाथा और महान किरदारों को 5 हिस्साें में बांटकर दिखाया जाएगा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय की कला वीथिका में युवा कलाकारों की टीम पेंटिंग ले- आउट को मूर्त रूप प्रदान करने में जुटी हुई है।

75 मीटर लंबी यह पेंटिंग इस तरह से 5 कहानियां दिखाएगी। पहले भाग में स्वर्णिम भारत का अतीत, दूसरे भाग में विदेशी आक्रांताओं का आगमन, तीसरे भाग में स्वतंत्रता आंदोलन की संघर्ष गाथा, चौथे भाग में स्वतंत्रता के बाद भारत में हुए विकास कार्यों को उकेरा जा रहा है। वहीं अंतिम भाग में आज के भारत के बढ़ते कदम और देश के विकास कार्यों का चित्रण किया जाएगा।

इस पेंटिंग का निर्माण 25 दिनों के अंदर पूरा कर लिया जाएगा। इसे राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। वहीं BHU समेत पूरे शहर में इसका प्रदर्शन किया जाएगा।

पेंटिंग में दिखेगी बनारस की सधुक्कड़ी जीवनशैली NSS के कोआर्डिनेटर डॉ. बाला लखेंद्र ने बताया कि यह पेंटिंग संस्थान के क्रिएटिव छात्रों द्वारा ही तैयार की जा रही है। इस पेंटिंग में प्राचीन भारत के साथ अत्याधुनिकता की छाप दिखेगी। एक ही कैनवास में पेंटिंग से पूरे देश की विविधता और सांस्कृतिक पहलुओं को दर्शाया जाएगा।

इसमें डॉ. आंबेडकर संसद भवन में संविधान की प्रति लिए हुए बनाए गए हैं। कोविड की भयानक महामारी में डॉक्टरों ने लोगों को किस तरह से मुश्किल से बाहर निकाला उसका चित्र उकेरा गया है। इसके अलावा बनारस की संत परंपरा, सधुक्कड़ी और घाट की जीवनशैली, गंगा आरती और खेल में वाराणसी को मिले बड़े अचीवमेंट्स पर पेंटिंग बनाने का काम चल रहा है।

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