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  • Academic Honor And Respect Of Graduate Teachers Will Also Increase, Varanasi's Kashi Vidyapeeth Implemented In 400 Affiliated Colleges; 3000 Students Will Become Research Scholars

बनारस के गांवों में तैयार होंगे 3000 PhD स्कॉलर:काशी विद्यापीठ के 400 कॉलेजों के 500 शिक्षक बन सकते हैं गाइड, 10 अक्टूबर से टीचर्स को सुपरवाइजर बनाने की प्रक्रिया होगी शुरू

वाराणसी2 महीने पहले
अब गांव के टीचर भी सुपरवाइजर बन सकते हैं।

वाराणसी के गांवों में रिसर्च और PhD करने के लिए शहरों के बड़े-बड़े संस्थानों के चक्कर लगाने के झंझट से बहुत जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। गांवों में मौजूद कॉलेजों के ग्रेजुएशन के छात्रों को पढ़ाने वाले टीचर भी सुपरवाइजर बन सकते हैं।

दरअसल, वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ अपने 400 संबद्ध कॉलेजों में ग्रेजुएशन के अध्यापकों को गाइड (शोध निर्देशक) बनने का मौका दे रहा है। इससे यहां के करीब 500 टीचर्स को फायदा मिल सकता है। साथ ही इससे ग्रामीण इलाकों से करीब 3000 से अधिक PhD स्कॉलर तैयार होंगे।

यूपी के उच्च शिक्षा विभाग ने दिया था आदेश
हाल ही में उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर के महाविद्यालयों में इस व्यवस्था को लागू करने का आदेश दिया था। जिसके बाद महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने पूर्वांचल भर के अपने सभी संबद्ध कॉलेजों में इसे लागू कर दिया है। यहां 10 अक्टूबर से शिक्षकों को सुपरवाइजर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

अभी तक पीजी के ही टीचर्स कराते थे रिसर्च
काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर आनंद त्यागी के अनुसार कॉलेजों में रिसर्च वर्क को बढ़ावा देने के लिए यह कदम तत्काल उठाया गया है। अभी तक पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज में पढ़ाने वाले अध्यापक ही रिसर्च स्कॉलर रख सकते थे।

उनके मुताबिक इस फैसले के बाद अब ग्रेजुएशन के शिक्षकों को अपने रिसर्च ग्रोथ और एकेडमिक दुनिया में मान-सम्मान हासिल करने का मौका मिल जाएगा। साथ ही शहर के उच्च संस्थानों में सीटें कम होने के चलते जिन लोगों को एडमिशन नहीं हो पाता था। अब उन्हें PhD करने का भरपूर अवसर मिलेगा।

5 रिसर्च पेपर पब्लिश कराने वालों को ही मिलेगा मौका
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि कॉलेजों में रिसर्च कार्य UGC के निर्धारित मानकों पर ही कराए जा सकते हैं। ग्रेजुएशन के उन्ही प्रोफेसरों को यह मौका मिलेगा, जिन्होंने रेगुलर सीट से PhD किया है। कम से कम 5 रिसर्च पेपर जर्नल में पब्लिश भी हुए हों।

कॉलेजों के रिसर्च सुपरवाइजर अपने शोध के लिए निकट संस्थानों, महाविद्यालयों, रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैब के साथ ही यूनिवर्सिटी के अन्य संगठनों से सहयोग भी ले सकते हैं। ये लोग इन संस्थानों के रिसर्च वर्क का गहन अध्ययन भी कर सकते हैं।

गाइड बनने के लिए 10 अक्टूबर तक कर सकते हैं अप्लाई
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नवरत्न सिंह ने बताया कि वाराणसी के संबद्ध फंडेड और सरकारी कॉलेज में गाइड बनने के योग्य टीचर्स 10 अक्टूबर तक निर्धारित प्रोफॉर्मा पर अपना एप्लिकेशन जमा कर दें। योग्यता और मानक के बेस पर एप्लिकेशन की शॉर्ट लिस्टिंग के बाद जल्द ही रिजल्ट घोषित किया जाएगा। एप्लिकेशन का प्रोफॉर्मा विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.mgkvp.ac.in पर अपलोड कर दिया गया है।

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