वाराणसी में ओमिक्रॉन महोत्सव का शुभारंभ:VVIP के आवभगत या वैरिएंट का स्वागत, 80% मरीजों में मिला ओमिक्रॉन वैरिएंट

वाराणसीएक वर्ष पहले
वाराणसी का दृश्य।

कई महोत्सव बीतने के बाद अब वाराणसी में ओमिक्रॉन महोत्सव भी शुरू हो गया है। जब देश भर में ओमिक्रॉन के इक्का-दुक्का मामले आ रहे थे, तो लोग कोने-कोने से काशी की ओर कूच करने लगे। देश भर से श्रद्धालु, फिल्म स्टार, राजनेता, बिजनेसमैन आदि वाराणसी पहुंचने लगे।

बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ धाम यात्रा के तहत अभी भी फेस्टिवल्स चल रहे हैं। यह वाराणसी का सौभाग्य ही था कि यहां पर इतना भव्य महोत्सव चला। इतने घरेलू पर्यटक यहां पर आए। सौभाग्य ही दुर्भाग्य में तब्दील हो सकता है। पूरे प्रदेश में ओमिक्रॉन के एक्टिव मामले 25 ही थे। वहीं वाराणसी का 77 जोड़ दे तो अब कुल 103 केस हो चुका है।

डॉक्टरों का अनुमान है कि वाराणसी में कोरोना से संक्रमित होने वालों में 80% मरीजों में ओमिक्रॉन वैरिएंट मिल रहा है। शनिवार को देर रात तक हुए जीनोम सिक्वेंसिंग के दौरान 96 कोविड सैंपल में से 77 में यह वैरिएंट पाया गया। यह कुल मामलों का 80.20% आ रहा है। ऐसे में अब इस बात से गुरेज नहीं कि वाराणसी में कोरोना का खतरा कई गुना तेजी से बढ़ रहा है।

यह आज गोदौलिया-दशाश्वमेध मार्ग का नजारा है। गंभीर और विचार करने योग्य सवाल है कि ऐसी भीड़ उमड़ेगी तो कोरोना वायरस के संक्रमण में कमी कैसे आएगी।
यह आज गोदौलिया-दशाश्वमेध मार्ग का नजारा है। गंभीर और विचार करने योग्य सवाल है कि ऐसी भीड़ उमड़ेगी तो कोरोना वायरस के संक्रमण में कमी कैसे आएगी।

इसके बाद भी डॉक्टरों की अपील है कि इसे लेकर बहुत एंजायटी या नर्वस नहीं होना है। हम संक्रमित होने के बाद भी बचाव करते रहे। यह सबसे तेजी से फैलने वाला वैरिएंट है और रोगियों और वृद्धों पर किस तरह से असर करेगा इस पर अभी कोई स्टडी नहीं हुई है। युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है।

इस तरह चले महोत्सव

गंगा महोत्सव, काशी महोत्सव, काशी फिल्म फेस्टिवल, लोक रंग, राग-रंग, भजन संध्या, शंखवादन, चित्र प्रदर्शनी, शोभा यात्रा, संकीर्तन प्रभात फेरी आदि आयोजन तीन से 4 दिन के रहे। इसमें हिस्सा शामिल लाखों लोगों में हजारों की ट्रेवेल हिस्ट्री थी। न तो कोरोना जांच की सुविधा और न ही किसी प्रकार की कोई गाइडलाइन। सारे नियम कानून ध्वस्त थे। सरकारी मशीनरी अपने काम छोड़कर VVIP के स्वागत और आवभगत में व्यस्त रही। इन सब आयोजनों के सूत्रधार रहे धर्मार्थ कार्य मंत्री भी कोरोना के आगामी खतरे का अंदाजा नहीं था। तीसरी लहर को लेकर ओमिकॉन यात्रा कराई गई है।

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